मंत्री की बेटी ने मां बनकर एक अनाथ बेटी का किया कन्यादान  , मिलिए मुंबई महानगर से लौटकर पंचायती राज संस्था में सिक्का जमाने वाली वंदना गुलेरिया से

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मंत्री की बेटी ने मां बनकर एक अनाथ बेटी का किया कन्यादान  , मिलिए मुंबई महानगर से लौटकर पंचायती राज संस्था में सिक्का जमाने वाली वंदना गुलेरिया से
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
मंडी जिला के ग्रयोह वार्ड से जिला परिषद सदस्य एवं प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव वंदना गुलेरिया और उनके पति दिनेश गुलेर्रिया  ने इसी साल 25 अप्रैल को धर्मपुर क्षेत्र की एक अनाथ बेटी के परिजन बन कर उसका कन्यादान किया . कोविड 19 के चलते बंदिशों चलते यह शादी समारोह क्षेत्र के एक मंदिर में साधारण तरीके से आयोजित किया गया. वंदना गुलेरिया ने  उक्त परिवार की विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए  खुद कन्या के हाथ पीले करने और उसका कन्यादान करने का फैसला किया  और   शादी समारोह के लिए सारी तैयारियां खुद कीं .
बेटा बीमार हुआ तो शुरू किया मेडिकल कैम्प
वंदना गुलेरिया का बेटा दक्ष कीडनी की बीमारी से पीड़ित हुआ तो बेटे के उपचार के लिए विभिन्न समस्याओं से दो- चार होना पड़ा. तब उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि ग्रामीण स्तर पर बीमार लोगों को मेडिकल चेकअप के लिए जिला और राज्य मुख्यालय तक बड़े चक्कर काटने पड़ते हैं. इसी समस्या के समाधान के चलते उन्होंने गांव स्तर पर हर छःह माह में मेडिकल चेकअप कैम्प लगाने का प्रण किया. उनकी सामाजिक संस्था ‘आदर्शनी’ अब तक ऐसे बीस कैम्पों का आयोजन कर चुकी हैं और हर कैम्प में विशेषज्ञ चिकित्सिकों द्वारा औसतन चार हजार रोगियों का चेकअप और उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती हैं. संस्था रक्तदान शिविर भी आयोजित करती है.
गांव से स्कूल से पंजाब यूनिवर्सिटी तक
16 जुलाई 1979 को महेंद्र सिंह ठाकुर के घर दूसरी संतान के रूप में पैदा हुई वंदना ने मिडल तक की पढ़ाई धर्मपुर में मिडल स्कूल तनहेड़ से करने के बाद पोर्टमोर शिमला से जमा दो की परीक्षा पास की और शिमला के आरकेएमवी कॉलेज से साल 1999 में स्नातक की डिग्री ली. उसके बाद साल 2001 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से इतिहास में स्नातकोतर किया और 2003 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से फिलोसिफी में स्नातकोतर किया. साल 1997 में जब वंदना बीए फर्स्ट इयर की स्टूडेंट थी, उन्हें हिमाचल विकास स्टूडेंट यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष चुना गया.
सेना में जाने का सपना नहीं हुआ पूरा
वंदना की परवरिश बेटी के बजाये बेटे की तरह हुई है. पढ़ाई के दिनों में वह एनसीसी कैडेट रहीं. वह भारतीय सेना में अधिकारी बन राष्ट्रसेवा करना चाहती थीं, लेकिन उनकी यह हसरत पूरी नहीं हुई. फिर उन्होंने हिमाचल प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बनाया, लेकिन यहाँ भी कामयाबी नहीं मिली. हालांकि वंदना की जेबीटी के लिए सेलेक्शन हुई और कांगड़ा सेन्ट्रल कोपरेटिव बैंक में क्लर्क पद के लिए टेस्ट भी पास किया, लेकिन उन्होंने यह दोनों ऑफर ठुकरा दिए.
सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार की बहू
नवम्बर 2002 में वंदना चोलथरा के सैन्य पृष्ठभूमि वाले प्रतिष्ठित गुलेरिया परिवार की बहू बनी. उनकी शादी हिमाचल पर्यटन विभाग के अधिकारी दिनेश गुलेरिया से हुई. उनके ससुर जहाँ पैरा मिलिटरी फ़ोर्स के अफसर रहे, वहीँ उनके देवर कैप्टन दीपक गुलेरिया ने कारगिल युद्ध के दौरान शहादत का जाम पिया. वंदना के पति दिनेश गुलेरिया वर्तमान में जिला पर्यटन अधिकारी शिमला के पद पर कार्यरत हैं और उनका 17 वर्षीय बेटा दक्ष जमा दो का स्टूडेंट हैं.
