नाज है : युवाओं का यह ग्रुप समझता है पीड़ितों की मजबूरी, उपलब्ध करवाता है मदद जरूरी

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नगरोटा बगवां से विनोद भावुक की रिपोर्ट

शाहपुर के डोल्यार गांव के नागिन चन्द जी नाइ का काम करते थे जो लॉकडाउन के बाद बिलकुल ही बंद हो गया. घर की आर्थिक स्थिति बिलकुल अच्छी नहीं है. एक कमरे ( बोड और ऊआन ) के मकान की हालत बहुत अच्छी नहीं है. घर में कमाने वाला एकमात्र सदस्य घर पर बैठा हुआ है. नगीन जी की पत्नी भी मनरेगा में मेहनत मजदूरी कर लेती है. अक्टूबर में उनकी लड़की की शादी है. यूं तो लड़के वलों की कोई डिमांड नहीं है लेकिन फिर भी हिमाचल में लड़की को बिलकुल खाली हाथ तो भेजते नहीं है , कपड़े ,धाम और थोड़ी बहुत जरूरी चीजे तो देनी ही होती है।

नगरोटा बगवां निवासी टीम के सदस्य एवं युवा कंप्यूटर इँजीनियर सतीश मलांच ने बताया कि अनुदान टीम को इस केस के वारे में पता चला तो अनुदान टीम के सदस्य इस परिवार से मिलने गए और सामर्थ्य के अनुसार 10,000 की छोटी सी सहायता की. यह सहायता कोई बहुत बड़ी रकम तो नहीं है, मगर उम्मीद है कि इस से नगीन चंद जी के परिवार को कुछ तो राहत मिलेगी

अनुदान टीम कोई विशेष NGO नहीं है यह सिर्फ स्वयंसेवी युवाओ का एक ग्रुप है जो इस प्रकार के केस में अपनी महीने भर की तनख्वाह /कमाई का कुछ अंश अनुदान ग्रुप में डालते है, ताकि गरीब ,बीमार और अति जरूरतमंद लोगो को कुछ अंशदान कर सके. अनुदान में जुटाई गयी सहायता राशि के साथ साथ दान की गयी। सारी राशि का सारा ब्यौरा एक्सेल शीट में रखते है, जिसे ग्रुप के सभी लोग देख सकते है आप भी इस ग्रुप में व्हाट्सप्प के माध्यम से इस लिंक पर क्लीक कर के जुड़ सकते है ,


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