24 वर्ष की उम्र में हो गई शादी, मां बनने के बाद की पढ़ाई, बनी प्रतिष्ठित क्रिमिनल लायर

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24 वर्ष की उम्र में हो गई शादी, मां बनने के बाद की पढ़ाई, बनी प्रतिष्ठित क्रिमिनल लायर, महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री शीतल शर्मा व्यास
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
जिद और जुनून की यह प्रेरककथा एक ऐसी जिद्दी लड़की की है, 15 साल की उम्र में जिसके सिर से बाप का साया उठ गया, 24 साल की उम्र में शादी हो गई, 25 साल की उम्र में मां बन गई। परिवार के साथ तालमेल के बीच फिर से पढऩा शुरू किया। एमए, बीएड के बाद वकालत की पढ़ाई की। आज वह न केवल शिमला की मशहूर वकील हैं, बल्कि भाजपा संगठन में भी अपनी खास पहचान बनाई है। शिमला की मशहूर क्रिमिनल लायर एवं भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश महामंत्री शीतल शर्मा व्यास ने मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।
हार के बाद ही जीत है

4 दिसंबर 1982 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय परिवार में बेटे के बाद जब बेटी का जन्म हुआ तो परिजनों ने बच्ची का नाम शीतल रखा। माता- पिता दोनों सरकारी मुलाजिम थे। बेटी की उम्र पढ़ाई की हुई तो उसे शिमला के प्रतिष्ठित ऑकलैंड हाउस स्कूल में दाखिल करवाया। प्रतिष्ठित सेंट बिड्स कॉलेज से स्नातक कर शीतल ने हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में प्रवेश किया। यहीं उसे छात्र राजनीति से जुडऩे का मौका मिला और साल 2006 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से एससीए के लिए महासचिव का चुनाव लड़ा। हार हुई पर हताशा नहीं।
पिता होते तो बेटी की कामयाबी पर गदगद होते
शीतल को 15 वर्ष की किशोरावस्था में पितृ शोक लगा। शीतल कहती हैं कि पिता के खोने का वो दुख उस वक्त शायद इतना महसूस नहीं किया, जितना वक्त के साथ- साथ बढ़ता गया। जब भी जिंदगी में कोई उलझन या कठिनाई आई तो पिता का हाथ सिर पर न होना बहुत खला। बेशक माता ने कोई कमी न होने दी पर पिता की कमी भी पूरी नहीं हुई। जीवन में जब भी कुछ अच्छा हुआ या मिला तो पिता को जरूर याद किया। चाहे 10 वी का रिजल्ट हो या पार्टी में बड़ा स्थान हासिल करना, पिता होते तो बेटी की उपलब्धियों पर गदगद होते।
मां बनने के बाद पढ़ाई की दूसरी पारी
मां पर सामाजिक- पारिवारिक दबाव के चलते 24 वर्ष की उम्र में साल 2007 में शीतल कांगड़ा से संबंध रखने वाले नितिन व्यास के साथ परिणय सूत्र में बंध गई। साल 2008 में इस दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। शीतल बताती हैं कि संयुक्त परिवार में रहना एक अलग अनुभव था। शुरुआती दौर थोड़ा कठिन रहा, क्योंकि पहाड़ी संस्कृति से कांगड़ा का रहन- सहन बिल्कुल अलग था। पति औऱ ससुराल के सहयोग से मां बनने के बाद पढ़ाई जारी रखी। राजनीतिक शास्त्र में स्नातकोत्तर किया, बी.एड की पढ़ाई की। कुछ साल बच्चे की परवरिश में व्यस्त रहीं।

युवा संगठन की सियासत, वकालत की पढ़ाई
साल 2010 में शीतल भाजपा युवा मोर्चा में बतौर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नियुक्तहुई। राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद धीरे- धीरे सीढ़ी चढ़ अगली बार प्रदेश सचिव युवा मोर्चा और फिर उपाध्यक्ष बनीं। 9 साल युवा मोर्चा में दायित्व का निर्वाहन करने के साथ ही वकालत की पढ़ाई की। शिमला के प्रतिष्ठित क्रिमिनल लायर अनूप चितकारा के सानिध्य में काम सीखा। अनूप चितकारा माननीय उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्तहुए और उनके दफ्तर का सारा कार्यभार शीतल को मिला। वर्तमान में शीलत उच्च न्यायालय में प्रतिष्ठित क्रिमिनल वकील के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं।
वकालत, संगठन व परिवार के बीच तालमेल
साल 2020 में भाजपा संगठन ने शीतल को महिला मोर्चा के प्रदेश महामंत्री का दायित्व सौंपा। शीतल कहती हैं कि फुल टाइम वकालत, संगठन में बड़ी जिम्मेदारी और परिवार, सबके बीच समन्वय बिठाना थोड़ा कठिन है, पर हर मुश्किल से लडऩा सदा से फितरत में रहा। जिंदगी में कुछ करने का जज्बा जो बचपन से ही दिल के किसी कोने में था, उम्र बढऩे के साथ ही उस कोने से निकल पूरे दिलो दिमाग पर हावी हो गया। यही जिद थकने नहीं देती और बेहतर करने की प्रेरणा देती है।
हर चुनौती के लिए हरदम तैयार
शीतल न तो किसी बड़े अमीर परिवार से संबंध रखती हैं न राजनीति में कोई गॉडफादर है। उनका कहना है कि आज वह जिस स्थान पर अपनी मेहनत और किस्मत से हैं। ऊपर वाले का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा है। वकालत में इतने कम समय में जो नाम कमाया है, शीतल के लिए एक सपने जैसा लगता है। मेहनत व संघर्ष ने परिवार व समाज मे आदर- मान मिला है। शीतल भविष्य में मिलने वाली हर चुनौती स्वीकार करने के लिए मानसिक रूप से खुद को तैयार कर चुकी हैं।


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