शिव के गुणगान से चलती हैं उनकी अजीविका, मान्यता है कि भगवान ने अपनी जंघा पीटकर की थी जंगमों की उत्पति

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ज्वाली से कपिल मेहरा की रिपोर्ट ‘

महादेव भंडार भरेंगे, महादेव भंडार भरेंगे‘ कुछ ऐसे ही भजनों के साथ भगवान भोले नाथ का गुणगान करने वाले लोग अक्सर लोगों के घरों या दुकानों पर कभी-कभार देखने को मिल ही जाते हैं। इनकी पहचान सिर पर मोर पंख की बत्ती, मुंडेर, हाथ में घंटी व धोती- कुरते के लिबास से की जा सकती है। जंगम कहलाने वाले ये शिवभक्त उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों में देखे जा सकते हैं। हिमाचल कुछ इलाकों में जंगमों को लोग शंभू कहते हैं। जंगम समुदाय के ये खानदानी पेशेवर लोग घर-घर जाकर भगवान शिव का गुणगान करके अपनी अजीविका चलाते हैं।

 

उत्तर में जंगम, दक्षिण में लिंगम

ऐसी मान्यता है कि जंगम जोगियों की उत्पत्ति शिव-पार्वती के विवाह के दौरान हुई थी। जब महादेव ने भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा को विवाह कराने की दक्षिणा देनी चाही तो उन्होंने इसे स्वीकार करने से साफ इन्कार कर दिया। तब शिव ने अपनी जंघा को पीटकर जंगम साधुओं की उत्पति की और उन्हें अमरता का वरदान प्रदान किया। इसके साथ ही भोलेनाथ ने यह भी कहा कि जंगम केवल भिक्षा लेकर ही जीवन व्यतीत करेंगे। उन्होंने ही महादेव से दान लेकर उनके विवाह में गीत गाए और शेष रस्में भी मान्यताओं के अनुसार पूरी कराई। किवंदंती है कि भगवान शिव ने पावर्ती से विवाह के समय भिक्षा प्रदान करने के लिए दो संप्रदायों की उत्पत्ति की, पहला अपनी अपनी भृकुटि स्वेद से ‘जंगम’ दूसरा अपनी जांघ से ‘लिंगम’। इस प्रकार शैव संप्रदाय में जंगम की दो शाखाएं भी मानी जाती है। जंगम का उत्तर भारत तथा लिंगम का दक्षिण भारत में वास है।

 

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शिव के विवाह में निभाई गीत गाने की रस्में

जंगम जोगियों का स्वरूप बहुत ही अलग होता है, इसलिए ये लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव के विवाह में जंगमों ने ही गीत गाने के साथ अन्य रस्में भी निभाई थी, जिससे खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें मुकुट और नाग प्रदान कर दिया। माता पार्वती ने कर्णफूल दिए, नंदी ने घंटी दी, विष्णु ने मोर मुकुट दिया और ब्रहम जी ने यज्ञोपवीत दिया। इससे इनका स्वरूप बना। इसलिए इन्हें कलियुग का देवता भी कहा जाता है। तभी से ये शैव सम्प्रदाय के अखाड़ों और लोगों के घर-घर जाकर शिवजी का गुणगान करते आ रहे हैं। ये सफेद और केसरिया रंग के कपड़े पहनते हैं। जंगम अपनी अलग, अनूठी अभिनय संवाद शैली में अखाड़ों की गौरव गाथा के साथ ही शिव की कथा भी अलग तरीके से सुनाते हैं। इनका काम दशनाम संन्यास की परंपराओं का गुणगान करना है। ये पूर्वजों से लेकर अब तक की कहानी इस तरह गाते हैं कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध होकर बस सुनता ही रहे।

 

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जंगम परिवार ही बढ़ा सकते हैं परम्परा

बताया जाता है कि जंगम जोगियों के परिवार में बचपन से ही बच्चों को शिवपुराण, शिव स्त्रोत आदि याद कराए जाते हैं। जंगम जोगियों के परिवार के सदस्य ही इस परंपरा को आगे बढ़ा सकते हैं। कोई भी बाहरी व्यक्ति इस परंपरा में शामिल नहीं हो सकता। जंगम मुख्य रूप से शिव अर्थात शैव संप्रदाय के वो भिक्षु हैं जो शिव की स्तुतिगान और भिक्षा के अलावा किसी और चीज की इच्छा नहीं रखते। जंगम के गीत में मुख्यतः भगवान शिव और मां पावर्ती विवाह की स्तुति रहती है। शिव ने माता गौरी को जो अमर कथा सुनाई थी। उसका सार भी इसमें रहता है। जंगम को भगवान शिव का कुल पुरोहित भी कहा जाता है।

