इस पेड़ की कलियों की बनाई जाती है सब्जी और फूलों से पकौड़े, आचार भी होता है टेस्टी

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फोकस हिमाचल फीचर डेस्क

‘भटबामणुआ ओ राखा खिल्लियां करालीं’ हिमाचल प्रदेश का यह मशहूर लोकगीत इस पेड़ के पहाड़ के लोकजीवन और लोकसंस्कृति के साथ गहरे सम्बन्ध को प्रदर्शित करता है । स्थानीय भाषा में ‘कराली ‘ का पेड़ कहे चने वाले इस पेड़ का नाम कचनार है, इस पेड़ की कलियों की सब्जी बनाई जाती है और फूलों के पकौड़े बनते हैं । इसकी कलियों का आचार भी होता है टेस्टी होता है।

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खूबसूरत फूलों वाला पेड़
इस पेड़ का अंग्रेजी नाम माउंटेन एबौनी (mountain ebony) है ।कचनार पूरे हिमालय क्षेत्र मे पाया जाता है । इसके फूल खूबसूरती से भरपूर होते हें ।कचनार की पेड़ ऊँचाई लगभग औसतन19 से 20 फीट तक होती है और ईसके पत्ते जोड़े में उगते हैं ।इसके फूल लाल और सफेद दो रंग के होते हैं । इसके पत्ते दुधारू पशुओं का उत्तम आहार है और लकड़ी जलाने अथवा सेटरिंग के काम आती है।

पड़े काम का है कचनार

अगर शरीर मे कहीं पर सूजन आये तो कचनार की जड़ को पीसकर लेप बना कर उसे गर्म कर सूजन पर लगाले से आराम मिलता है । इसकी कलियों को घी में भूनकर सुबह शाम खाने से भूख बढ़ती है । कचनार दांतोऔर मसूड़ों मे दर्द में भी गुणकारी है ।कचनार की छाल को जलाकर उसकी राख से रोजाना दो बार दांत मंजन करने से दांत दर्द में राहत मिलती है ।


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