मंडी की डॉ. तारा सेन के शोध का आधार, वेस्टर्न हिमालय के कई जंगली पौधे हैं पौष्टिक आहार, एक शिशाविद से विज्ञानिक बनने के सफर की प्रेरककथा

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मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट

कहा जाता है कि हर व्यक्ति में जन्मजात प्रतिभा होती है, लेकिन उसका पता लगा कर उसे निखारने की जिम्मेवारी गुरु की होती है। इस प्रेरककथा की नायिका को जब एक गुरु ने प्रोत्साहित और प्रेरिक किया तो उसके हुनर की चमक देश- दुनिया तक फ़ैल गई। सरदार वल्लभ भाई कलस्टर यूनिवर्सिटी मंडी में वनस्पति शास्त्र की सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. तारा सेन ठाकुर को वर्तमान में वेस्टर्न हिमालय में पाए जाने वाले खाने योग्य जंगली पौधों की ऑथोरिटी माना जाता है। डॉ. तारा सेन ठाकुर को शिक्षाविद से खाने योग्य जंगली पौधों के विशेषज्ञ विज्ञानिक के तौर पर स्थापित करने का श्रेय www.fruitipedia.com के फाउंडर और वेस्टर्न हिमालय में पाए जाने वाले जंगली फलों की ऑथोरिटी कहे जाने वाले मंडी शहर के 82 वर्षीय वरिष्ठ फल विज्ञानी डॉ. चिरंजीत परमार को जाता है। उन्हीं के प्रोत्साहन से डॉ. तारा सेन ने स्थानीय स्तर पर खाए जाने वाले जंगली पौधों पर लेखन की छोटी सी शुरुआत कर स्थानीय लोगों से जुड़ने के लिए पहल की, जो बड़े अनुसंधान की नींव बन गई। उन्होंने आईआईटी मंडी की ओर से प्रकाशनाधीन पुस्तक “SOME WILD EDIBLE PLANTS OF THE WESTERN HIMALAYAS” का लेखन कार्य डॉ. चिरंजीत परमार के साथ संयुक्त तौर पर किया है। डॉ. चिरंजीत परमार की सलाह और निरंतर प्रोत्साहन से डॉ. तारा सेन ठाकुर अपनी वेबसाइट himalayanwildfoodplants.com का सफल संचालन कर रही हैं, जो हिमालय में पाए जाने वाले खाने योग्य जंगली पौधों की जानकारी का अथाह सागर है। डॉ. तारा सेन ठाकुर कहती हैं कि पीएचडी की पढ़ाई के दौरान विज्ञानिक प्रभारी डॉ. एस.एस.सामंत ने भी गाइड के तौर पर तारा सेन ठाकुर को निखारने में अहम भूमिका अदा की हैं।
शिक्षा के लिए ग्वालियर- नैनीताल तक सफर
19 जनवरी, 1982 को मंडी में पैदा हुई तारा सेन ने साल 1999 में मंडी से जमा दो की स्कूली पढाई करने के बाद साल 2002 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से बीएससी, साल 2004 में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से वनस्पति विज्ञान में एमएससी और साल 2008 में सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय से पर्यावरण विज्ञान में एमएससी की। साल 2014 में उत्तराखंड के कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से वनस्पति विज्ञान विभाग से पीएचडी की है। उन्होंने विश्वविद्यालय चयन आयोग से मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा पास की है।
बड़े सफर की छोटी शुरुआत
तारा सेन ने साल 2006 से 2009 तक मिड हिमालयन वाटरशेड प्रोजेक्ट में एक सूत्रधार के रूप में काम किया है। जून 2010 से सितम्बर 2020 तक पीजी कॉलेज मंडी में वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के तौर पर सेवाएं प्रदान की हैं। डॉ. तारा सेन ठाकुर हिमाचल प्रदेश के पर्यावरण और विज्ञान विभाग द्वारा वित्त पोषित अनुसंधान परियोजना ‘’Traditional Processing of Wild Edible Plants of Six Tehsils viz Kotli, Mandi Sadar, Sunder Nagar, Padhar, Joginder Nagar, Thunag & Chachoit of Mandi District of Himachal Pradesh, , Their Medicinal Nutritional & Economic Potential Plus Value Addition by Analysing Scope for Latest Processing Techniques.” की प्रधान अनुसंधानकर्ता रही हैं। वर्तमान में वह सरदार वल्लभभाई पटेल कलस्टर विश्वविद्यालय मंडी के वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।
पुस्तकों में संरक्षित किये खाए जाने वाले जंगली पौधे
डॉ. तारा सेन ठाकुर Truemen’s Publication की और से मुद्रित एवं प्रकाशित यूजी स्तर की पाठ्य पुस्तक ” ”Biodiversity” और
” Plant Anotomy & Embryology’’ की सह-लेखक हैं। वे “Some Wild Edible Plants of Western Himalayas Volume -II” की लेखक हैं।
उन्होंने ” An Illustrated Guide To Some Wild Growing Food Plants Of The Sub Himalayan region.” पुस्तक भी लिखी है। डॉक. तारा सेन ठाकुर IIT Mandi की और से प्रकाशनाधीन पुस्तक ‘Some Wild Edible Plants of Western Himalayas’ की सह-लेखक हैं।
गहन अध्ययन, शोध और अनुसंधान
डॉ. तारा सेन ठाकुर एक दर्जन से ज्यादा शोध पत्र शोध पत्र विभिन्न राष्ट्रीय- अंतर्राष्टीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। वे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों, सेमिनारों, कार्यशालाओं, ओरिएंटेशन प्रोग्रामों, रिफ्रेशर कोर्सों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग ले चुकी हैं और उनमें अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं। वेस्टर्न हिमालय में पाए जाने वाले जंगली पौधों को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने में उन्होंने शानदार कार्य किया है।
काम को मिला सम्मान
कोरोनाकाल में जिला मंडी के पीपुल्स जैव विविधता रजिस्टर की तैयारी में सक्रिय भागीदारी के लिए 19 सितम्बर 2020 को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने डॉ. तारा सेन ठाकुर को सम्मानित किया। डॉ. तारा सेन ठाकुर International Journal on Environment, Development and Sustainability के संपादकीय बोर्ड की सदस्य और Him Science Congress Association की सदस्य हैं। डॉ. तारा सेन ठाकुर से उनके ई-मेल: stara1982@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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