21 साल की उम्र में सफल कथावाचक, गायिका, कवयित्री, योग प्रशिक्षक, और संगीतकार के तौर पर खुद को साबित किया, अभिनय में भी कमाल, कुल्लू की युवा खुशबू भारद्वाज की प्रेरककथा

Spread the love

21 साल की उम्र में सफल कथावाचक, गायिका, कवयित्री, योग प्रशिक्षक, और संगीतकार के तौर पर खुद को साबित किया, अभिनय में भी कमाल, कुल्लू की युवा खुशबू भारद्वाज की प्रेरककथा
कुल्लू से आरती ठाकुर की रिपोर्ट
21 साल की उम्र में सफल कथावाचक के तौर पर अपनी ख़ास पहचान बनाने वाली कुल्लू की पंडित खुशबू भारद्वाज के प्रवचनों का हर दिन सीधा प्रसारण होता है। युवा गायिका, कवयित्री, योग प्रशिक्षक, और संगीतकार के तौर पर भी इस युवा प्रतिभा खुद को साबित किया है। खुशबू को संगीतकार के रूप रूप में कई वाद्ययंत्र बजाने में महारत हासिल है और अभिनय में भी उसका सिक्का चलता है। उसका एक नाटक ‘दूरदर्शन’ पर प्रसारित हो चुका है।
खुशबू ने गायन में अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है। शहरी आवास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने खुशबू को ऑल ओवर टैलेंट अवार्ड ‘शेन-ए-भारत’ पुरस्कार से सम्मानित किया है। ‘नारी शक्ति पत्रिका’ जिसका उद्घाटन मुख्यमत्री श्री यराम ठाकुर ने किया है, उसमें खुशबू के नाम का एक कॉलम है। खुशबू की प्रतिभा को निखारने में उसके परिजनों, खासकर मां का बड़ा हाथ है। वे उसके पथ-प्रदर्शक और मार्गदर्शक रहे हैं। खुशबू ने अपनी स्कूली शिक्षा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुल्तानपुर कुल्लू से की है और ग्रेजुएशन की डिग्री कॉलेज कुल्लू से पूरी की है।
मां के आँचल से संगीत की शिक्षा
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी को ‘देवताओं की घाटी’ के रूप में जानी जाती है। पंडित खुशबू भारद्वाज इसी छोटे शहर की बड़े सपनों वाली लड़की है। मां श्रीमती रविंद्र भारद्वाज, पिता श्री खेम राज भारद्वाज और भाई साहिल भारद्वाज खुशबू के छोटे से परिवार के मेल पिल्लर हैं।
खुशबू मां खुद एक कला प्रेमी हैं और बाल्यकाल से ही खुशबू की प्रेरणा रही है। खुशबू आज जिस मुकाम पर है, उसमें उसके शिक्षकों, परिवार और दोस्तों की अहम भूमिका है। जमा दो की पढ़ाई पूरी करने के बाद खुशबू ने संगीत के प्रति आकर्षण महसूस किया है, धार्मिक गतिविधियों के बारे में जानने की जिज्ञासा पैदा हुई और जरूरतमंदों की मदद करने की भावना को बल मिला।
निशानेबाज और पर्वतारोहण में महारत
खुशबू ने जब सरकारी डिग्री कॉलेज कुल्लू में प्रवेश लिया तो उसे एनसीसी में शामिल होने का मौका मिला। एनसीसी कैडेट के रूप में उसका पहला शिविर सुंदरनगर में आयोजित हुआ। इस शिविर में गुणवत्ता, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और श्रम की गरिमा जैसी ताकत मिली। उसके बाद खुशबू ने कई शिविर लगाए हैं और निशानेबाजी, पर्वतारोहण, वृक्षारोपण, सांस्कृतिक गतिविधियां, टेंट पिंचिंग, चर्चा, अध्ययन और आत्मविकास के विकास के गुर सीखे। खुशबू ने एनसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में रोपड़, पंजाब में एनसीसी सांस्कृतिक समूह शिमला का नेतृत्व किया और ‘ऑवर ऑल ट्रॉफी’ जीतने में कामयाबी हासिल की।
फोकस हिमाचल सम्मान से सम्मानित
कोविड 19 महामारी के दौरान एनसीसी परिवार के एक सदस्य के रूप में खुशबू ने कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल में स्वेच्छा से अपनी सेवायें प्रदान की और रोगियों और उनके परिवार के सदस्यों को भोजन, दूध, फल प्रदान किये। उपायुक्त कुल्लू ने उन्हें इस काम के लिए प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया है। हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी शिमला एवं फोकस हिमाचल ने 8 मार्च 2021 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर खुशबू को वीमेन पॉवर अवार्ड से सम्मानित किया है। खुशबू के नाम इससे इतर भी कई पुरस्कार हैं. खुशबू के सुखद भविष्य के लिए शुभकामनाएं।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *