पोल्ट्री फार्मर के बेटे में बड़े- बड़े गुण, पहले डॉक्टर फिर आईएएस अफसर बने आम घर के बेटे ‘निपुण’ कांगड़ा के उपायुक्त निपुण जिंदल की प्रेरककथा

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  • शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
पांवटा के वेद प्रकाश जिंदल का एक छोटा सा पोल्ट्री फ़ार्म था. इसी पोल्ट्री फ़ार्म के जरिये परिवार की रोजी- रोटी और बेटी और बेटे की शिक्षा दीक्षा का प्रबंध होता था. आय इतनी कम थी तमाम खर्चों में मितव्ययता बरतनी पढ़ती थी. संसाधनों के अभाव के बावजूद उनकी पत्नी विमला जिंदल अपने दोनों बच्चों को उच्च शिक्षित कर अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए पति के साथ कंधे से कन्धा मिला कर संघर्षरत थीं. माता- पिता के संघर्ष ने बचपन में उस बच्चे के मन में कुछ कर दिखाने का जुनून भर दिया, ताकि परिजनों की परेशनियां दूर कर सके. बेटा जब बड़ा हुआ तो पिता के छोटे से कारोबार में भी हाथ बंटाने लगा. उसे इतना एहसास हो चुका था कि ज्ञान का उजारा ही उनके परिवार की दशा- दिशा बदल सकता है. यही कारण था कि पढ़ाई में अव्वल आने की जिद सवार हो गई. कालांतर में इसी जिद और जुनून ने उस युवक को पहले डॉक्टर और फिर आईएएस बना दिया. यह प्रेरककथा है हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के उपायुक्त  निपुण जिंदल की. आइये जानते हैं अपनी धुन के पक्के इस युवा आईएएस अधिकारी के अब तक के सफर की मोटिवेशन स्टोरी.

आईएएस परीक्षा में 29वां आल इंडिया रैंक

  • सिरमौर की धार्मिक नगरी पांवटा साहिब में वेद प्रकाश जिंदल और विमला जिंदल दम्पति के घर जब 17 जनवरी 1985 को दूसरे बच्चे के रूप में बेटे का जन्म हुआ तो उसका नाम रखा गया निपुण. पांवटा साहिब के गुरु नानक पब्लिक स्कूल से जमा दो की पढ़ाई करने के बाद साल 2002 में निपुण ने वेटनरी डॉक्टर की पढाई के लिए होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में पहले ही प्रयास में फर्स्ट आल इंडिया रैंक हासिल किया, जबकि पीएमटी में 294वां आल इंडिया रैंक हासिल किया और वेटनरी डॉक्टर की पढाई करने की जगह एमबीबीएस की पढाई को प्राथमिकता दी. एमबीबीएस के लिए मेडिकल कॉलेज रोहतक के लिए चयन हुआ. एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने सवाई मान सिंह कॉलेज से ओर्थोपेडिक्स में एमएस किया. साल 2011 में उन्होंने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल चंडीगढ़ में सीनियर रेजिडेंट के तौर पर सेवायें देनी शुरू की. साल 2013 में सरकारी सेवा में रहते हुए ही निपुण ने सिविल सर्विस में आने के लिए यूपीएससी का एग्जाम किया और पहले की प्रयास में 29वां आल इंडिया रैंक प्राप्त किया.

 

आईएएस ट्रेनिंग में प्रेजिडेंट गोल्ड मैडल

  • हिमाचल कैडर के इस अधिकारी को आईएएस ट्रेनिंग के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेजिडेंट गोल्ड मैडल हासिल हुआ. आईएएस प्रवेश्नर के तौर पर निपुण की नियुक्ति हमीरपुर में हुई. वे नवम्बर 2016 से जून 2018 तक रामपुर के एसडीएम रहे. जून 2018 में सरकार ने उन्हें स्पेशल सेक्रेटरी हेल्थ का जिम्मा सौंपा और स्वास्थ्य बीमा योजना का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा. मई 2019 में उन्हें नेशनल हेल्थ मिशन का प्रबंध निदेशक और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का सदस्य सचिव नियुक्त किया.

नए इनिशिएटिव लेने वाले अधिकारी

  • निपुण की गिनती नए इनिशिएटिव लेने वाले अधिकारियों में होती है. यह उनके की प्रयास हैं कि हिमाचल प्रदेश में नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का ऑफिस पूरी तरह से पेपरलेस हो चुका है. हेल्थ के क्षेत्र में हिमकेयर जैसी योजना शुरू करने वाला हिमाचल प्रदेश पहला राज्य बना है तो उसमें निपुण जिंदल का अहम रोल रहा है. हमीरपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने 14 दिन दियोटसिद्ध मंदिर परिसर में कैम्प कर मंदिर की तमाम व्यवस्था का कम्प्यूटरीकरण करने, रामपुर में एसडीएम रहते दिव्यंगों व किशोरियों के लिए विशेष प्रयास करने और राजस्व के 180 मामलों को तवरित गति से निपटने जैसे कार्य उनके खाते में दर्ज हैं.

परिचय, प्रेम फिर परिणय सूत्र में बंधे

  • मेडिकल की पढाई के दौरान ही निपुण और निधि का परिचय हुआ जो प्रेम में परिवर्तित हो गया और दोनों परिणय सूत्र में बंध गए. उनकी 7 साल और 4 साल की दो बेटियां हैं. निपुण जिंदल की पत्नी निधि जिंदल ने गायनी में एमडी की और कमला नेहरु अस्पताल शिमला में तैनात हैं. निपुण की बड़ी बहन रतिका जिंदल भी गायनी में एमडी चिकित्सक हैं. उनके पिता वेद प्रकाश जिंदल और माता विमला जिंदल साल 2015 – 16 से जिंदल ट्रस्ट के तहत पांवटा में एक स्कूल का संचालन कर रहे हैं.

ब्लॉगर और फोटोग्राफ़र

  • निपुण जहां ब्लॉगर ने तौर पर विभिन्न सब्जेक्ट्स पर ब्लॉगिंग करते हैं, वहीँ उन्हें बर्ड्स फोटोग्राफी का भी जबरदस्त जुनून हैं. प्रशासनिक अधिकारी के रूप में तमाम व्यस्तताओं के बावजूद वह कैमरे से हंटिंग के अपने इस शौक को जिन्दा रखने के लिए वक्त निकल ही लेते हैं. वे अब तक की अपनी इस फोटो कलेक्शन को कॉफ़ी टेबल बुक के जरिये सामने लाने जा रहे हैं. निपुण ट्विटर पर एक्टिव हैं, लेकिन उनका फेसबुक अकाउंट नहीं हैं. बता दें कि निपुण जब स्टूडेंट्स थे तो उनकी परिन्दों से गहरी पटती थी और उन्होंने अपने घर में तीतर, कबूतर, तोते जैसे कई पक्षी पाल रखे थे.

लाइफ में पोजिटिव साइड देखें

  • निपुण जिंदल कहते हैं हैं कि दो दिनों के बीच एक रात है या दो रातों के बीच एक दिन है, यह मानसिकता पर निर्भर करता है. वे कहते हैं कि लाइफ में पोजिटिव साइड देखना चाहिए. नकारात्मकता के लिए जीवन में कोई जगह नहीं है. खुद के लिए लक्ष्य निर्धारण कर उसके लिए निरंतर कोशिश करने वाले हमेशा सफल होते हैं. संघर्ष से कोई भी तय लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

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