30 साल के सोलो राइडर रोहित राणा ने 20 दिन में पहाड़ पर साइकिल से माप दिए 1908 किलोमीटर, दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड़ पर पैडल मार कर हिमाचली गबरू ने दिखाया दम

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30 साल के सोलो राइडर रोहित राणा ने 20 दिन में पहाड़ पर साइकिल से माप दिए 1908 किलोमीटर, दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड़ पर पैडल मार कर हिमाचली गबरू ने दिखाया दम
बीड़ बिलिंग से विनोद भावुक की रिपोर्ट
कांगड़ा जिला के पंचरुखी क्षेत्र के टटेहल गांव के 30 साल के सोलो राइडर रोहित राणा ने दमख़म दिखाते हुए 20 दिन में पहाड़ पर साइकिल चलाते हुए 1908 किलोमीटर माप दिए। इस सफर के दौरान इस हिमाचली गबरू ने दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल रोड़ पर पैडल मार कर साइक्लिंग में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। रोहित अपने साथ ठहरने के लिए टेंट, मैट, फर्स्ट एड बॉक्स, टूल किट, हवा भरने वाला पम्प, एक्स्ट्रा ट्यूब्स और अगले पांच दिन का ड्राई फ़ूड कैरी कर रहा था। इस सबका वेट 40 किलो के करीब था। इस एक्सपीडिशन में रोहित राणा को बोर्डर सिक्युरिटी फ़ोर्स का बहुत सहयोग मिला और उधमपुर और पठानकोट में बीएसएफ कैम्पस में ठहरने की सुविधा मिली, वहीँ कांगड़ा स्थित बीएसएफ की 185 बटालियन ने उनको इस एक्सपीडिशन के लिए सम्मानित किया।
इस रूट से होकर चलाई साइकिल
एक अगस्त को रोहित ने अपने घर टटेहल से साइक्लिंग शुरू की और शाम को मंडी के कटोला में यात्रा विश्राम किया। अगले दिन मनाली पहुँच कर रोहित ने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया। अगली रात जिस्पा में गुजारने के बाद उससे अगली शाम को सरचू पहुंचे। उससे अगला पड़ाव लेह से पहले डिबरिंग में डाला और उससे अगले रोज लेह पहुँच कर एक दिन आराम किया। उसके बाद वे दुनिया के सबसे ऊंचे मोटररेबल रोड पर साइक्लिंग करते खरदुन्गला पास को पार कर नूब्रा घाटी से होते हुए पेंगांग पहुंचे। पेंगांग से वापिस लेह पहुंच कर दो दिन आराम किया। इसके बाद, कश्मीर बोर्डर, द्रास, श्रीनगर, उधमपुर, पठानकोट, कांगड़ा और फिर अपने घर पहुंचे। उनकी यह सोलो राइड बीस दिन की थी।
दिल्ली से खींच लाया पहाड़
रोहित के पिता रणजीत सिंह राणा रेलवे में दिल्ली में कार्यरत थे, इस कारण उनकी स्कूल और कॉलेज की शिक्षा दिल्ली से हुई है। टूरिज्म में स्नातक करने के बाद रोहित ने चार साल कॉर्पोरेट में जॉब की, लेकिन 2016 में उन्होंने एडवेंचर्स टूरिज्म में अपने स्टार्टअप की शुरुआत करने के लिए दिल्ली से घर लौटने का फैसला किया। घर आकर उन्होंने बीड़ बिलिंग से पैराग्लाइडिंग पायलट की ट्रेनिंग ली और उससे अगले साल अटल माउंटेनरिंग इंस्टिट्यूट मनाली से माउंटेनरिंग का बेसिक कोर्स किया। साल 2018 में रोहित ने अपने कजन राघव राणा के साथ मिल कर ‘पंचिका’ के ब्रांड नाम से बीड़ बिलिंग में कंपनी की शुरुआत की। ‘पंचिका’ एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए पैराग्लाइडिंग, बाइकिंग, ट्रेकिंग, माउंटेनरिंग, कैम्पिंग का आयोजन करती है।
बड़ा भंगाल में लगा चुके मेडिकल कैंप
रोहित राणा ने डॉ. सुरेश राठौर के साथ मिल कर साल 2018 में कांगड़ा के दुरूह बड़ा भंगाल घाटी में मेडिकल कैम्प का आयोजन किया था। इस कैम्प में इस टीम ने 100 लोगों का मेडिकल चैकअप कर उन्हें मेडिसिन उपलब्ध करवाए थे। डॉ. सुरेश राठौर को इस प्रयास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। रोहित राणा की पहचान एक सोलो राइडर की है और बाइक पर वह आधे से ज्यादा भारत भ्रमण कर चुके हैं। साइक्लिंग की यह उनकी पहली सोलो राइड थी, जिसके लिए रोहित ने जम कर अभ्यास किया था। रोहित ने ‘फोकस हिमाचल’ को बताया कि साहस और रोमांच से भरा यह ट्रिप हमेशा के लिए यादगार बन गया है।

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