भारत की वो राजकुमारी जो पहनती थी हीरे और रत्न जड़े सैंडल, 20वीं सदी में की थी लव मैरिज

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भारत में ब्रिटिश काल से पहले से ही राजवाड़े और रियासत हुआ करते थे। भारत में उस दौर में कई ऐसे राजा, राजकुमार, महारानी और राजकुमारियां हुई हैं जिनकी कहानियों को लोग आज भी काल्पनिक और परी कथाओं जैसा समझते हैं, लेकिन अधिकतर कहानियां सच थीं। आईए जानते हैं इन कहानियों को।  ऐसी ही एक कहानी बड़ोदरा के ‘गायकवाड़ राजघराने’ की राजकुमारी इंदिरा राजे की भी है। इंदिरा देवी भारत के सबसे अमीर रजवाड़े ‘बड़ोदरा राजघराने’ की राजकुमारी थीं. राजकुमारी ब्रिटेन में ही पली बढ़ीं और उनका अधिकतर समय यूरोप में ही बीता.

राजकुमारी इंदिरा फ़ैशन की बेहद शौक़ीन थीं। उस जमाने में उन्होंने इटली की बेहद महंगी कंपनी ‘सल्वातोरे फ़ेरागमो’ को अपने लिए 100 जोड़ी जूतियां बनाने का ऑर्डर दिया था। ये कंपनी 20वीं सदी की सबसे फ़ेमस डिज़ाइनर कंपनी थी. आज भी इस कंपनी के दुनियाभर में हज़ारों लग्ज़री शोरूम हैं।  इस इटैलियन कंपनी के मालिक सल्वातोरे ने अपनी आत्मकथा में भी लिखा था कि, बड़ोदरा राजकुमारी इंदिरा ने उनकी कंपनी को जूते बनाने का बड़ा ऑर्डर दिया. राजकुमारी ने कहा था कि उनके लिए एक ऐसा सैंडल बनाया जाए जिसमें हीरे और मोती जड़े हों. इस दौरान उन्होंने ऑर्डर के साथ बेशक़ीमती हीरे जवाहरात और मोती भी भेजे थे.

राजकुमारी ने सगाई क्यों तोड़ दी थी? 

दरअसल, बड़ोदरा की राजकुमारी इंदिरा की शादी उनके पिताजी ने ग्वालियर के मशहूर ‘सिंधिया राजघराने’ में तय कर दिया था. राजकुमारी इंदिरा गायकवाड की सगाई ग्वालियर के होने वाले राजा यानी युवराज माधो राव सिंधिया से हुआ था. ग्वालियर का सिंधिया खानदान भी उस समय बेहद ताकतवर राज्य हुआ करता था.  बावजूद इसके राजकुमारी इंदिरा ने सगाई तोड़ दी थी । बात सन 1911 की है. राजकुमारी इंदिरा अपने छोटे भाई के साथ दिल्ली दरबार यानी वायसराय का दरबार गई थीं. इस दौरान उनकी मुलाक़ात ‘कूच बिहार’ के तत्कालीन महाराजा के छोटे भाई जितेंद्र से हुई. वो राजकुमार जितेंद्र से इतनी प्रभावित हुईं कि इंदिरा को उनसे प्यार हो गया और उन दोनों ने विवाह करने का फ़ैसला कर लिया.

राजकुमारी इंदिरा ने सोचा यदि उनके पिताजी ने सगाई के लिए इंकार किया तो बड़ोदरा रियासत और ग्वालियर रियासत के बीच में राजनीतिक संबंध बिगड़ सकते हैं. इसलिए उस ज़माने में हिम्मत दिखाते हुए खुद राजकुमारी इंदिरा ने पत्र लिखकर अपने मंगेतर माधो राव सिंधिया से कहा कि वो उनसे शादी नहीं करना चाहती हैं.

20वीं सदी में की थी लव मैरिज 

राजकुमारी इंदिरा के माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो राजकुमार जितेंद्र से प्रेम विवाह करें क्योंकि जितेंद्र की प्ले बॉय इमेज थी. उन्होंने जितेंद्र को चेतावनी भी दी कि वो उनकी बेटी से दूर रहें, लेकिन जितेंद्र और इंदिरा आपस में शादी करने का मन बना चुके थे. आख़िरकार राजकुमारी इंदिरा ने अपनी सगाई तोड़ कर लंदन के होटल में राजकुमार जितेंद्र से प्रेम विवाह कर लिया. इनकी शादी में इंदिरा के परिवार से कोई भी शामिल नहीं हुआ था । राजकुमार जितेंद्र की शादी के कुछ दिन बाद ही उनके बड़े भाई यानी कूच बिहार के महाराजा राजेंद्र नारायण का निधन हो गया. इसके बाद जितेंद्र ‘कूच बिहार’ के महाराज बने. बाद में अधिक शराब पीने से महाराज जितेंद्र का भी निधन हो गया. इसके बाद लंबे समय तक ‘कूच बिहार’ राज्य का राजकाज महारानी इंदिरा देवी ने ही संभाला और अकेले ही साथ अपने 5 बच्चों का लालन-पालन किया.  राजकुमारी इंदिरा और राजकुमार जितेंद्र का वैवाहिक जीवन बेहद ख़ुशनुमा रहा. इस दौरान उनके 5 बच्चे भी हुए. इनमें से बेटी गायत्री देवी भी थीं. गायत्री देवी की शादी जयपुर के महाराजा से हुई जो जयपुर की महारानी गायत्री देवी के नाम से मशहूर हुई. जिन्हें दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत महिलाओं में गिना जाता था.


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