गोबर धन – ऑनलाइन बिक रहे हैं गोबर के उपले, करोड़ों का कारोबार, मांगलिक कार्यों के तेज़ी से बढ़ रही डिमांड

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फोकस हिमाचल डेस्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में गोबर धन योजना की शुरूआत की है। बेशक अधिकतर लोग गोबर को कूड़े के तौर पर देखते हों लेकिन गोबर का ऑनलाइन कारोबार देश की सरहदें पार कर करोड़ों डॉलर्स तक पहुँच चुका है। ईबे, शॉपक्लूज, वेदिक गिफ्ट शॉप, अमेजन आदि कई साइट्स गोबर से बने उपले बेच कर करोड़ों का कारोबार के रही हैं। यहां ऑर्डर करने पर कुछ ही दिनों में डिलीवरी हो जाती है । ग्राहकों की सहूलियत के लिए साइट्स पर इन उपलों के आकार और वजन का भी ब्यौरा भी उपलब्ध है़। एक दर्जन उपलों का मूल्य एक सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक है। ‘गौक्रांति डॉट ओआरजी’ पर गाय का गाेबर और उससे बने उपले, साबुन, भगवान की मूर्तियां, ऑर्गैनिक पेंट, हवन के लिए धूप के अलावा परिष्कृत गौमूत्र भी उपलब्ध है। ‘होली काउ फाउंडेशन’ भी अपने गोउत्पाद ऑनलाइन और ऑफलाइन मुहैया कराता है़। मांगलिक कार्यों में काम आने के चलते ऑनलाइन बाजार में उपलों की खासी मांग है।

पशुओं का मॉल है गोबर
गोबर शब्द का प्रयोग गाय, बैल, भैंस या भैंसा के मल के लिये प्राय: होता है। घास, भूसा, खली आदि जो कुछ खाया जाता है उसके पाचन में जो पदार्थ अपचित रह जाते हैं वे शरीर के अन्य अपद्रव्यों के साथ गोबर के रूप में बाहर निकल जाते हैं। युवा पशु लगभग 70 प्रतिशत खाद्य शरीर में पचाता है, परंतु दूध देनेवाली गाय केवल 25 प्रतिशत ही पचा पाती है। शेष गोबर एव मूत्र में निकल जाता है।
बड़े काम का गोबर
पशुओं के गोबर में नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ एंव वसा की मात्रा तथा सैलूलोज जैसी वस्तुएँ रहती हैं,कुछ द्रव भी गोबर में रहता है। कहा जाता है कि यह द्रव कीटाणुनाशक होता है। गाय के गोबर में 86 प्रतिशत तक द्रव पाया जाता है। गोबर में खनिजों की भी मात्रा कम नहीं होती। इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन, चूना, पोटाश, मैंगनीज़, लोहा, सिलिकन, ऐल्यूमिनियम, गंधक आदि कुछ अधिक मात्रा में विद्यमान रहते हैं तथा आयोडीन, कोबल्ट, मोलिबडिनम आदि भी थोड़ी थोड़ी मात्रा में रहते हैं।
स्वादिस्ट होता है उपलों की आग पर बना भोजन
नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटासियम गोबर में क्रमश: 0.3- 0.4, 0.1- 0.15 तथा 0.15- 0.2 प्रतिशत तक विद्यमान रहती हैं। गोबर का समुचित लाभ खाद के रूप में ही प्रयोग करके पाया जा सकता है। भारत में जलाने की लकड़ियों का अभाव होने से इसका अधिक उपयोग ईंधन के रूप में भी होता है। ईंधन के लिये इसके उपले, गोहरे या कंडे बनाकर सुखा लिए जाते हैं। सूखे गोहरे अच्छे जलते हैं और उनपर बना भोजन, मधुर आँच पर पकने के कारण, स्वादिष्ट होता है।
गोबर से कुकिंग गैस
गोबर से गैस बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित की गई विधि में एक साधारण यंत्र का उपयोग होता है, जिसमें गोबर का पाचन हवा की अनुपस्थिति में होता। इस विधि से एक प्रकार की गैस निकलती है, जो प्रकाश करने, यंत्र चलाने तथा भोजन पकाने के लिये ईंधन के रूप में काम आती है। गोबर सड़कर गंधहीन खाद के रूप में प्राप्त हो जाता है और इसके नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि ऐसे उपयोगी तत्व बिना नष्ट हुए इसी में सुरक्षित रह जाते हैं। साथ साथ इससे उपयोगी गैस भी मिल जाती है।
आयुर्वेद में बड़े का काम का
आयुर्वेद में चिकित्सा के लिए गोमूत्र पीने की भी सलाह दी जाती है। श्वास रोग, आंत्रशोथ, पीलिया, मुख रोग, नेत्र रोग, अतिसार, मूत्राघात और कृमिरोग का उपचार गोमूत्र से होता हे। इसके आलावा आधुनिक चिकित्सा विज्ञानी गोमूत्र को हृदय रोग, कैंसर, टीबी, पीलिया, हिस्टिरिया जैसे खतरनाक रोगों में प्रभावकारी मानते हैं।

हवन कुण्ड का लेपन

भगवान की पूजा दोरान गौ माता के गोबर का इस्तेमाल करते हे। गाय के गोबर में भयानक रोग को ठीक करने की क्षमता होती हे।गाय के गोबर से बने उपले से हवन कुण्ड की अग्नि जलाई जाती है। गांवों में महिलाएं आज भी सुबह उठकर गाय गोबर से घर के मुख्य द्वार को लिपती हैं।   गोबर को जलाने से उसमे जो धुआ निकलता हे उससे सकारात्मक ऊर्जा फेलती है। सिर्फ इतना ही नहीं यह हमारे आसपास के वातावरण का भी शुध्ध और पवित्र रखता हे।


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