21 साल की उम्र में शुरू की लड़ाई, 62वें साल में कामयाबी पाई, कबायली क्षेत्र की महिलाओं को पैतृक संपति का अधिकार दिलवाने वाली रतन मंजरी के संघर्ष की जीत की प्रेरककथा

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21 साल की उम्र में शुरू की लड़ाई, 62वें साल में कामयाबी पाई, कबायली क्षेत्र की महिलाओं को पैतृक संपति का अधिकार दिलवाने वाली रतन मंजरी के संघर्ष की जीत की प्रेरककथा
शिमला से उमेश शर्मा की रिपोर्ट
हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र किन्नौर जिले के रिब्बा गांव की रतन मंजरी का पहला परिचय उस कबायली महिला का है जिसने कबायली क्षेत्र की महिलाओं के पैतृक संपति के अधिकार का हकदार बनाने के लिए चार दशक से लंबे समय तक संघर्ष किया और 2015 में पहली बार कबाइली इलाकों की लड़कियों को भी पिता की संपत्ति पर हक का अधिकार मिला। कबायली महिलाओं को संगठित कर एक तरफ उन्होंने इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया, वहीं वह इस मसले को अदालत तक भी लेकर गईं। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कबायली महिलाओं को पैतृक संपति के अधिकार का फैसला सुनाया।
21 साल की आयु में सम्मान की जंग
कबायली जिलों लाहुल स्पीति और किन्नौर में कस्टमरी लॉ के चलते हजारों बेटियां अपने पिता की संपत्ति के अधिकार से वंचित थी। 21 साल की आयु में ही महिलाओं के साथ इस भेदभाव को देखते हुए रतन मंजरी ने उनके सम्मान की जंग शुरू कर दी। स्थानीय विधायक से लेकर राष्ट्रपति तक महिलाओं के पैतृक संपति के अधिकार का मामला उठाया। इस आंदोलन के जुनून में उन्होंने शादी तक नहीं की। जब अदालत से इस हक में फैसला आया, तब तक रतन मंजरी की उम्र 62 साल हो चुकी थी। 67 साल की मंजरी पांच बार रिब्बा पंचायत की प्रधान और इतनी ही बार जिला परिषद की सदस्य रह चुकी हैं। वह महिला कल्याण परिषद की अध्यक्ष हें।
कस्टमरी लॉ के चलते नहीं मिलता था हक
कस्टमरी लॉ वाजिब उल अर्ज की व्यवस्था के चलते किन्नौर व लाहुल स्पीति के क्षेत्रों में हजारों महिलाएं पिता की संपत्ति के अधिकार से वंचित रहती थीं। कस्टमरी लॉ को चुनौती की याचिका पर अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की प्रथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15, 38, 39 और 46 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। हिमाचल के चंबा जिला में वर्ष 1963 में राजपत्र में छपी रिपोर्ट के अनुसार 91 फीसदी हिंदू रहते हैं। इसी तरह किन्नौर में भी वर्ष 1971 की रिपोर्ट के अनुसार 91 फीसदी हिंदू रहते हैं। अदालत ने हिंदू सक्सेसन एक्ट के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए कहा कि कबायली क्षेत्रों की लड़कियों को भी पिता की संपत्ति पाने का अधिकार है।

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