छज बनाने की कला में आजीविका और रोजगार, पर नई पीढ़ी नहीं काम सीखने को तैयार, नगरोटा बगवां के छ्जों की चंबा तक डिमांड

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नगरोटा बगवां से विनोद भावुक की रिपोर्ट

छज, जिसे हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में सूप भी कहा जाता है, आनाज को साफ़ करने के काम आता है. जाहिर है आनाज हर घर में आता है, इसलिए छज की पहुंच हर घर तक है. छज बनाने में ख़ास किस्म की तीली, बांस और कैन का प्रयोग होता है और इसे हाथ से बनाया जाता है. ख़ास किस्म की तीली या तो जम्मू –कश्मीर अथवा पंजाब के होशियारपुर से आती है. छज बनाने का हुनर एक जाति विशेष के हस्तशिल्पियों को आता है. छज की प्रदेश भर में भारी मांग रहती है, बावजूद इसके नई पीढ़ी इस हुनर को सीखने को तैयार नहीं है. यही वजह है कि छज बनाने की कला लोप होने लगी है. इस स्थिति के बीच नगरोटा बगवां उपमंडल के रामेहड़ गांव के 45 वर्षीय राम लाल छज बनाकर न केवल अपनी आजीविका कमा रहे हैं, बल्कि बुनने की इस कला के संरक्षण में भी जुटे हैं.
चंबा तक राम लाल के छ्जों की मांग
जमा दो तक पढ़े राम लाल ने छज बनाने की कला अपने पिता स्वर्गीय रत्न चंद से सीखी है. उनके बनाए छज की डिमांड न केवल पालमपुर, धर्मशाला, नगरोटा बगवां और कांगड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, बल्कि भवारना और धीरा में दुकानों को भी छ्जों की आपूर्ति करते हैं. उनके बनाने छ्जों की पड़ोसी जिला चम्बा में भी खासी मांग रहती है. गेहूं और धान की फसल आने पर मांग कई गुना बढ़ जाती है. और कोई कारीगर न होने के कारण मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाती है.
यह है राम लाल का मार्केटिंग मॉडल
राम लाल और उनकी पत्नी अंजू देवी एक दिन में औसतन चार छज तैयार करते हैं. एक छज की कीमत औसतन 170 होती है और इसके बनाने पर 70 रुपए खर्च बैठता है. डिजायनदार छज दो सौ रूपए तक बिक जाता है. राम लाल न केवल दुकानों को छज सप्लाई करते हैं, बल्कि अपनी स्कूटी पर ग्रामीण क्षेत्रों में डायरेक्ट मार्केटिंग करते हैं. किसानों को आनाज के बदले भी छज बेचे जाते हैं. एक छज की कीमत तीन किलो चावल अथवा चार किलो गेहूं ली जाती है.
खुद के स्टार्टअप का गुमान
राम लाल का बेटा शुभम आर्यन स्कूल टंग से जमा दो करने के बाद सोलन से स्टेनोग्राफी का डिप्लोमा कर रहा है. उसे सरकार की तरफ से स्कोलरशिप मिली है. उनकी बेटी छटी कक्षा में पढ़ रही है. राम लाल का कहना है कि छज बनाने की कला न केवल जीवन यापन का आधार बन गई और इस वजह से बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के काबिल बना. राम लाल को इस बात का सकून है कि चाहे छोटा ही सही उनका अपना स्टार्टअप है और अपने कारोबार का खुद बॉस है.
मास्टर क्राफ्टमैन बन दे सकते हैं ट्रेनिंग

राम लाल का कहना है कि प्रदेश में छज बनाने वाले कारीगरों को उँगलियों पर गिना जा सकता है. आलम यही रहा तो जल्द ही पहाड़ से छज बनाने का हुनर गायब हो जाएगा. इस कला में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए वे चाहते हैं नई पीढ़ी को यह काम सीखना चाहिए. अगर सरकार चाहे तो वह मास्टर क्राफ्टमैन बन कर युवाओं को इस कला का प्रशिक्षण दे सकते हैं.


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