रंगों से खेलने का हुनर सीखने के लिए करती थीं रोजाना 35 किलोमीटर का सफर, अब कला समीक्षकों को सोचने पर मजबूर कर रहीं भुंतर की मोनिका चौहान की कलाकृतियां

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कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट

चलो मुलाकात करते हैं रंगों से खेलने की जिद्दी धुन वाली एक लड़की से, जिसने छायाचित्रों में छुपे मर्म को समझने और चित्रकला में गहरे उतरने के लिए निपुण होने के लिए रोजाना 35 किलोमीटर का सफर किया। इस कला की बरीकियों को समझा,प्रशिक्षण लिया और नियमित अभ्यास किया और फिर लीक से हट कर विषयों पर छायाचित्र बनाकर कला समीक्षकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कुल्लू के भुंतर की युवा चित्रकार मोनिका चौहान के बनाये छायाचित्र बीते दिनों खूब चर्चा में रहे, जब इसी माह रोरिख आर्ट गैलरी नग्गर(कुल्लू) में आयोजित एक सामूहिक प्रदर्शनी में उनके 13 चित्रों को प्रदर्शित किया गया। मोनिका चौहान की कलाकृतियां नारी वेदना के मुंह बोलते दस्तावेज हैं।
शौकिया तौर पर शुरू की थी चित्रकारी
मोनिका चौहान ने कुछ अर्सा पहले एक शौकिया चित्रकार के तौर पर रंगों से खेलना शुरू किया था, लेकिन चित्रकला के प्रति दीवानगी के चलते वह चित्रकला प्रदर्शनियों में पहुंचने लगी और यहीं पर मोनिका को चित्रकला के प्रति दिलचस्पी महसूस हुई और फिर पेंटिंग करने की आदत पड़ गई। मोनिका अब तक मैं 60 से अधिक छायाचित्रों का निर्माण कर चुकी हैं, जिनमें से 20 कलाकृतियां या तो उन्होंने गिफ्ट कर दी हैं अथवा बेच दी हैं, जबकि40 कलाकृतियां अब भी उसकी कलेक्शन में शामिल हैं। अब मोनिका नए विचारों के आधार पर बड़े कैनवास पर कलाकृतियां बनाने के काम में जुटी हैं।
May be an illustration of one or more people
मोनिका के चित्रों की तीन प्रदर्शनियां
मोनिका चौहान अपने चित्रों के विषयों के तौर पर आस-पास के वातावरण के साथ सपनों, घटनाओं से प्रेरणा लेना पसंद करती हैं। उनका कहना है कि जो उनके खुद के जीवन में घटा है,उन चीजों को चित्रित करना चाहती हैं। अब तक उनके चित्रों की तीन प्रदर्शनियां आयोजित हो चुकी हैं। पहली प्रदर्शनी खकनाल में साल 2018 में, दूसरी प्रदर्शनी शिमला, 26 से 28 नवंबर, 2019 तक और तीसरी प्रदर्शनी नग्गर कैसल में 13 से 15 फरवरी 2021 तक
आयोजित हुई है।
May be art of rose

आसान नहीं थी डगर

मोनिका चौहान कहती हैं कि वह भाग्यशाली रही कि उनको चित्रकाला में थंगका पेंटिंग में माहिर कृष्णा टशी जैसी महान पेंटर का कुशल मार्गदर्शन मिला। यह मोनिका का चित्रकला के लिए जुनून ही था कि चित्रकला की बारीकियां सीखने के लिए कुल्लू से खकनाल तक 35 किलोमीटर का सफर करती थी। मोनिका का कहना कि शुरूआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वे कहती हैं कि पेंटिंग शुरू करने के लिए आवश्यक शर्तें मानी जाने वाली वे सीधी रेखाएं और परफेक्ट सर्कल नहीं खींच पा रही थी। कृष्णा टशी के प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास से जल्द ही वह इस कला की गहराई में उतर गई।

प्रशिक्षण और अभ्यास से निखार

मोनिका ने वर्ष 2017-2018 में लगभग 1 वर्ष तक कृष्णा ताशी से प्रशिक्षण हासिल किया। इसके बाद मोनिका ने साल 2019 में 8 महीने तक अपने स्कूल शिक्षक एवं सवतंत्र चित्रकार सुरेंद्र शौंडा से आधुनिक कला में महारत हासिल की है। मोनिका की मां अंगोरा ऊन का व्यवसाय संचालित करती हैं। उनके दो भाई हैं, एक छोटा है और दूसरा मोनिका से बड़ा है।मोनिका ने समाजशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की है।


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