माउंटेन मैन के नाम से जानती है दुनिया, सैंकड़ों विदेशी ट्रैकरों को मौत के मुंह में जाने से बचा चुके कुल्लू के छापे राम नेगी, इजरायल का बेन गुरियन पुरस्कार

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

कुल्लू से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट डेस्टिनेशन कुल्लू की पार्वती वैली जहां ट्रैक्करों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, वहीं दुनिया की उम्दा किस्म की चरस की चाहत भी तलबगारों को इस घाटी की ओर ले आती है। कई ट्रैक रूट्स वाली पार्वती घाटी प्रदेश की ऐसी घाटी है, जिसमें रहस्यमयी परिस्थितियों में सबसे अघिक विदेशी गुम हो चुके हैं, फिर भी इस घाटी की ट्रेकिंग के लिए देश- विदेश के ट्रकरों में जबरदस्त सम्मोहन है। दुनिया भर के ट्रैकर इस घाटी के रहने वाले 48 साल के छापे राम नेगी को माउंटेन मैन के नाम से जानते हैं। किसी भी देश का ट्रैकर घाटी में रास्ता भूल जाए, या किसी हादसे का शिकार हो जाए, सबसे पहले माउंटेन मैन को याद किया जाता है। इधर, आपदा की खबर मिलते ही माउंटेन मैन भी अपनी जान को जोखिम में डाल कर अपने मिशन के लिए निकल पड़ता है और मिशन पूरा कर ही लौटता है। बेशक प्रदेश सरकार ने उनके साहस और दिलेरी की परख नहीं की हो, लेकिन इजरायल ने उन्हें इजरायल रत्न कहे जाने वाले बेन गुरियन पुरस्कार से सम्मानित किया है।

May be an image of 2 people

अपनी रेस्क्यू टीम गठित की

छोटी सी उम्र से घाटी में ट्रैकरों के रेस्क्यू करते आ रहे छापे राम अब तक पांच सौ से ज्यादा विदेशी ट्रकरों को मौत के मुंह में जाने से बचा चुके हैं। तीन दशक के सफर में वह ट्रेकिंग के दौरान रास्ता भटक जाने वाले हजारों ट्रकरों के खोज व बचाव अभियानों में शामिल रहे हैं। छापे राम नेगी ने जरूरी उपकरणों से सुसज्जित अपनी पांच सदस्यीय रेस्क्यू टीम बनाई है। छापे राम कहते हैं कि वे एनडीआरएफ सहित कई एजेसियों के खोज व बचाव अभियानों में शामिल रहे हैं और कई घायल ट्रकरों को बचाया है।

13 साल की उम्र में पहला रेस्क्यू

पार्वती घाटी के शिवपुरी चौकी गांव से सम्बन्ध रखने वाले छापे राम नेगी जब आठवीं के स्टूडेंट थे, तभी से टुरिस्ट गाइड के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। दसवीं में पहुंचते परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए स्कूल छोड़ कर फुल टाइम टुरिस्ट गाइड का करने लगे। यहां पैदा होने के कारण घाटी के चप्पे- चप्पे को जानते हैं और हर ट्रैक रूट के बारे में गहरी समझ रखते हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में पहला रेस्क्यू ऑपरेशन किया था, तभी से यह सिलसिला जारी है और 48 साल की उम्र में भी वह घाटी में पूरी तरह मुस्तैद हैं।

उपकरण देकर प्रोत्साहित कर सकती है सरकार

छापे राम नेगी का नाम ट्रैकिंग की दुनिया में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। दुनिया भर के ट्रैकर उनकी दरियादिली के कायल हैं। टुरिस्ट गाइड के रूप में अपी आर्थिकी चलाने वाले छापे राम अपने खोज व बचाव अभियानों में किसी से कोई पैसा नहीं लेते। उन्होंने इन अभियानों के लिए जरूरी उपकरण भी खुद के पैसों से खरीदे हैं। आपदा प्रबंधन में निस्वार्थ सेवा कर रहे इस हिमाचली हीरे को रेस्क्यू में काम आने वाले जरूरी उपकरण देकर उसकी पीठ थपथपा सकती है। इतनी नैतिकता तो बनती है।


Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *