लिंगड में कई बीमारियों से लड़ने की भी है क्षमता, ओषधीय गुणों से भरपूर है लिंगड

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चम्बा से उत्तम सूर्यवंशी क़ी रिपोर्ट

पहाड़ों में लाखों ऐसी जड़ी बूटियां पाई जाती हैं।जिसमें बहुत से औषधीय गुण पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होती हैं। इसी में से एक है जो पहाड़ों में नदी नालों में पाई जाती है। जिसे किसरोड़ , लुंगड़ू लिंगड़ी, लिंगड और अंग्रेजी में फिडलहेड फर्न नाम से जाना जाता है । अब तक हिमालय की पर्वत शृंखला व देश भर में लुंगडू की 1200 प्रजातियों का पता लगाया गया है। लुंगड़ू का प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता था। जिसे बहुत पौष्टिक सब्जी माना जाता है, लेकिन इसके अलावा रिसर्च में पाया गया कि यह औषधीय गुणों से भी भरपूर है। लुंगड़ू की हरी कोमल डंठल में विटामिन ए, विटामिन बी कांप्लेक्स, पोटाशियम, कॉपर, आयरन, फैटी एसिड, सोडियम, फास्फोरस, मैगनीशियम, कैरोटिन और मिनरल्ज भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। इन दिनों बाजार में लुंगड़ू आसानी से मिल जाता है। इसकी सब्जी और साग बनाकर भी खाया जाता है। इसकी सब्जी आम सामान्य सब्जी बनाने की विधि से ही बनाई जाती है। इसको जंगल से ला करके इसे साफ करने के बाद पानी में धो करके बारीक-बारीक काट करके सामान्य विधि द्वारा इसका मसाला तैयार करके धीमी आंच पर हिलाते हुए पकाया जाता है। इसके अलावा पहाड़ी व्यजनों में इसका मधरा और अचार भी बनाया जाता है।
मधरा एक पहाड़ी व्यंजन का नाम है जिसे दही और घी को मिला कर बहुत देर तक आग पर पकाया जाता है और जब दही पूरी तरह घी में पक जाता है फिर उसमें मिक्स मसालों को पीस कर डाला जाता है उसके बाद बारीक टुकड़ों में कटे हुए पहले से उबाले हुए लुंगड को डाल करके कुछ देर तक दहीं घी के मिश्रण में हिलाते रहने के बाद उसे रोटी या चावल के साथ परोसा जा सकता है। इतना ही नहीं लिंगड के पकोड़े भी बहुत स्वादिष्ट बनते हैं ।
वैज्ञानिक शोध में पता चला है कि लुंगड़ू का प्रयोग बहुत सी बीमारियों के लिए भी लाभकारी है। मधुमेह और चर्म रोग सहित अनेक बीमारियों को भी दूर करता है। हिमालयन जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आइएचबीटी) पालमपुर में लुंगड़ू पर हुए प्रारंभिक शोधों में यह बात सामने आई है। इसकी चर्चा संस्थान में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में की गई। इसमें यह भी पता चला है कि इससे अन्य बीमारियों में भी लाभ होता है। लुंगड़ू में मधुमेह सहित अन्य कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति है।
लुंगड़ू औषधीय गुणों से बहुत भरपूर है सही तरीके से इसका प्रयोग किया जाए तो यह हमारे शरीर को कई रोगों से मुक्त करने में कारगर है।
अकसर बुजर्गों से भी इसके बारे बहुत कुछ सुना है जैसे डायबिटीज में भी इसका प्रयोग लाभकारी है। प्राचीन काल में लोग लुंगड़ू की हरी कोमल गोलाकार डंठल का सेवन करते थे और डायबिटीज जैसी घातक बीमारी से दूर रहते थे। लुंगडू में मधुमेह, चर्म रोग सहित अन्य बीमारियों को भी दूर करने की क्षमता है। लिवर और आंतों की समस्या में कारगर- लिवर में होने वाली गड़बड़ को ठीक करने और आंतों में सूजन या आंतों से संबंधित बीमारियों को तुरंत ठीक करने में लुंगड़ू की हरी कोमल डंठल को हल्की आंच में उबाल कर खाने से तुरंत आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त फोड़े-फुंसियों में भी फायदेमंद है लुंगड़ू इसकी जड़ को बारीक कूट या पीस कर फोड़े- फुंसी वाली जगह के चारों ओर लगाने से तुरंत आराम मिलता है और फोड़े और फुंसियां ठीक हो जाती है। यह जख्मों को शीघ्र भरने में सक्षम है।
इसका उपयोग कैंसर जैसे घातक रोग में भी किया जाता है लुंगड़ू की कोमल हरी डंठल में एंटीआक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। इसकी सब्जी बनाकर या उबाल कर खाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी में भी फायदा होता है
गठिया में लाभदयक-लुंगड़ू की जड़ को पीसकर जोड़ों के दर्द वाले स्थान पर लगाने से दर्द से राहत मिलती है। इस सब्जी का सेवन करने से हड्डियां और मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।
पहाड़ों में तो इसे लोग सर्दियों के लिए सुखा कर रख देते हैं और जब बर्फ पड़ती है तो इसे उबाल कर सब्जी और आचार के रूप में इसका प्रयोग करते हैं। इसका अचार बाजारों में आसानी से उपलब्ध है । लिंगड मार्च के महीने से कुदरती तौर पर नदी नालों और पहाड़ों के आसपास उगना शुरू हो जाती है, और जुलाई अगस्त तक चलती रहती है । इसके बाद धीरे-धीरे इसके पते बनने शुरू हो जाते हैं और यह सुखना शुरू हो जाती है ।


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