चंबा में खाया जाता है बिच्छू बूटी (एहण) का साग, कई रोगों की अचूक दवा है करामती बूटी

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फोकस हिमाचल डेस्क
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जनपदों में करसोड़, कुगस व एहण के नाम से जानी जाने वाली बिच्छू बूटी का साग चंबा जनपद में सर्दियों के दिनों में खूब खाया जाता है। बिच्छू बूटी को अंग्रेजी में नेटल कहा जाता है और इसका बॉटनिकल नाम अर्टिका डाइओका है। बिच्छू बूटी हिमाचल व उत्तराखंड सहित मध्य हिमालय क्षेत्र में होती है। इस बूटी में पतले कांटे होते हैं। यह किसी को छू जाये तो इसमें बिच्छू के काटने जैसी पीड़ा होती है और शरीर में सूजन आ जाती है।
बड़ी गुणकारी है बिच्छू बूटी
जड़ी बूटी का ज्ञान रखने वाले गुणी लोग इस बूटी का उपयोग बुखार, शरीर में कमजोरी , पित्त दोष, गठिया, मोच, जकड़न और मलेरिया जैसे रोगों के उपचार के लिए करते हैं। इसके बीजों को पेट साफ करने वाली दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। वैज्ञानिक इससे बुखार भगाने की दवा तैयार करने में जुटे हैं।
बिच्छू बूटी से बन रही चाय
बिच्छू बूटी में विटामिन ए, बी और डी , आइरन , कैल्सियम और मैगनीज़ की प्रचुर मात्रा होती है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेड, एनर्जी, कोलेस्ट्रोल जीरो, सोडियम भी पाया जाता हैं। उत्तराखंड में स्थापित एक कंपनी बिच्छू बूटी से चाय तैयार कर सारे देश में बेच रही है।इसकी चाय को लेकर बाजार में खासी मांग है।

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