किसको याद है हुताशन शास्त्री का ‘शक्ति दर्शन, लोकप्रियता इतनी थी कि कम पड़ जाती थी प्रतियां,  साप्ताहिक में छपती थी मंडी की दुर्लभ सामग्री

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मंडी से समीर कश्यप की रिपोर्ट
पुरानी मंडी के रहने वाले हुताशन शास्त्री संस्कृत के विद्वान और अध्यापक थे। सेवानिवृति के बाद उन्होने अपना अखबार शक्ति दर्शन का प्रकाशन करना शुरू किया। जल्द ही अखबार इतना लोकप्रिय हो गया कि इसकी प्रतियां कम हो जाती थी। शास्त्री का कहना था कि मंडी के समाचारों से लोगों को जोडा जाना चाहिए।

शक्ति भाष्यम’ का स्थायी संतभ

अपनी अखबार में हुताशन शास्त्री ‘शक्ति भाष्यम’ का एक स्थायी संतभ छापते थे। जिसमें वह संस्कृत के श्रलोकों को अनुवाद प्रकाशित करके संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार को आम जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास करते थे। 94 साल की उम्र में हुताशन शास्त्री का देहांत हो गया।

छपती थी दुर्लभ सामग्री

सेवानिवृत कॉलेज प्रिंसिपल कहते हैं कि मंडी में एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक पत्र निकलता था शक्ति समाचार। संपादक हुताशन शास्त्री। यह समाचार पत्र मंडी के लोगों को मंडी से जोड़े रखता था। यहां की मूलभूत समस्याओं को उजागर करता। मंडी से जुड़ी कुछ ऐसी दुर्लभ सामग्री भी इसमें छपती जो चकित कर देती। कालखण्डों को जोड़ती। सबसे महत्वपूर्ण बात रहती इसमें शक्ति दर्शन को लेकर। यही इस पत्रिका का नाम भी था।
शक्ति उपासना के लिए प्रेरित करते शक्ति सूत्र
शक्ति दर्शन में वर्णित शक्ति सूत्र इसलिए महत्वपूर्ण नहीं कि वे शक्ति उपासना के लिए प्रेरित करते हैं अपितु इसलिए कि इनमें भी समय के अनुशीलन की दृष्टि का सांगोपांग समावेश प्रचुर मात्रा में विधमान है। इस हुतात्मा के कार्य को प्रकाश लाया जाना चाहिए और हो सके तो शक्ति दर्शन के सूत्रों को पुस्तक रूप में प्रकाशित करवाकर जनता को उपलब्ध करवाए।

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