हिमालय के जंगली फलों को बचाया, कर्नाटक में सेब उगाया, मंडी के 82 साल के फल वैज्ञानिक डॉ. चिरणजीत परमार www.fruitipedia.com के संचालक

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हिमालय के जंगली फलों को बचाया, कर्नाटक में सेब उगाया, मंडी के 82 साल के फल वैज्ञानिक डॉ. चिरणजीत परमार www.fruitipedia.com के संचालक

 

मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट

 

यह प्रेरक और रोचक कथा है एक ऐसे उर्जावान वैज्ञानिक की, जो जिन्दगी की सांझ में अपने मिशन को लेकर मुखर है। हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के डॉ. चिरणजीत परमार इस मार्च में 83 साल के हो जायेंगे, लेकिन उनके अथक काम को देखकर कतई नहीं लगता कि बुढ़ापा उन पर भारी पड़ा है। डॉ. परमार हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले खाने योग्य जंगली फलों के वजूद को बचाने की अनूठी मुहिम के नायक हैं। उनके नाम कर्नाटक जैसे गर्म जलवायु क्षेत्र में सेब उगाने का बिरला कारनामा कर दिखाने का रिकॉर्ड है, तो आईआईटी मंडी में बोटेनिकल गार्डन विकसित करने में उनकी भूमिका अहम् है। दुनिया के सभी महादीपों और सभी एग्रो जोन में काम करने का अनुभव रखने वाले डॉ परमार ने 34 देशों के विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया है। वे www.fruitipedia.com के संचालक हैं और कई पुस्तकों के लेखक भी। वे भारत में सबसे ज्यादा यात्रा करने वाले फल वैज्ञानिक हैं। वे लम्बे अर्से से मेडिसलन यूज के लिए हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती की वकालत करते आ रहे हैं। वे कई शोधार्थियों के रिसर्च वर्क में गाइड की भूमिका निभा रहे हैं।

 

तो किचन गार्डन में उगेंगें जंगली फल    

हिमालय में सैंकड़ों प्रजातियों के जंगली फल, नट्स और खाद्य पौधे पाए जाते हैं। ये न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि मेडिसनल वैल्यू के चलते इनकी आयुर्वेद उद्योग में भी खासी मांग रहती है। कम होते जंगलों के आकार और अत्याधिक अवैज्ञानिक दोहन के चलते जंगली फलों, नट्स और जंगली खाद्य पौधों के वजूद पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। फल वैज्ञानिक डॉ. चिरणजीत परमार ऐसे ही जंगली फलों, नट्स और खाद्य पौधों के संरक्षण में जुटे हैं। उनकी देख- रेख में आईआईटी मंडी के कैंपस में तीन हैक्टेयर भूमि पर बोटेनिकल गार्डन विकसित किया जा रहा है। यहां डेढ़ सौ किस्मों के जंगली फलों, नट्स व खाद्य पौधों को विकसित कर वैज्ञानिक तरीके से इनकी व्यवसायिक खेती व बागवानी की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

 

जंगली फलों पर शोध और अध्ययन

डॉ. चिरणजीत परमार का अधिकांश शोध जंगली फलों और उन फलों के बारे में है, जिनके बारे में लोग बहुत कम जानते हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में पैदा होने वाले जंगली फलों और व्यवसायिक उत्पादन से प्रदेश की आर्थिक की संभावनाओं पर भी उन्होंने अध्ययन किया है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में पैदा हाने वाले जंगली फलों, जंगली नट्स और जंगलों में कुदरती तौर पर पैदा होने वाले खाद्य पौधों पर पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने 30 जंगली फलों, 11 जंगली नट्स और 10 जंगली खाद्य पौधों के बारे में सचित्र बुनियादी जानकारी दी है। यह पुस्तक  जंगली फलों के बारे में अहम दस्तावेज है, जिसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है।

