कभी बोल नहीं पाती थी ठीक से, आज पहली बार देश का सर्वोच्च कला सम्मान हिमाचली बेटी के नाम

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देश का सर्वोच्च कला सम्मान, पहली बार हिमाचली बेटी के नाम
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
पांच साल की उम्र में जब नन्हीं सी दक्षा ने स्कूल के मंच से तुतलाते हुए बोलना शुरू किया था तो किसी को इस बात की खबर नहीं थी कि एक दिन यही लडक़ी कला के क्षत्र में देश के सर्वोच्च पुरस्कार को अपने नाम कर लेगी। कला की दुनिया में अपने योगदान से शिखर को छूने वाली दक्षा ने सालों की कड़ी मेहनत और जुननू से यह मुकाम हासिल किया है। वह हिमाचल प्रदेश की पहली लडक़ी है, जिसका चयन संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिलाह खां युवा पुरस्कार’के लिए हुआ है। जिदी धुन की पक्की एक लडक़ी के छोटे से मंडी शहर से दिल्ली महानगर में पहुंच कर रंगमंच की दुनिया में अपना लोहा मनवाने की प्रेरककथा बेहद रोचक भी है।
युवा निर्देशक के खिताब पर कब्जा
देश के सांस्कृति मंत्रालय के तहत संचालित संगीत नाटक अकादमी दिल्ली ने मंडी से संबंध रखने वाली रंगकर्मी दक्षा शर्मा का चयन वर्ष 2017 के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिलाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया है। उन्हेें यह पुरस्कार अभिनय के क्षेत्र में उन की उपलब्ध्यिों के लिए दिया जाएगा। यह पुरस्कार देश के उत्कृष्ट युवा कलाकारों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए राष्ट्रीय संगीत अकादमी की ओर से प्रदान किया जाता है। भारत के उत्कृष्ट युवा कलाकारों के लिए यह देश का सर्वोच्च सम्मान है। अभिनय के लिए हिमाचल प्रदेश की किसी लडक़ी का यह पहला सर्वोच्च सम्मान है। रंगमंच में उनके योगदान के लिए दक्षा शर्मा को दिल्ली सरकार की साहित्य कला परिषद की ओर से 2017 का युवा निर्देशक का पुरस्कार प्रदान किया गया है।
पहली जमात, मंच से मुलाकात
मंडी शहर के मध्यवर्गीय परिवार में 11 जून 1979 को पैदा हुई दक्षा को बचपन से ही कला की दुनिया में कुछ हट कर करने की ऐसी जिद थी कि पहली कलास में प्रवेश के साथर ही मंच से नाता जुड़ गया और फिर दक्षा रंगमंच की दीवानी होती चली गई। कॉलेज तक पहुुंचते पहुुंचते दक्षा रंगमंच का बड़ा चेहरा बन चुकी थीं। कॉलेज के युवा समारोहों में नृत्य और नाटकों में उसके नाम की धूम मच चुकी थी। कॉलेज पूरा कर दक्षा में रंगमंच में खुद को दक्ष करने के लिए रंगमंच की पढ़ाई का फैसला किया।
बढ़ता गया दिल्ली में दबदबा
हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान सतोहल, मंडी से एक साल का डिप्लोमा करने के बाद दक्षा का चयन राष्ट्रीय नाट्य संस्थान(एनएसडी) दिल्ली के लिए हो गया। यहां पढाई के दौरान ही दक्षा ने युवा कलाकार के तौर पर स्कॉलरशिप हासिल की। यहां पर उसे मोहन महर्षि, भानू भारवी, रंजीत कपूर, नादिरा बब्बर, सुरेश शर्मा, बंशी कौल, अनुराधा कपूर, कीर्ति जैन जैसे रंगमंच और अभिनय के माहिरों के साथ रंगमंच का अवसर मिला। अनुभवी लोगों के साथ काम करने से दक्षा को रंगमंच की बारीकियों को समझने का अवसर मिला और उसकी काम में जबरदस्त निखार आता गया और दिल्ली में दबदबा बढ़ता गया।
नामी लोगों के साथ किया काम
दक्षा ऑस्कर विजेता कॉस्टयुम डिजायनर भानु मुथैया के साथ ड्रैस डिजयनिंग कर चुकी है, वहीं गंभीर हिंदी सिनेमा के शीर्ष निर्माता- निर्देशक श्याम बेनेगल की बेटी पिया बेनेगल के साथ संविधान जैसे संवेदनशील विषय पर फिल्म निर्माण में शामिल रही हैं। ‘क्योंकि जीना इसी’ का नाम सीरियल से चर्चा में आई दक्षा ने सौ से भी ज्यादा नाटकों में काम कर चुकी हैं और इतने ही नाटकों में ड्रैस डिजायनिंग में अहम भूमिका अदा की है। वह आल इंडिया रेडियो की एक क्लास कलाकार और थियेटर की विजिंटिंग फैक्लिटी हैं। कई सीरियों के अलावा कई फिल्मों में उन्होंने दमदार अभिनय किया है।
देश में सम्मान, प्रदेश है अनजान
बतौर कलाकार दक्षा को कई देशों में अपने हुनर के प्रदर्शन के अवसर मिले हैं। अभिनेत्री, निर्देशक, कॉस्टयूम डिजायनर व रेडियो कलाकार के तौर पर स्थापित दक्षा ने चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में अपने जानदार अभिनय के दम पर अपनी खास पहचान बनाई है। वह महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक आजादी के लिए काम करने वाली ‘उत्सव’ केे नाम से एक गैर सरकारी संस्था का संचालन भी करती हैं। कला की दुनिया में देश में शीर्ष मुकाम हासिल करने वाली दक्षा को हिमाचल प्रदेश के मुख्यधारा के मीडिया में कम ही स्थान मिल पाया है। न ही प्रदेश की किसी सरकारी गैर सरकारी संस्था ने पहाड़ की इस बेटी के अभूतपूर्व काम के लिए उसे सम्मानित करना जरूरी समझा है।
मेरे लिए यह गर्व की बात है कि संगीत नाटक अकादमी दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘उस्ताद बिस्मिलाह खां युवा पुरस्कार’ हासिल करने वाली मैं हिमाचल प्रदेश की पहली लडक़ी  हूं। मैं अपनी कामयाबी की यह खबर अपनों के साथ शेयर करना चाहती हूं।
                                                                                                        दक्षा शर्मा

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