चंद्रमा पुत्री चंद्रा, सूर्य पुत्र भागा के प्रेम से उपजी हिमाचल की एक नदी जो सोहणी- महिवाल और हीर रांझा के अमर प्रेम की है गवाह, चिनाव नदी से जुड़ी तीन दुखांत अमर प्रेम कहानियां

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फोकस हिमाचल विशेष –
चंद्रमा पुत्री चंद्रा, सूर्य का पुत्र भागा के प्रेम से उपजी हिमाचल प्रदेश की एक नदी जो आगे जाकर सोहणी- महिवाल और हीर रांझा के अमर प्रेम की ही गवाह बनती है। तीन दुखांत अमर प्रेम कहानियां इस नदी से जुड़ी हैं। इस नदी का इतिहास बेहद रोचक है। बारालाचा दर्रे से दो अलग – अलग दिशाओं से निकलने वाली चंद्र नदी और भागा नदी जब तांदी नामक स्थान पर मिलती हैं तो चंद्रभागा नदी बनती हैं। जहां से चंद्र नदी बहती है, उस घाटी को रंगोली घाटी, जबकि भागा नदी के बहाव के स्थान को पट्टन घाटी के रूप में जाना जाता है। दोनों के मिलन के स्थान को संगम कहा जाता है। चंद्रभागा को गंगा के समान पवित्र माना जाता है अभी भी लोग नदी की पवित्रता के कारण यहां अस्थियां बहाते हैं। चंबा जिले में पहुंचते ही चंद्रभागा नदी चिनाब का नाम ले लेती हैं ।
नदी बनकर प्रेम पाने की पौराणिक कथा
हिमालय में चंद्रभागा नदी के बारे में बड़ी ही रोचक पौराणिक प्रेमकथा सुनाई जाती है। चंद्र नदी को चंद्रमा की पुत्री और भागा नदी सूर्य का पुत्र माना जाता है। कहा जाता है कि किसी कारणवश दोनों के एक होने में अड़चनें आई तो प्रेम की वजह से इन्होंने अपना मिलन नदी के रूप में एक होकर किया। एक तरफ से चंद्र नदी आती है तो दूसरी तरफ से भागा नदी। तांदी नामक स्थल पर यह दोनों एक रूप हो जाती हैं और एक बड़ी नदी का रूप ले लेतीं हैं। तांदी में इनके मिलन को चंद्रभागा के रूप में देखा जाता है। लाहौल स्पीति जिले में बहती चंद्रभागा नदी का सौंदर्य और बहाव अनोखा और अनूठा है। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई प्रेमी युगल मिल कर अठखेलियां कर रहा हो।
नदी में ढूब के एक दूजे में समाये सोहनी- महिवाल
पंजाब में प्रचलित सोहनी- महिवाल की अमर प्रेम कथा में चिनाव नदी दो प्रेमियों के डूब कर एक हो जाने के प्रसंग का गवाह है। पंजाब में चनाब नदी के तट पर बसे तुला कुम्हार परिवार की बेटी सोहनी और मुगल व्यापारी के बेटे इज्जत बेग (महिवाल) की प्रेम कहानी में अपने प्रियतम से मिलने सोहनी मिट्टी के घड़े से तैरती हुई चनाब के एक किनारे से दूसरे किनारे पर पहुँचती थी। साजिश से उसका पक्का घड़ा बदलकर कच्चा घड़ा रख दिया गया पर प्रियजन से मिलने की ललक में सोहनी का कच्चा घड़ा लेकर चनाब में कूद गई और नदी में डूब गई। सोहनी का मुर्दा जिस्म महिवाल के पैरों से टकराया तो वह भी चिनाब की लहरों में गुम हो गया गया और मर कर भी दोनों एक हो गए थे। इन प्रेमियों की यादगार के तौर पर बने स्मारक को मुसलमान मजार और हिन्दू समाधी कहते हैं।
हीर – रांझा की प्रेम कहानी का चिनाव कनेक्शन
कहानी का कालखंड तब का है जब भारत और पाकिस्तान एक देश हुआ करता था। तब चिनाब नदी के किनारे तख्त हजारा गांव में रांझा जनजाति के जाट परिवार में पैदा हुआ रांझा परिवार का सबसे छोटा बेटा था। उससे बड़े तीन भाई थे, जो खेती का काम करते थे। भाभियों के गृह क्लेश के कारण रांझा ने घर छोड़ दिया और हीर के गांव झंग जा पहुंचा। पहली नजर में ही रांझा को हीर से प्यार हो गया तो हीर भी रांझा पर मर मिटी। हीर ने रांझे को अपने पिता से कहकर गाय भैंस चराने के काम पर लगवा दिया। दोनों की मुहब्बत परवान चढ़ने लगी तो हीर के चाचा कैदो ने हीर के परिजनों को यह बता दी। माता-पिता ने हीर का विवाह सेदाखेड़ा से कर दिया। रांझा फकीर बन गया और एक दिन अचानक वह हीर के ससुराल में जा पहुंचा। वहां पर उसकी मुलाकात हीर से हुई। दोनों ने वहां से भाग जाने की योजना बनाई, लेकिन स्थानीय राजा ने पकड़ लिया। हकीकत जान राजा ने हीर का विवाह रांझा के साथ करने का आदेश दिया, लेकिन शादी के दौरान हीर का चाचा ने हीर के खाने में जहर मिला दिया, जिस कारण उसकी मौत हो गई। हीर के इस दुनिया में न रहने की खबर सुन रांझा ने जहर वाला खाला खा कर खुदकुशी कर ली। हीर रांझा की मजार झंग पाकिस्तान में मौजूद है।
सिंधु नदी की सहायक नदी
सिंधु नदी की सहायक नदियों में शामिल चिनाब नदी उत्तर भारत में बहने वाली एक प्रमुख नदी है। भारत के अलावा यह नदी पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बहती है। यह नदी पाकिस्तान में सिंधु नदी से मिलती है, सिंधु में मिलने से पहले इसका संगम झेलम नदी से होता है। रावी नदी चिनाब की प्रमुख सहायक नदी है। महाभारत, श्रीमद्भागवत, विष्णुपुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में उल्लिखित चिनाब नदी उत्तर भारत की एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक नदी है, जिसे प्राचीन काल में असिन्की नाम से जाना जाता था।
चिनाब पर दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज
कटरा- बनिहाल रेल खंड के बीच चिनाब नदी पर बना रेल पुल विश्व के सबसे ऊंचे पुलों में शामिल है, जो कि भारत का सबसे बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट होने के साथ ही दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज है। इस पुल की ऊंचाई विश्वप्रसिद्ध एफिल टॉवर और कुतुबमीनार से भी काफी अधिक है. इसके अलावा चिनाब नदी पर दुलहस्ती व सलाल नामक बांध भी बने हुए हैं।

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