ज्वालामुखी के विपिन ने 8 एकड़ में औषधीय पौधों की खेती कर किया कमाल,  सलाना कर रहे हैं दस लाख की कमाई

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ज्वालामुखी से पंकज ठाकुर की रिपोर्ट

कोरोना महासंकट के कारण बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत बनाने का आवाहन अभी किया गया हो, परन्तु हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के एक छोटे से गांव के एक बेरोजगार युवा ने कुछ साल पहले ही कड़ी मेहनत के दम पर गांव की मिट्टी से ही सोना उगाकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरककथा लिखी। ज्वालामुखी से 30 किलोमीटर दूर दराज के एक पिछड़े से गांव मगरू के विपिन ने मेडिसनल स्लांट्स की खेती कर युवाओं को कामयाबी की राह दिखाई है। विपिन अब दो कदम आगे बढक़र अपने कच्चे उत्पाद में वैल्यू एडिशन कर अब एमएस गोल्डन हर्बल के नाम से अपने उत्पाद बेचने शुरू कर दिए हैं। इतना ही विपिन ने अपने नजदीक के 28 किसानों को औषधीय पौधों की खेती के तैयार किया है, जिनमें से दस किसान इस दिशा में बेहतरीन काम कर रहे हैं। विपिन ने अपने अनुभव से एक बात जान ली है कि कामयाबी का मंत्रा मल्टी क्रॉपिंग है। यहीं वजह है कि अब उसके हर्बल गार्डन में फल और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं।
आठ एकड़ में औषधीय कृषिकरण
2009 का साल था। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्नातक विपिन ने उसी साल मेडिसनल प्लांट्स की खेती करने की सोची, जब प्रदेश के कम ही किसान इस दिशा में काम कर रहे थे। पहला साल तो इस खेती के जमा जोड़ को समझने- जाने में बीत गया लेकिन 2010- 2011 से उन्होंने अपने स्टार्टअप पर गंभीरता से काम करना शुरू किया। उन्होंने आठ एकड़ में एलोवेरा, स्टीविया, अश्वगंधा, सतावर, सफेद मुसली, सर्पगंधा व तुलसी, की खेती कर दी। शुरू में उनकी राह में कई परेशानियां आईं और अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में मुश्किल आई। प्रयास रंग लाए और उन्होंने कच्चा माल पंजाब में बेचना शुरू कर दिया। रोपड़ व लुधियाना में उनके उत्पादों की जोरदार मांग थी परन्तु अधिक ट्रांसपोर्ट खर्चे के कारण उन्हें उम्मीद के अनुरूप आय नहीं हो रही थी।
प्रोसेसिंग से वेल्यू एडिशन
विपिन का कहना है कि वह कच्चा माल बेचने के बजाये उसमें वेल्यू एडिशन कर मार्केट में भेजते हैं। उन्होंने इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है और बायलर भी लगाया है। एम एस गोल्डन हर्बल के नाम से मशहूर उनके उत्पादों के लिए अब कॉस्मेटिक इंडस्ट्री उनके हर्बल गार्डन में पहुंचने लगी है। पंजाब हिमाचल, दिल्ली व अन्य कई राज्यों में उनके प्रॉडक्ट की जोरदार मांग है।
साल की दस लाख कमाई
विपिन बताते हैं कि औषधीय खेती से उनकी सालाना आय 10 लाख के करीब है। उन्होंने क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए उसने 28 लोगों को औँषधीय पौधों की खेती के लिए जरूरी सहायता की है, जिनमें से दस किसान उनकी तरह औशधीय पौधों की खेती करना शुरू कर चुके हैं।
विपिन ने स्टेट मेडिसनल बोर्ड के साथ करार किया है जिसके तहत बो ढाई लाख मेडिसनल पौधा जोगिन्दरनगर हर्बल गार्डन को देंगे।

सब्जी व फल उत्पादन पर भी जोर

विपिन ने अब अपनेखेतों में औषधीय पौधों की खेंती के साथ बड़े स्तर पर सब्जियों का उत्पादन करने के मकसद से 1000 वर्ग मीटर एरिया में पॉलीहाउस लगा रखा है। उन्होंने 450 पौधा नींबू, 500 गलगल, 900 पौधा हइसैल क्वालिटी केले का लगा रखा है। विपिन ने सेब के 50 पौधे लगाए हैं जो फल देने लगे हैं। उसके बाग का सेब जून महीने में ही तैयार हो जाता है। पिछले सीजन मैं भी विपिन ने 15 पेटी सेब बाजार में बेचा है।


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