साल 1972 स्पीति में देश का पहला स्टील पुल बनाकर चमक बिखेरने वाली भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर शंकुतला ए भगत, यूके, यूएसए, जर्मनी सहित दुनिया भर में 200 पुलों को डिजाइन करने का रिकॉर्ड

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शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
क्वाड्रिकॉन स्टील पुल हिमालयी क्षेत्र में बनाए जाते हैं, जहां पुल बनाने की अन्य तकनीकों को लागू करना असंभव है। ऐसे पुल बनाने के लिए ‘टोटल सिस्टम’ प्रोसेस अपने दौर का बड़ा आविष्कार था। इस आविष्कार की जननी कंपनी ने साल 1972 में हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में पहला पुल बनाया। इस तकनीक से चार महीनों अन्दर कंपनी के इंजीनियर्स दो छोटे पुलों का निर्माण करने में सक्षम रहे। जल्द ही देश के राज्यों में भी इस नई तकनीक से पुलों का निर्माण करने की पहल हुई। साल 1978 तक उक्त कंपनी कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक 69 पुलों का निर्माण करने में कामयाब रही। टोटल सिस्टम प्रोसेस का अभिष्कारक भारत की पहली महिला सिविल इंजीनियर, शंकुतला ए भगत थी। पुलों के कई नए डिजाइन बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने मुंबई में पुल निर्माण फर्म ‘क्वाड्रिकॉन’ की भी स्थापना की और इस फर्म ने यूके, यूएसए और जर्मनी सहित दुनिया भर में 200 पुलों को डिजाइन किया।
सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली महिला
शकुंतला ए भगत ने साल 1953 में मुंबई में वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली महिला थीं। साल 1960 में, शकुंतला पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय से ‘सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग’ में अपनी मास्टर डिग्री लेकर मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में सहायक प्रोफेसर और ‘हैवी स्ट्रक्चर लैबोरेट्री’ की प्रमुख रहीं। शकुंतला ने पुल निर्माण के अनुसंधान और विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
‘यूनीशर कमनेक्टर’ के लिए ‘इंवेंशन प्रोमोशन बोर्ड’ का सर्वोच्च पुरस्कार
शकुंतला का विवाह अनिरुद्ध एस भगत के साथ हुआ था। अनिरुद्ध एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। साल 1968 में इस दम्पति ने ‘यूनीशर कमनेक्टर’ विकसित किया। यह स्टील संरचनाओं को जोड़ने के लिए एक आदर्श उपकरण है। इस दंपति ने पहली बार ‘टोटल सिस्टम’ प्रोसेस विकसित की। साल 1970 में, शकुंतला और उनके पति ने अपनी फर्म ‘क्वाड्रिकॉन’ की स्थापना की। यह एक पुल निर्माण फर्म है और इस फर्म की विशेषता इनके पेटेंटे कराए हुए, पहले से बनाए गए आधुनिक डिज़ाइन हैं। ‘यूनीशर कमनेक्टर’ विकसित करने के लिए इस दम्पति को साल 1972 में ‘इंवेंशन प्रोमोशन बोर्ड’ द्वारा सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1993 में शकुंतला को ‘वुमन ऑफ द ईयर’ के खिताब मिला। साल 2012 में 79 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

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