हिमालयन क्राप्ट : बुनाई की जादूगरी का हुनर जानने वाले हाथों को मजबूत करने का स्टार्टअप, कॉरपोरेट की जॉब को छोड़ अपने तीन दोस्तों संग कुल्लू हैंडलूम को नया मुकाम देने वाले किरण ठाकुर की प्रेरककथा

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हिमालयन क्राप्ट : बुनाई की जादूगरी का हुनर जानने वाले हाथों को मजबूत करने का स्टार्टअप, कॉरपोरेट की जॉब को छोड़ अपने तीन दोस्तों संग कुल्लू हैंडलूम को नया मुकाम देने वाले किरण ठाकुर की प्रेरककथा
कुल्लू से विनोद भावुक की रिपोर्ट
कुल्लू शाल को देश- विदेश तक पहुंचाने और कुल्लू शाल के दस्तकारों के हुनर को बचाने के लिए हिमालयन क्राफ्ट के स्टार्टअप लीक से हट कर काम कर रही है। हिमालयन क्राफ्ट कुल्लू घाटी के हर दस्तकार के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन कर आया है। पहले साल में ही है। हिमालयन क्राफ्ट के साथ कुल्लू के 200 से अधिक व्यक्तिगत कारीगर, 30 से ज्यादा कारीगर संस्थाए और 70 से अधिक स्वंय सहायता समूह जुड़ चुके हैं। प्रोडक्ट सेलेक्शन, फोटोग्राफी, मॉडलिंग, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस की प्रोसेस पूरी करने के बाद हिमालयन क्राफ्ट अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, क्राफ्ट बाजार, Kraftly,, ओर Etsy जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ पार्टनरशिप कर कुल्लू के कारीगरों के हाथों के बने उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचा रही है। हिमालयन क्राफ्ट की खुद की वेबसाइट पर हर दिन 1000 के करीब कस्टमर विजिट कर रहे हैं और प्रोडक्ट्स को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। यह स्टार्टअप आइडिया हिमाचल प्रदेश के चार युवा उद्यमियों का है, जिसके फांउटर किरण कुल्लू के किरण ठाकुर हैं।
बिजनेस एक्सपर्ट से लिए टिप्स
कंप्यूटर में ग्रेजूएशन और टूरिज्जम में एमबीए करने के बाद किरण ठाकुर को दिल्ली में एक कॉरपोरेटके साथ दो साल विजनस टूअर कंसल्टेंट के तौर पर काम करने का मौका मिला। खुद के स्टार्टअप का आइडिया दिल्ली में जॉब के दौरान आया। किरण ठाकुर बताते हैं कि जॉब के दौरान उनका काम दिल्ली और एनसीआर के बिजनेस कलाइंट्स के ट्रेवल अरेंजमेंट करना था। ये कारोबारी कारोबार को बढ़ाने के लिए देश विदेश में मिटिंज्स, एक्जीविशन और ट्रेड फेयर के लिए जाया करते थे। जॉब के दौरान कारेाबारी दुनिया से जड़ी कई हस्तियों से से मिलने का मौका मिला और कई बिजनेस एक्सपर्ट से मधुर संबंध भी बन गए। उनसे बिजनेस स्टार्ट करने के और बढ़ाने का नॉलेज लेने की कोशिश करता रहा।
कुल्लू के नाम पर देश विदेश में ठगी
किरण ठाकुर कहते हैं कि हिमालनय क्राप्टस का कॉन्सेप्ट तब आया जब बिजनस टूअर कंसल्टेंट के तौर काम करते हुए मुबई, गुजरात, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान जैसे कई स्थानों जब कुल्लू हैंडलूम के नाम पर पावर लूम को बिकते देखा तो दिल को गहरी ठेस लगी। दिल को बहुत बुरा लगा। मैंने बचपन से अपने आसपास कुल्लू हैंडलूम को उभरते देखा है। दस्ताकरों के बीच पल्ला बढ़ा था। हमारे कारीगरों के हाथों की कला का पूरी दुनिया मे नाम है पर मालूम नही था कि कुल्लू हैंडलूम के नाम पर देश विदेश में पावर लूम का सामान बिक रहा है और कुल्लू शान बनाने वाले हुनरमंद हाथ बेरोजगारी के कगार पर हैं।
