आपदा में बने आत्मनिर्भर : लकड़ी के कारीगर पिता के कारोबार को संभाल रहा एमए पास और पूर्व प्रधान बेटा रवि कुमार, स्कूल में टीचिंग से शुरूआत कर इस बार जीता उपप्रधान का चुनाव

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कॉलेज टाइम से की थी राजनीति शुरू, पिता बीमार पड़े तो संभाली जिम्मेदारी, गायकी का भी जुनून

नगरोटा बगवां से केपी पांजला की रिपोर्ट
आपदा में आत्मनिर्भर बनने की यह कहानी है सुलह विधानसभा क्षेत्र की गांव पंचायत चंबी के पूर्व प्रधान और मौजूदा उपप्रधान रवि कुमार पांजला की। एमए पास रवि कुमार कोरोना के दौर में जब रोजगार के सांधन कम हो गए तो उन्होंने अपने पिता लकड़ी के कारीगर मिस्त्री बरडू राम से प्लंबर का काम सीख लिया। आज पंचायत में उपप्रधान बनने और स्कूल में टीचिंग करने के बावजूद वे लकड़ी के काम में भी अपनी कला को दिखा रहे हैं। उनका बनाया फर्नीचर काफी पसंद किया जा रहा है। खास बात यह है कि वह इस कला का नॉलेज अन्य युवाओं को भी दे रहे हैं। इसके साथ पंचायत में सामाजिक कार्यों को भी बेखूबी से निभा रहे हैं।

पहले प्रधान अब बने उपप्रधान
मिलनसार व युवा रवि कुमार बताते हैं कि वे कॉलेज टाइम से ही राजनीति में थे। जब पढ़ाई पूरी हुई और नौकरी नहीं तो खुद आत्मनिर्भर बनने की सोची। गांव में काफी समस्याएं थीं। इस कारण पहले चुनाव लड़ने की सोची। शिक्षित व युवा होने के चलते लोगों को काफी समर्थन मिला और 2015-2016 में पहली बार पंचायत की कमान संभाली। 5 साल जनसेवा के कई काम किए और 2020 में प्रधान की लेडिज सीट होने के कारण उपप्रधान का चुनाव लड़ा। इस बार भी लोगों ने शिक्षित और युवा चेहरे पर विश्वास जिताया और उन्हें कामयाबी दिलाई।

गायकी के शौकीन, बनाई जागरण पार्टी
पूर्व प्रधान रवि कुमार गायकी के भी शौकीन हैं। इसके चलते उन्होंने गांव के युवाओं को साथ लेकर जागरण की पार्टी बनाई है। इसके जरिए भी वह अन्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।

इस बार नहीं किया ज्यादा प्रचार, फिर भी मिली कामयाबी
इस बार के पंचायत चुनाव में रवि कुमार अपने लकड़ी के काम पर ज्यादा फोकस करते नजर आए और ज्यादा चुनाव प्रचार नहीं किया। कुछ लोगों में चर्चा का विषय भी था कि वह इस बार हार जाएंगे लेकिन अंत में जीत उनकी हुई। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि उन्हें इस बार टीचिंग का ज्यादा फायदा मिला। व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया का उन्होंने बेखूबी से बढिया इस्तेमाल किया।

गांव के रास्तों को सुधारना मेरा मकसद
कच्चे रास्ते व निर्माणाधीन कार्यों को लेकर जब उनसे पूछा गया कि इस बार उनका मेन मकसद गांव के रास्तों को सुधारना है। साथ ही स्कूल को बारहवीं तक करवाना, पानी की समस्या का हल निकलवाना, वाह-चंबी भंगेड़ रोड को काहनफट्ट तक मिलाना मुख्य प्राथमिकता रहेगी। साथ ही लोगों की सेवाओं के लिए वे 24 घंटे तैयार हैं।


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