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परिवार के एक सदस्य को बनना पड़ता है जंगम

जंगम स्रोत का कोई लिखित इतिहास और ग्रंथ उपलब्ध नहीं है। यह परम्परागत और दंत कथाओं पर आधारित है। इसलिए कालांतर में जंगम प्रथा और इससे जुड़े समाज का सही आकलन नहीं हो पाया। जंगम परम्परा के अनुसार, परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को जंगम बनना ही पड़ता है। रोजगार के अन्य क्षेत्रों में समाहित होने के बावजूद वर्ष में एक बार परिवार के सदस्य को जंगम बनकर भिक्षा प्राप्त करना अनिवार्य है।

  • शिव स्तुति सुनाते हैं जंगम
    महादेव भंडार भरेंगे,
    महादेव भंडार भरेंगे,
    भोले महादेव भजन करेंगे
    भोले महादेव भजन करेंगे
    तेरी गौरजां पांच साल की
    तेरी गौरजां पांच साल की
    मैं योगी हजार साल का
    मैं बाबा हजार साल का.
 एक अन्य भजन के बोल इस प्रकार हैं-
  • हाथ जोड़ के बोली गौरजां
    हाथ जोड़ के बोली गौरजां
    तीनो लोक बसाये बसती में
    तीनो लोक बसाये बसती में
    आप बसें वीराने में जी
    आप बसें वीराने में जी
    अजी राम भजो जी राम भजो जी राम भजो जी
    राम भजो जी शिव का वंदन किया करो
    अजी शिव का वंदन किया करो
    बगड़ बम बबम बम बबम बम बम लहरी
    बगड़ बम बबम बम बबम बम बम लहरी
  •  चार दशक से शिव का गुणगान
  • जिला कांगड़ा के जवाली कस्बे में लोगों के घर शिव महिमा का गुणगान करने वाले जंगम हरि कुमार से रूबरू होने का मौका मिला। हरि कुमार का कहना है कि वह लगभग 40 वर्षों से इस पेशे को अपनाकर अपने परिवार का पेट पाल रहा है। इसके लिए उसने बकायदा अपना पहचान पत्र भी दिखाया।
  • हरि कुमार जंगम व उसके साथी का कहना है कि वे साल भर हिमाचल प्रदेश व अन्य जिलों के विभिन्न कस्बों में जाकर शिव विवाह व शिव लीला के गीत गाकर सुनाते हैं। इसके लिए वे कुछ भी नहीं लेते, लेकिन तीसरी व अंतिम फेरे में वे लोगों से उनकी श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा के रूप में नकद राशि या अन्य भेंट स्वीकार करते हैं। जंगम समुदाय के सभी लोगों को यह पेशा आसानी से नहीं मिलता है। केवल अपने जंगम गुरू के आदेश पर ही उन्हें इस पेशे को अपनाना पड़ता है और एक परिवार से केवल एक व्यक्ति ही जंगम का पेशा अपना सकता है। कुमार जंगम व उसके साथी का कहना है कि समाज के इस बदलते दौर में कुछ लोग उनका गुणगान नहीं सुनना चाहते। लेकिन, चाहे लोग उन्हें दक्षिणा दे या न दें, परंतु वे शिव का गुणगान करना अपना धर्म समझते हैं। कुछ बुजुर्ग लोग उन्हें अपने घर में बिठाकर शिव लीला का पूरा बखान उनसे गाने के रूप में सुनते हैं, जिस पर उन्हें बहुत आनंद आता है। उनका कहना है कि भगवान शिव ने उन्हें अपने शरीर से पैदा किया था और पांच देवताओं का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है। पांच देवताओं ने उन्हें जंगम के रूप के लिए पांच निशानियां प्रदान की हैं। कर्ण फूल माता पार्वती ने, नंदी ने घंटी, यज्ञोपवीत ब्रह्मा जी ने, मोर पंख भगवान विष्णु जी ने और नाग व सिर मुकुट भगवान शिव की देन है और इन्हीं पांच चीजों को धारण करने से संपूर्ण जंगम की पहचान होती है।
  •  कपिल मेहरा, गांव, डाकघर व तहसील ज्वाली, जिला-कांगड़ा, हि प्र, पिन.176023, मोबाइल : 9816412261

 


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