नाम बड़े और दर्शन छोटे
किरण ठाकुर बताते हैं कि जब गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि कुल्लू के हैंडलूम उद्योग की इतनी बुरी हालत है कि किसी समय कुल्लू की आर्थिकी का आधार कहा जाने वाला यह उद्योग खत्म होने के कगार पर है। दस्तकारों के यहां तो फाकों की नौबत है और दूसरी ओर देश और दुनिया मे कुल्लू शाल ओर हैंडलूम की कला की चर्चे है। लोग कुल्लू शाल की खूबरसूरती की तारीफ तो करते हैं, लेकिन बुनकरों की आर्थिक स्थिति पर किसी की नजर नहीं जाती।
शोध में सामने आया सच
किरण ठाकुर बताते हैं कि पाच महीने शोध किया तो बहुत ही दयनीय स्थिति सामने आई। पता चला कि हर साल लाखो की संख्या में टूरिस्ट आते है और कुल्लू हैंडलूम की करीब 100 करोड़ की खरीदारी करते हैं। आश्चर्य तब हुआ जब यह बात सामने आई कि कुल्लू हेंडलूम के नाम पर 80 प्रतिशत पॉवरलूम का माल बेचा जा रहा है। पॉवरलूम इतनी गहरी जड़े डाल चुका है कि कुल्लू का दस्तकार सिर्फ एक छोटी सी दुकान तक सिमट जाता है।
स्टार्टअप इंडिया से सीखी बरीकियां
किरण ठाकुर कहते हैं कि मुझे लगा कि क्यों न इस परम्परागत उद्योग को मॉडर्न तरीके से फैशन की तरह विकसित किया जाए और उन हुनरमंद हाथों को वो दर्जा दिया जाए, जिसके वो हकदार है और जो कला उन्हें विरासत में मिली है। फिर क्या था, दिल्ली से जॉब छोड़ दी और 6 महीने का स्टार्टअप इंडिया के तहत कोर्स किया, जिसमें बिजनेस की बारीकियों को सीखने का मौका मिला।
दोस्तों से शेयर की आइडिया
किरण ठाकुर कहते हैं कि कॉलेज के दिनों से ही सामाजिक कार्यों में रुचि थी और देव धरा युवा जागृति संगठन के सचिव के पद पर कार्य कर रहा था। दस्तकारों के जीवन को बेहतर बनाते हुए कारोबार के अपने आइडिया को अपने कुछ दोस्तों से शेयर किया तो तीन दोस्त काम करने को तैयार हो गए। इस टीम ने पिछले एक साल में कुल्लू के उस हर दस्तकार तक पहुंचने की कोशिश है जो दस्तकारी के इस हुनर को अभी तक जिंदा रखे हुए है। एक साल के कड़ी मेहनत से हिमालयन क्राप्टस ने कुल्लू के दस्तकारों को उनका वाजिब दाम दिलवाना शुरू कर दिया। आज हिमालयन क्राफ्ट के उत्पाद सारी दुनिया में बिक रहे हैं।
तकनीक व इनोवेशन से हेंडलूम का चेहरा बदलने की हसरत
बुनाई की जादूगरी का हुनर जानने वाले हाथों को मजबूत करने के स्लोगन के साथ ये युवा उद्यमी अगले दो साल में कुल्लू के ही कारीगर तक पहुंच बनाकर नई तकनीक व इनोवेशन से कुल्लू हेंडलूम के उद्योग को नया मुकाम दिलाएंगे। किरण ठाकुर कहते हैं कि गुणवता उनके प्रोडक्ट्स की सबसे बड़ी ताकत है। यही कारण है कि उनके उत्पादों को लेकर दुनिया भर में जबरदस्त क्रेज है।

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