हिमाचल के ऊना में किसान चौधरी का बेटा बना अरबपति, 10वीं में थे प्रदेश में दूसरे स्थान पर, अब अमेरिका जाकर भी मक्की की रोटी को कर रहे मिस

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फोटो कैप्शन – माता पिता के साथ अमेरिका में जय चौधरी

फोकस हिमाचल । ऊना

संघर्ष के बाद अरबपति बने यह कहानी  हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की है। प्रदेश के लिए काबिलेताराफ है कि ऊना में किसान के बेटे जय चौधरी ने कड़ी मेहनत के दम पर भारत के टॉप टेन अरबपतियों में जगह बनाई है। सरकारी स्कूल से पढ़कर उच्च शिक्षा हासिल करने अमेरिका गए जय चौधरी आज दुनिया के अरबपतियों की सूची में 577वें स्थान पर हैं। ऊना के पनोह गांव से संबंध रखने वाले जय चौधरी अमेरिका में जी स्केलर कंपनी के सीईओ हैं। जय चौधरी का असली नाम जगतार सिंह चौधरी है। जय चौधरी के पिता भगत सिंह पनोह गांव के प्रधान रह चुके हैं। हल चलाकर अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करने वाले भगत सिंह अपनी धर्मपत्नी के साथ इन दिनों अमेरिका में ही रहते हैं। सरकारी स्कूल से पढ़कर अमेरिका में हुनर के दम पर मुकाम हासिल करने वाले जय चौधरी की उपलब्धि पर जिले में खुशी की लहर है।

भाई के मार्गदर्शन के बाद अमेरिका पहुंचे

बड़े भाई दलजीत सिंह के मार्गदर्शन पर ही जय चौधरी शिक्षा ग्रहण कर अमेरिका तक पहुंचे और अमेरिका में एमटेक की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब कर खर्चा पूरा किया।  सेवानिवृत्त प्रिंसीपल दलजीत सिंह ने बताया कि जय चौधरी के संघर्ष की बदौलत ही उन्हें यह मुकाम मिल पाया है। उन्होंने बताया कि जय चौधरी की प्रारंभिक शिक्षा पनोह से ही हुई है। इसके बाद कई किलोमीटर रोजाना पैदल सफर तय कर धुसाड़ा में आगामी शिक्षा ली। आठवीं कक्षा में प्रदेशभर में तीसरे स्थान पर रहे।

दसवीं में प्रदेशभर में रहे थे दूसरे स्थान पर 

बता दें कि जय चौधरी दसवीं में प्रदेशभर में दूसरे स्थान पर रहे थे। ऊना कॉलेज से शिक्षा ग्रहण कर यहां भी टॉप किया। इसी की बदौलत वाराणसी आईआईटी में उन्हें बीटेक की सीट मिली। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद 80 के दशक में एमटेक के लिए अमेरिका गए। बस यहीं से जगतार सिंह चौधरी जय चौधरी बन गए। अमेरिका में पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब करते हुए काम चलाया। आधे समय में ही अपना कोर्स भी पूरा कर लिया और एडजस्टमेंट भी हो गई। इसके बाद जगतार ने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। 2008 में जय चौधरी ने अमेरिका में साइबर सिक्योरिटी प्रदान करने वाली कंपनी जी स्केलर बनाई जोकि 2018 में पब्लिक हुई।

मक्की की रोटी और सरसों का साग पसंद

दलजीत सिंह ने बताया कि आज भी जय चौधरी मक्की की रोटी व सरसों के साग को बेहद मिस करते हैं। फोन पर जब भी बात होती है तो गांव की खैरियत हमेशा लेते हैं। कहा कि गरीबी के दौरे से ऊपर उठकर यह मुकाम हासिल करना बेहद मुश्किल रहता है, लेकिन जय चौधरी ने अपने हुनर के दम पर यह कर दिखाया है।

 


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