हिमाचल : पिता से काम करना हुआ मुश्किल तो 18 साल की बेटी बनी सहारा, बेच रही दूध

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फोकस हिमाचल । बिलासपुर   

बेटियां भी अब बेटों से कम नहीं हैं। चाहे कोई भी क्षेत्र चुन लो। बेटियां हर बार अपने संघर्ष की कहानी लिखकर नया इतिहास रच रही हैं। ऐसी ही एक बेटी है शैलजा जिसकी उम्र अभी 18 है लेकिन उसने अपने मजबूर पिता को सहारा देने के लिए दूध बेचने जैसे मुश्किल काम को चुन लिया। सुबह 4 बजे उठकर 60 लीटर दूध बेचने वाली इस लड़की की कहानी बहुत प्रेरणादायक है।

 

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जानकारी के अनुसार शैलजा शर्मा जिला चंबा की मूल निवासी है और बिलासपुर में कई सालों से किराए के मकान में परिवार के साथ रहती है। परिवार खुश था, सपने बड़े थे। अपने सपनों को पूरा करने बिलासपुर आई शैलजा के पिता शहर में दूध बेचने का कार्य करते थे। अपनी गाड़ी में सब्जी बेचकर परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। लेकिन एक साल पहले शैलजा के पिता बीमार हो गए और काम करने के काबिल नहीं रहे। इससे पहले कि परिवार दो वक्त की रोटी के लिए तरसता, शैलजा ने अपने घर की जिम्म्मेदारी उठा ली। पिता जो काम करते थे, अब परिवार चलाने के लिए वह सभी काम शैलजा करती है।

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एक साल से संभाल रही परिवार को

एक साल से परिवार को संभाल रही है। मौसम साफ हो या भारी बरसात फिर भी सुबह 4 बजे उठकर 120 रुपये कमाने के लिए खुद गाड़ी चलाकर 50 किलोमीटर का सफर तय करके रोजाना 60 लीटर दूध बेचने का काम करती है। शैलजा को दूध बेचने के लिए प्रति लीटर पर 2 रुपये मिलते हैं। इसके बाद सब्जी मंडी से सब्जी लाकर अपने पिता के साथ सब्जी बेचने में उनका हाथ बंटाती है।  शैलजा इसी साल स्कूल की पढ़ाई पूरी करेगी। उसका एक छोटा भाई 7 साल का है। माता-पिता व छोटे भाई की देखभाल करके शैलजा इस छोटी सी उम्र में बेटे होने का फर्ज निभा रही है। शैलजा ने कहा कि वह आत्मनिर्भर बनना चाहती है।

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