20 हजार से कारोबार की शुरुआत कर 32 करोड़ के सालाना टर्न-ओवर वाली कंपनी के मालिक बने शिमला के रघु खन्ना, जाने कैसे शुरू किया बिजनेस

Spread the love

शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट

कैश योर ड्राइव कंपनी की क्लाइंट लिस्ट में गूगल, पेप्सी, मोटोरोला, फ्लिपकार्ट, सब-वे, पिज़्ज़ा हट जैसे बड़े ब्रैंड शामिल हैं l कंपनी का बिज़नेस 6500 एयर पोर्ट कैब्स, 200000 ऑटो और 4500 प्राइवेट गाड़ियों में होता है और कंपनी का टर्नओवर 32 करोड़ रूपये के पार है। कैश योर ड्राइव कंपनी के सीएओ शिमला के रघु खन्ना हैं, जिन्होंने साल 2009 में अपने पिता से बीस हजार रूपए उधार लेकर इस कंपनी की शुरूआत की थी. आज रघु खन्ना विज्ञापन उद्योग के गेम चेंजर बन गए हैं। उनका कांसेप्ट जो ऑटो और कार से शुरू हुआ था, अब ट्रक, ट्रेन, कार, बस और एयरप्लेन तक पहुँच चुका है।
सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला का होनहार
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर रहे भूपेन्द्र कुमार खन्ना के इकलौते बेटे रघु की स्कूली शिक्षा सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला से हुई. मिडल स्तर तक वह एक औसत स्टूडेंट था। हायर सेकेंडरी दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज चंडीगढ़ से साइंस स्ट्रीम में करने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा पास कर आईआईटी गुहावटी में सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच में प्रवेश मिला, लेकिन रघु ने इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनिकेशन में अपना ब्रांच शिफ्ट करवा लिया। पढ़ाई ख़त्म होने के बाद रघु को बहुत सी आईटी कंपनियों से जॉब ऑफर मिले, वहीं लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से उसे मास्टर डिग्री के लिए अवसर मिला।
May be an image of one or more people, people standing and text that says "AIRPORT CABS ADVERTISING LOS ANGELES 71 HARD ROCK RLINE ADS"
ट्रैफिक में फंसने पर आया स्टार्टअप का आइडिया
रघु लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से मास्टर डिग्री लेने की तैयारी कर चुका था। वीजा उसके हाथ में था और टिकट्स बुक हो चुकी थी और वह एयरपोर्ट के लिए रवाना हो चुके थे, परंतु ट्रैफिक जाम में फंसने की वजह से उनकी फ्लाईट छूट गई और अब उनके पास गाड़ियों के पीछे लिखी लाइन्स को पढ़ने के अलावा कोई काम नहीं था। यही वह पल था जब उनके मन में एक विचार आया कि गाड़ियों के पीछे का हिस्सा एडवर्टिज़मेंट के लिए सही जगह है। आज तक इसके बारे में सोचा नहीं गया है। रघु ऐसा मॉडल तैयार करना चाहते थे जिसमे बड़ी-बड़ी कंपनियां अपनी ब्रांड वैल्यू के प्रचार के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल करे और इसके लिए वे कीमत अदा करें। रघु के पास अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी। उन्होंने साल 2009 में अपने पिता से बीस हजार रुपये उधार लेकर अपना स्टार्टअप शुरू किया।
एड ओन व्हील्स कांसेप्ट, पहले सप्ताह आठ विज्ञापन
शुरू में लोगों ने रघु के आइडिया के प्रस्ताव को हँसी में उड़ा दिया, क्योंकि उनको लगता था कि एडवर्टिज़मेंट केवल प्रिंट रूप में, रेडियो और टेलीविज़न से ही संभव है। रघु ने एक वेबसाइट बनाई जिससे कुछ 1500 कार मालिकों का ध्यान आकर्षित किया और पहले सप्ताह ही 8 एडवरटाइजर मिले। इससे रघु का विश्वास बढ़ा। उनकी कंपनी पहली कंपनी थी जो एड ओन व्हील्स के कांसेप्ट पर काम कर रही थी। उन्होंने बेंगलुरू स्थित डिजिटल प्रिंट्स नेटवर्क नामक कंपनी के साथ मिलकर काम किया। यह कंपनी विनाइल प्रिंटिंग के काम में एक्सपर्ट थी जिससे गाड़ियों के पेंट को कोई नुकसान नहीं होता था। कैंपेन की लंबाई, एडवर्टिज़मेंट की साइज और किस शहर में लगाना है इन सबसे उनकी कमाई दस हजार से लेकर साठ हजार के बीच निश्चित हो पाती थी।
रिलाइंस म्यूचल फंड बना पहला क्लाइंट

साल 2010 में रघु खन्ना ने पूर्वी दिल्ली के प्रीत बिहार से काम करना शुरू किया। रिलाइंस म्यूचल फंड उनका पहला क्लाइंट बना, जो अब तक उनका क्लाइंट है। साल 2014 रघु के लिए लक्की वर्ष रहा। प्रीत बिहार के ऑफिस से वे नॉएडा में बड़े ऑफिस में शिफ्ट हो गए और उनकी शादी पल्लवी से हुई। उनका 6 साल का एक बेटा है। अब कैश योर ड्राइव कंपनी अपनी चार ब्रांच दिल्ली, मुंबई, बंगलुरु और चंडीगढ़ और तीन सैटालाइट ऑफिस हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता से अपने बिजनस को ओपरेट कर रही है। अब कंपनी का सालाना टर्न ओवर 32 करोड़ पार कर गया है।


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *