नागनी माता के मंदिर में पहुंचते ही बेअसर हो जाता है सर्पदंश का जहर

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कांगडा ।

मान्यता है कि इस मंदिर में पहुचते की सर्पदंश के जहर का असर ख़त्म हो जाता है । यहां फोड़ा,फिन्सी जैसे चरम रोगों से पीड़ित लोगों को भी राहत मिलती है। इस मंदिर के प्रति आस्था का आलम यह कि दर्शनों के लिए हजारों की संख्या में भक्त दूसरे राज्यों से भी हर साल आते हैं।कंडवाल स्थित माता नागनी श्रदालुओं की आस्था की प्रतिक है।इस महीने से दो महीनों तक चलने बाले मेलों की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।

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प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आये दुकानदारों ने अभी से ही इन मेलों की शोभा को बढ़ाने के लिए डेरा जमा लिया है।ठीक ऐसी ही तैयारियां भड़बार नागनी माता मंदिर और भरमाड स्थित बाबा सिबो थान मंदिर में भी चल रही हैं।इन धार्मिक स्थानों में दो महीनों तक शनिवार और रविबार को मेलों का आयोजन चलता है। भड़बार बाली नागनी माता मंदिर को लोग बड़ी नागनी के नाम से पुकारते हैं, और कंडबाल वाली को छोटी नागनी कहकर पूजा जाता है, भरमाड सिबोथान को लोग थाने दा बार कहकर पुकारा जाता है।इन मंदिरों में अक्सर श्रदालु दर्शनों के लिए उमड़ते है।


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