 

www.fruitipedia.com के संचालक

डॉ. परमार ने वर्ष 2008 में फलों पर आधारित दो सौ लेखों के साथ www.fruitipedia.com होस्ट की। वह नियमित तौर पर विभिन्न फलों पर आधारित कंटेट से इसे अपडेट करते आ रहे हैं। उनकी इस वेबसाइट को अब तक 3.2 मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं और रोज दिन 1000 से 1500 हिट्स मिलते हैं। उनकी अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं पर पूरी कमांड है और वे दोनों भाषाओं में लेखन करते हैं। जंगली फलों के संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई संस्थाएं उनको सम्मानित कर चुकी हैं।

 

लेखक, ब्लॉगर, फोटोग्राफर और पत्रकार

डॉ. चिरणजीत परमार लेखक, ब्लॉगर, फोटोग्राफर और पत्रकार के तौर पर पहचान रखते हैं। वह भारतीय और विदेशी पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में फलों पर आधारित नियमित लेखन करते आ रहे हैं। एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक में उनकी कार्टून स्ट्रिप ‘फ्रूट्स फैक्टस’ नियमित प्रकाशित होती रही है। डॉ. परमार अपने विदेश प्रवास व यात्राओं के दौरान हुए विभिन्न अनुभवों को अपने ब्लॉग में रोचक ढंग से प्रकाशित करते आ रहे हैं। अंग्रेजी में लिखे अपने ब्लॉग्स को हिंदी में ‘दुनिया जैसी मैंने देखी’ के रूप में पाठकों के सामने पेश कर चुके हैं। पिछले साल आईआईटी मंडी ने उनकी पुस्तक ‘सम इटेबल वाइल्ड प्लांट्स ऑफ़ वेस्टर्न हिमालय’ प्रकाशित की है, जिसमें डॉ. तारा सेन सहलेखक हैं।

 

भारत में सबसे ज्यादा यात्रा करने का रिकॉर्ड

वर्ष 1939 को हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में पैदा हुए चिरणजीत परमार ने आरंभिक पढ़ाई मंडी से करने के बाद वर्ष 1972 में उदयपुर विश्वविद्यालय से बागवानी में पीएचडी की। उन्होंने फल वैज्ञानिक के तौर पर भारत और विदेशों में कई विश्वविद्यालयों में अध्ययन और कई निजी कंपनियों में काम किया है। डॉ. परमार देश के ऐसे फल वैज्ञानिक हैं, जिन्हें दुनिया के सभी जलवायु क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है। वे सभी महाद्वीपों में 34 देशों में विशेषज्ञ फल वैज्ञानिक के तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। डॉ. परमार भारत में सबसे ज्यादा यात्रा करने वाले फल वैज्ञानिक हैं।

 

लोअर हाइट्स, गर्म जलवायु में उगा दिया सेब

डॉ. चिरणजीत परमार ने कर्नाटक में सेब उत्पादन की संभावनाओं को नए पंख लगा दिए हैं। उन्होंने कर्नाटक के गर्म क्षेत्र के बागवानो के साथ मिल कर सेब के बगीचे विकसित करने में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। डॉ. परमार की देखरेख में कर्नाटक में कई सेब बगीचे लगाए गए हैं और अब कई बागवान सेब उत्पादन करने लगे हैं। सेब उत्पादन के सफल प्रयोग को लेकर देश भर के मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं।

 

134 किस्मों के हिमालयी जंगली फलों को बचाने के प्रयास

डॉ. परमार की देखरेख में विकसित हो रहे आईआईटी मंडी के बोटेनिकल गार्डन में हिमालय के कई तरह के जंगली फलों की व्यवसायिक खेती की संभावनाएं पैदा हो रही हैं। तीन हैक्टेयर भूमि पर बने बोटेनिकल गार्डन तैयार में 134 किस्मों के हिमालयी जंगली फलों के संरक्षण पर काम हो रहा है।  इस गार्डन में कुदरती तौर पर होने वाले पीले आक्खे, हल्के जामुनी और गहरे जामुनी रंग के आक्खे के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। यहां कुदरती रूप में उगने वाले काफल के पेड़ भी तैयार किए जा रहे है। यहां जंगली कंद तरड़ी व दरेघल भी विकसित किए जा रहे हैं।

 

 

 

 


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