80 साल की उम्र में पहली बार दुनिया के सामने आया मशहूर चित्रकार सरदार सोभा सिंह की बेटी गुरचरण कौर की चित्रकला का हुनर

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80 साल की उम्र में पहली बार दुनिया के सामने आया मशहूर चित्रकार सरदार सोभा सिंह की बेटी गुरचरण कौर की चित्रकला का हुनर
पालमपुर से विनोद भावुक की रिपोर्ट
मशहूर चित्रकार स्वर्गीय सरदार सोभा सिंह की बेटी गुरचरण कौर की चित्रकला का हुनर 80 साल की उम्र में पहली बार दुनिया के सामने आया है। उनकी पहली पहली प्रदर्शनी में उनकी 40 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। सोभा सिंह आर्ट गैलरी अन्द्रेटा की आर्ट रेजीडेंसी में गुरचरण कौर के 80वें जन्मदिन पर दो अप्रैल को प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ और प्रदर्शनी 30 अप्रैल तक जारी रही । प्रदर्शनी का लोकार्पण भोपाल की विजिटर पूजा अग्निहोत्री और बंगलूरु और दिल्ली के कलाप्रेमियों ने किया. कोविड- 19 के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए समारोह में गिने चुने लोग और परिजन ही शामिल हुए। यह पहला अवसर है जब गुरचरण कौर के कला के काम को कला प्रेमियों और समीक्षकों के सम्मुख प्रस्तुत किया गया है। उनकी 40 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया , जिनमें फूलों, फलों की पेंटिंग्स, लैंडस्केप और पोट्रेट शामिल रहे ।
मां की भूमिका में बेटी
कई कला समीक्षकों का मानना है कि यह बीबी गुरचरण कौर ही हैं, जिनकी साधना और देखभाल के चलते ही संत-दार्शनिक-कलाकार सोभा सिंह राष्ट्र को बड़ी संख्या में अनमोल कलाकृतियां देने में सक्षम रहे। अपनी आत्मकथा में सोभा सिंह ने उल्लेख किया है, ‘बीबी गुरचरण कौर ने न केवल एक समर्पित और प्यार करने वाली बेटी के रूप में काम किया, बल्कि एक बहन और एक मां के रूप में आत्म-सेवा भी प्रदान की। इसीलिए मैं उसको बीबी जी से संबोधित करता हूं।‘ (बीबी मां, बहन और बेटी के लिए एक प्रिय पंजाबी शब्द है।)
सोभा सिंह आर्ट गैलरी की प्रोपराइटर-डायरेक्टर
सादगी और विनम्रता की मूर्त बीबी गुरचरण कौर अन्द्रेटा (पालमपुर) में सोभा सिंह आर्ट गैलरी की प्रोपराइटर-डायरेक्टर हैं और सोभा सिंह के सभी मूल चित्रों के सभी कॉपीराइट उनके पास हैं। उन्होंने वर्ष 1986 में संत कलाकार सोभा सिंह के निधन के बाद विश्व प्रसिद्ध शोभा सिंह आर्ट गैलरी को संचालित रखा है और महान कलाकार की कला और दर्शन के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत हैं। 2001-2002 के में उसकी प्रेरणा और समर्पण के चलते भारत और विदेशों में विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने सोभा सिंह जन्म शताब्दी समारोह आयोजित किया। बीबी गुरचरण कौर के बेटे डॉ.हृदय पॉल सिंह और बहू कमलजीत कौर सोभा सिंह आर्ट गैलरी के प्रबंधन में उनका सहयोग करते हैं।
सीखने के लिए विदेशों की यात्रा, काम को ढेरों सम्मान
विक्टोरियन कला का अध्ययन करने के लिए बीबी गुरचरण कौर ने रोम का दौरा किया और स्विटज़रलैंड, यूके, कनाडा, नॉर्वे आदि का भ्रमण किया। बीबी गुरचरण कौर को राज्य में कला और संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को जीवित रखने के उनके निरंतर प्रयासों के लिए गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (अमृतसर), पंजाबी विश्वविद्यालय (पटियाला) और पंजाब कला परिषद (चंडीगढ़) द्वारा सम्मानित किया गया है। आर्ट इंडिया (लुधियाना), शोभा सिंह मेमोरियल चित्रकार सोसाइटी (बठिंडा), सोभा सिंह फाउंडेशन (श्री हरगोबिंदपुर), कल्पना फाइन आर्ट सोसाइटी (लुधियाना), टैलेंटेड वूमेन रिसर्च सेंटर (लुधियाना), चित्रकार शोभा सिंह मेमोरियल आर्ट्स ग्रुप (जगराओं), रोटरी क्लब (पालमपुर), रेड क्रॉस सोसाइटी (पालमपुर) ने भी उन्हें सम्मानित किया है। उन्हें हिमोत्कर्ष संस्थान, ऊना द्वारा 2003 में हिमाचल श्री सम्मान और साल जनवरी 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के हाथों हिमाचल केसरी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

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