मुंबई महानगर से धर्मपुर वापसी
मई 2003 में धर्मपुर से चोलथरा गांव से संबंध रखने वाले भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम धूमल के ओएसडी रहे कर्मवीर वर्मा की एक सड़क हादसे में मौत हो गई, उस समय दिनेश गुलेरिया मुंबई में तैनात थे और सपरिवार वहीँ रह रहे थे. कारगिल में शहीद हुए छोटे भाई दीपक गुलेरिया के चतुर्थ वार्षिक श्राद्ध के लिए वे परिवार सहित गांव आये हुए थे. इस दौरान क्षेत्र के कई वरिष्ठ नागरिकों जिनमें कई पूर्व सैनिक और सैन्य अधिकारी भी शामिल थे, ने गुलेरिया परिवार से मिलकर 23 साल की वंदना से धर्मपुर के धाड़ता क्षेत्र का नेतृत्व करने का अनुरोध किया. इसी अनुरोध पर वंदना ने महानगर की जिन्दगी छोड़ कर अपने क्षेत्र के लोगों की मदद के लिए गांव लौटने का फैसला किया.
जिला परिषद सदस्य, प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव
वंदना गुलेरिया वर्तमान में प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की महासचिव हैं. साल 2009 में प्रदेश महिला मोर्चा में शामिल हुई वंदना गुलेरिया को साल 2015 में प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष इंदु गोस्वामी के नेतृत्व में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी के तौर पर काम करने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया. साल 2010 में वंदना ने मंडी के सजायो पीपलू वार्ड से जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीता. हालंकि साल 2015 में हुए जिला परिषद चुनाव में इसी वार्ड में बेहद करीबी अंतर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसका बदला उन्होंने साल 2020 में हुए जिला परिषद चुनाव में ग्रयोह वार्ड से अपने पुराने प्रतिद्वंदी को चित कर लिया. हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनाव में वंदना को नगर निगम मंडी में भाजपा महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया था. मंडी में भाजपा 15 में से 11 सीटें जीतने में कामयाब रही और निगम पर भाजपा की सरदारी हुई.
मुस्कान सबसे बड़ी ताकत
वंदना के चेहरे की मुस्कान उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकत है. वे सच और स्पष्ट बोलने पर यकीन रखती हैं और झूठ बोलने से बचती हैं. गलती होने की सूरत में माफी मांग कर अपराधबोध से किनारा कर लेती हैं. वंदना का कहना है कि उनके राजनीतिक जीवन में उनकी फिलोसिफी की पढ़ाई बहुत काम आई. वंदना की अपनी एक कोर कमेटी है, जिसमें क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों की अहम् भूमिका है. कोर कमेटी की आमराय से सब तय होता है. वे टीम वर्क को तरजीह देती हैं.
डैडी हैं बेटी के रोल मॉडल
वंदना के रोल मॉडल उनके डैडी महिंद्र सिंह ठाकुर हैं. वे अपने डैडी के बेहद करीब हैं. उनके मुताबिक उनके डैडी की ये खूबियाँ हैं कि वे बेहद सादगी पसंद हैं और जो बोलते हैं, उसे पूरा करते हैं. पिछले 32 साल से विधायक होने के बावजूद वे कभी घर से बाहर का खाना नहीं खाते, बल्कि सुबह और शाम दो बार घर का भोजन करते हैं. वंदना का कहना हैं कि जन्म- जन्म वह महिंद्र सिंह के घर जन्म लेना चाहती हैं पर अगले जन्म में वह अपने पापा की बेटी नहीं बल्कि बेटा बनना चाहती है.
संगठन की हर जिम्मेदारी के लिए तैयार
वंदना गुलेरिया को सियासी गलियारों में महेंद्र सिंह ठाकुर की सियासी वारिस के तौर पर देखा जाता है. पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में खुद के वजूद को साबित कर चुकी वंदना विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कूटनीतिक जवाब देते हुए कहती हैं कि उनकी प्राथमिकता बड़े पद नहीं, बल्कि एक अच्छा नागरिक बनने की है. पार्टी संगठन की तरफ से जो भी दायित्व मिले, उसे बखूबी निभाने पर यकीन करती हूं और जरूरतमंदो की मदद करने के विश्वास करती हूं. वंदना का कहना है कि कभी सोचा नहीं था कि राजनीति में जाना है, सब मुकद्दर  का खेल है. देखते हैं डेस्टनी कहां तक लेकर जाती है

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