शिमला की रिशा ‘दिल की आवाज मोटिवेशनल’ के जरिये कर रही लोगों के जीवन में उम्मीद का संचार

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पेशे से शिक्षिका शिमला की मोटिवेशनल स्पीकर एंड कंटेंट राइटर रिशा भारद्वाज अपने यु ट्यूब चैनल ‘दिल की आवाज मोटिवेशनल’ के जरिये कर रही उम्मीद का संचार

शिमला से फोकस हिमाचल ब्यूरो की रिपोर्ट
किसी भी कारणवश अवसाद का शिकार हो कर कोई अपने अनमोल जीवन को मौत के मुंह में न धकेल दे, इसी विचार ने उसे ऐसे लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित किया.पेशे से शिक्षिका शिमला की मोटिवेशनल स्पीकर एंड कंटेंट राइटर रिशा भारद्वाज अपने यु ट्यूब चैनल ‘दिल की आवाज मोटिवेशनल’ के जरिये लोगों के जीवन में उम्मीद का संचार कर रही हैं. वे फेसबुक, इन्सटाग्राम और ट्वीटर पर भी लोगों को मोटिवेट कर रही हैं. बी टेक आईटी करने के बाद  रिशा ने दिल्ली में आईटी कोर्डिनेटर के तौर पर काम किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर मोटिवेशनल स्पीकर एंड कंटेंट राइटर के रूप में अपनी ख़ास पहचान बनाई है. रिशा का कहना है कि लोग डिप्रेशन का शिकार न हों और अपनी प्रतिभा को निखार कर अपनी पहचान बनायें, इसी के दृष्टिगत वह लोगों को बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.
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ससुराल से मिला साथ, दिखाई प्रतिभा
रिशा का कहना है कि उसकी ससुराल ऊना में है. मोटिवेशनल स्पीकर और कंटेंट राइटर के तौर पर काम करने के लिए उन्हें उनके पति मंदीप भोगल, सास सोमा देवी, ससुर स्वर्गीय केवल कुमार ने प्रेरित किया और पिता विजय कुमार भारद्वाज और माता कृष्णा भारद्वाज ने प्रोत्साहित किया. उनकी पांच साल की एक बेटी काश्वी भोगल हैं.  रिशा ने अपने परिवार , प्रोफेशन और पैसन के बीच जबरदस्त तालमेल बिठा कर अपनी पहचान बनाई हैं.
कंचन रत्न सम्मान से सम्मानित
वंदे मातरम् फाउंडेशन पटना ने इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रिशा को कंचन रत्न सम्मान प्रदान किया है. यह सम्मान उन्हें मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर उनके बेहतरीन काम के लिए मिला हैं. मोटिवेशनल स्पीकर के लिए पटना में आयोजित सम्मान समारोह में यह सम्मान हासिल करने वाली वह पहली महिला हैं.


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