भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास करने के बाद ठुकरा दी सेंटर की जॉब, अरण्यपाल एवं निदेशक लैंड यूज बोर्ड के पद से त्यागपत्र देकर साक्षरता अभियान का नेतृत्व करने वाले डॉ. कुलदीप सिंह तंवर की प्रेरककथा

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

बैजनाथ से प्रीतम सिंह की रिपोर्ट
यह प्रेरककथा है किसान परिवार के एक ऐसे प्रतिभावान एवं होनहार युवक की जिसमें उच्च शिक्षा हासिल कर हिमाचल प्रदेश वन सेवा परीक्षा
पास कर अपने हुनर का लोहा मनवाया। बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास करने के बाद केंद्र की जॉब इसलिए ठुकरा दी कि उन्हें अपने प्रदेश के लोगों की सेवा के लिए समर्पित होना था। बाद में 11 साल का कार्यकाल शेष रहते अरण्यपाल एवं निदेशक लैंड यूज बोर्ड के पद से त्यागपत्र देकर खुद को पूरी तरह से आम आदमी की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति गठित कर हिमाचल प्रदेश में साक्षरता अभियान का नेतृत्व करने वाले डॉ. कुलदीप सिंह तंवर भारत सरकार में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सलाहकार भी रहे। जिन्होंने भी डॉ. कुलदीप सिंह तंवर के काम करने के तरीके को नज़दीक से देखा है, उन्हें शायद इस परिचय की भी ज़रूरत महसूस न हो। उच्च शिक्षा, ईमानदारी, साफ छवि, त्याग और जुझारूपन एकसाथ एक इन्सान के अंदर मिलना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। डॉ. कुलदीप सिंह तंवर वह शख्सियत है, जिनमें संयोग से ये सारे गुण एकसाथ मिलते हैं।

यह भी पढे- रंगमंच की बाल कलाकर, अभी तक थियेटर से प्यार, बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी हैं शिमला की भारती कुठियाला

किसान का उच्च साक्षर बेटा बन गया दबंग अफसर
कुलदीप सिंह तंवर का जन्म 7 जुलाई, 1956 को मत्याणा के सांगटी गांव के एक किसान परिवार में हुआ। किसानी के साथ पढ़ाई करते हुए उच्च शिक्षा हासिल की। संजौली कॉलेज से बीएससी.(मेडिकल) करने के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमएससी (केमिस्ट्री), एमबीए, फ्रैंच भाषा और योग में स्नातक डिप्लोमा और एमबीए. विभाग के साथ वन प्रबंधन में पीएचडी की डिग्री हासिल की। साल 1979 में डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने हिमाचल प्रदेश वन सेवा’ की परीक्षा पास करके बतौर सहायक आरण्यपाल के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। इस बीच 1983- 84 में भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की मगर प्रदेश की जनता की सेवा के जज़्बे के कारण केन्द्र की नौकरी नहीं की और अपने ही प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बनाया। साल 1986 में उनकी भारतीय वन सेवा में पदोन्नति हुई। वन विभाग में डॉ. कुलदीप सिंह तंवर की पहचान एक बेदाग छवि वाले अफसर के तौर पर रही। नौकरी में रहते हुए भ्रष्टाचार से कभी समझौता नहीं किया और भ्रष्टाचार, भ्रष्ट राजनीतिज्ञों और भ्रष्ट तन्त्र के खिलाफ बिना डरे और बिना झुके जंग लड़ी।
नौकरी छोड़कर साक्षरता अभियान का किया नेतृत्व
11 साल का सेवाकाल शेष था। डॉ. तंवर विभाग के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकते थे और मात्र 5 महीने बाद मार्च 2006 में छठा वेतन आयोग आ रहा था, जिसमें तनख्वाह में बेतहाशा बढ़ोतरी होने वाली थी। चुनाव लड़ना भी लक्ष्य नहीं था, क्योंकि कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र आरक्षित था, इसके बावजूद डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने 26 अक्तूबर 2005 को अरण्यपाल एवं निदेशक लैंड यूज बोर्ड के पद से त्यागपत्र देकर समाजसेवा को अपने जीवन का मकसद बनाया। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति गठित कर हिमाचल प्रदेश में साक्षरता अभियान का नेतृत्व किया और प्रदेश के हजारों लोगों को अभियान से जोड़ कर पूरे प्रदेश में साक्षरता की अलख जगाई। डॉ. कुलदीप सिंह तंवर भारत सरकार में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सलाहकार भी रहे।
जुझारू इन्सान और अच्छे संगठनकर्ता
डॉ. कुलदीप सिंह तंवर अपनी ईमानदारी और त्याग के साथ एक जुझारू इन्सान और अच्छे संगठनकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं। छात्र राजनीति में रहे इसलिए छात्रों की समस्याओं को समझते हैं। उन्होंने वन विभाग में गार्ड से लेकर डीएफओ तक कर्मचारियों और अधिकारियों का एक ही संगठन बनाया और देश स्तर पर वन विभाग के विभिन्न संगठनों की कान्फैडरेशन बनाई। राष्ट्रीय फारेस्ट्री कमीशन की मांग भी उठाई। वर्ष 2006 में प्रदेश में संयुक्त मेडिकल की परीक्षा पेपर खरीद घोटाले का पर्दाफाश किया। उन्होंने सब्ज़ी मंडी ढली सहित पूरे प्रदेश की मंडियों में इलैक्ट्रानिक कांटे लगवाने में सफलता हासिल की। उनके संघर्ष ने बन्दरों को वर्मिन घोषित करवाया, जिसके चलते किसानों के दबाव में सरकार ने फसल सुरक्षा के लिए सोलर फैंसिंग में 80 प्रतिशत अनुदान देने का फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कोटी कालेज खुलवाने के लिए संघर्ष किया और सफलता पाई। उन्होंने बेटी बचाओ अभियान का मार्गदर्शन किया और गुड़िया न्याय मंच में सक्रियता से जुड़े रहे। वह खेती बचाओ अभियान के तहत किसानों के विभिन्न मुद्दे प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *