धरोहर – अंग्रेजों की स्थापित की 154 साल पुरानी पालमपुर की ‘वाह टी एस्टेट’ को 68 साल से संभाल रहा देहरादून का ‘चायवाला परिवार’

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पालमपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट

154 साल पुरानी टी एस्टेट, जिसे अंग्रेजों ने 1857 में स्थापित किया और जो साल 1905 के बाद जो पाकिस्तान के वाह इलाके के नवाब के बेटे सर सिकंदर हयात खान के कब्जे में चली गई। साल 1953 में इस टी एस्टेट को देहरादून के मशहूर ‘चायवाला परिवार’ ने खरीद लिया और वर्तमान में उस परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी इस टी एस्टेट का प्रबंधन कर रही है। हम आपको लेकर चल रहे हैं कांगड़ा जिला के पालमपुर उपमंडल के देयोग्रां स्थित ‘वाह टी एस्टेट’ में, जिसका नामकरण पाकिस्तान के एक इलाके वाह के नाम पर हुआ है। बता दें कि कांगड़ा जिला में चाय उत्पादन की की पहल अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हुई थी और चीन से लाए गए चाय के पौधे रोप गए थे और साल 1852 में पहली टी एस्टेट स्थापित की गई थी। साल 1857 में स्थापित वाह टी इस्टेट कांगड़ा की उन गिनी चुनी बड़ी टी एस्टेट में शामिल हैं, जो तमाम चुनौतियों के बावजूद कांगड़ा के चाय उद्योग को नई दिशा दे रही हैं।
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देहरादून के चायवाला परिवार की विरासत

देहरादून के चायवाला परिवार का 1940 के दशक से चाय उद्योग में एक समृद्ध इतिहास रहा है। इस परिवार का कोलकाता और असम में चाय उत्पादन का बड़ा कारोबार रहा है। जैसे-जैसे परिवार बढ़ता गया युवा पीढ़ियों में बागान बंट गए, बावजूद इसके ‘चायवाला’ नाम उन्हें एक साथ बांधता है। वाह टी एस्टेट की देखभाल अब ‘चायवाला’ परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी, दीपक प्रकाश और उनके बेटे सूर्य प्रकाश के जिम्मे है। सूर्य प्रकाश ने फोकस हिमाचल को बताया कि वाह टी एस्टेट में उनके दादा ने चाय उत्पादन का काम संभाला, लेकिन दादा की मृत्यु के बाद दादी दया रानी ने अकेले सालों इस टी एस्टेट का प्रबंधन संभाला और चाय के कारोबार को आगे बढ़ाया। अपने समय कांगड़ा के चाय उद्योग में दया रानी एक बड़ा नाम रहा है।
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डेढ़ लाख किलो चाय उत्पादन, डेढ़ सौ को रोजगार

सूर्य प्रकाश बताते हैं कि वाह टी एस्टेट में 104 हैक्टेयर में प्लान्टेशन है, जिसमें 95% चाय के पौधे मौलिक चाइनीज हाईब्रीड हैं और चाय बागान में कीटनाशक और खरपतवार नाशक का प्रयोग वर्जित है। वाह टी एस्टेट 150 लोगों को रोह्गार उपलब्ध करवा रही है, जिनमें 70% महिलाएं शामिल हैं। वाह टी एस्टेट में पैदा होने वाली पत्ती से एस्टेट में स्थित टी फैक्टरी में बेहतरीन गुणवत्ता वाली सिंगल एस्टेट हैंड-प्लक्ड ग्रीन टी और ब्लैक टी के कई फ्लेवर तैयार किया जाते हैं। वाह टी एस्टेट सालाना डेढ़ लाख किलो चाय का उत्पादन कर इसका बड़ा हिस्सा कोलकाता के चाय बाज़ार में बेचती है। इसके साथ ही वाह चाय के विभिन्न फ्लेवर्स अमेज़न पर भी उपलब्ध हैं। एस्टेट गिफ्ट पैक और कॉर्पोरेट पैक की सुविधा भी प्रदान करती है।
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बगीचे में मेजबानी करता वाह लॉज

वाह टी एस्टेट में आप मिट्टी, लकड़ी से बने स्लेट की छत वाले घर में रहने का आथित्य प्राप्त कर सकते हैं। वाह लॉज पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से निर्मित और ‘गद्दी’ जनजाति के घरों से प्रेरित हैं। दीवारों पर, बाहर या अंदर पर किसी भी तरह के पेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। डिसमेंटल किये गए पालमपुर के पुराने कोर्टहाउस से निकली देवदार की लकड़ी के दरवाजे और खिड़कियों इस कॉटेज की शोभा बढाते हैं। वाह लॉज अपने मेहमानों के लिए चूल्हे पर मिट्टी के बर्तनों में तैयार जैविक और स्थानीय भोजन परोसता है। इसके किचन गार्डन में उगी सब्जियां और जड़ी-बूटियां खाने में प्रयोग की जाती हैं। घर का बना जैम, अचार, चटनी और जूस सर्व किया जाता है। मेहमानों को कांगड़ी धाम भी परोसी जाती है।
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टी टूरिज्म और टी टेस्टिंग

वाह टी एस्टेट मंगलवार से रविवार तक टी टूरिज्म और टी टेस्टिंग का आयोजन करता है। यदि आप यह जानना चाहते हैं कि चाय झाड़ी से आपके चाय के प्याले तक कैसे पहुँचती है, तो वाह टी एस्टेट में आप अपने हाथ से तोड़कर देखें या चाय की तरह स्वाद लेना सीखें। यहां फैक्टरी में चाय बनाते देखने के साथ पारंपरिक कड़ाही में ग्रीन टी बनाने की विधि भी सीख सकते है। खूबसूरत पक्षियों तथा कई तरह की जड़ी-बूटियों, पेड़ों और पौधों से मिलने और उन्हें पहचानने का अवसर मिलता है। टी एस्टेट टूर की अवधि सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक 45 मिनट से 1 घंटा तक की होती है और प्रति व्यक्ति 150 फीस ली जाती है। सूर्य प्रकाश का कहना है कि वाह टी एस्टेट में टी म्यूजियम स्थापित करने की योजना पर काम जारी है। वाह टी एस्टेट की वेबसाइट www.wahtea.com पर जा कर चाय खरीद, टी टूर और वाह लॉज में ठहरने सम्बन्धी इन्क्वायरी कर सकते हो
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For Tea Purchases Only
Surya J. Prakash
M: +91 9831017629
E: surya@wahtea.com
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TEA TOURS

M: +91 76509 48301

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THE LODGE AT WAH

reservations@wahtea.com

Mobile: +91 9831443282

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