हिमाचल प्रदेश के ऐसे वैद्य, जिनकी याद में सरकार ने बनाया है भवन, चंगर की जनता की नब्ज पर गहरी पकड़ रखने वाले वैद्य श्री तिहडू राम के जीवन की पे्ररककथा

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हिमाचल प्रदेश के ऐसे वैद्य, जिनकी याद में सरकार ने बनाया है भवन, चंगर की जनता की नब्ज पर गहरी पकड़ रखने वाले वैद्य श्री तिहडू राम के जीवन की पे्ररककथा

बाबा बडा़ेह से उमाकांत डोगरा की रिपोर्ट
यह वह दौर था, जब चंगर में न यातायात की कोई व्यवस्था थी और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं आज जैसी थीं। संकरे- जंगली रास्तों से मीलों पैदल चल कर एक- दूसरे गांव में पहुचना होता था। उस दौर में नगरोटा बगवां के बाबा बड़ोह के वैद्य श्री तिहडू राम जहां एक तरफ चंगर के लोगों का जड़ी- बूटियों से उपचार कर उन्हें निरोग रखने की अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे, वहीं अपने क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए एक एक्टिविस्ट की तरह संघर्षरत भी थे। उन्हें रामबाण औषधियों की पहचान इतनी थी कि कभी कोई रोगी निराश नहीं लौटा तो रूतबा ऐसा था कि चंगर में किसी की मजाल नहीं थी कि उनकी बात को मोड़ सके। जिंदगी की ढलान पर पहुंचने के बावजूद स्थानीय लोगों पर उनका प्रभाव कम नहीं हुआ, बल्कि चंगर के लिए उनके योगदान को देखते हुए लोग उन्हें विशेष सम्मान देते थे। यही कारण था कि स्थानीय जनता की जोरदार मांग पर तत्कालीन मंत्री एवं कांगेेस नेता जीएस बाली ने वैद्य श्री तिहडू राम की याद में बाबा बड़ोह में ओबीसी भवन का निर्माण करवाया, ताकि यहां की नई पीढ़ी उनके जीवन से सीख ले सके।
दूर- दूर तक था नाम
वैद्य तिहडू राम का जन्म 1918 मे हुआ। उन्होंने जड़ी- बूटियों की पहचान करना और उनके उपयोग से बिमारियों को ठीक करने करने की विद्या किशोरावस्था में ही हासिल कर ली। चंगर के बुजुर्ग लोग बताते हैं कि यहां से पैदल चलकर वैद्य जी आदि हिमानी चामुंडा की पहाडिय़ों से दिव्य जड़ी- बूटियां एकत्रित करके उनसे आयुर्वेदिक दवाईयां बनाते थे। उनकी बनाई दवाईयां इतनी चमत्कारी थीं कि बड़ी बड़ी दूर से रोगी उपचार के उनके घर आते थे और बिल्कुल स्वस्थ होकर घर वापिस जाते थे। वे भी दूर- दूर तक रोगियों के उपचार के लिए जाया करते थे।
चंगर के विकास के मील पत्थर
वैद्य श्री तिहडू राम की पहचान जहां पारम्परिक चिकित्सा के क्षेत्र में थी, वहीं समाज सुधारक के तौर पर भी वे लोगों के दिलों में घर कर चुके थे। बड़ोह में तहसील खुलवाने में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।
बड़ोह के डाकघर को अपग्रेड करने की बात हो अथवा बाथू पुल को बनवाने की जिद, वैद्य श्री तिहडू राम के प्रयासों का ही फल था। बाथू पुल के निर्माण के लिए उन्होंने खुद भी श्रमदान किया और लोगों को भी प्रेरित किया।
फल – सब्जियों का कारोबार
वैद्य श्री तिहडू राम के व्यक्तित्व का एक पहलू यह भी है कि उनकी रसोई में कभी बाजार से खरीदी हुई सब्जी नहीं पकाई गई। वह अपने ही खेतों में खूब सब्जियां उगाते थे। उनका एक बड़ा बगीचा भी था, जिसमें हर तरह के फलदार पौधे लगाए थे। यहां कई औषधीय पौधे भी लगे होते थे। वे सब्जियां और फल को बेच कर जीवन यापन करते थे।
लोकप्रियता की वजह न्यायप्रियता
वैद्य श्री तिहडू राम की लोकप्रियता इसलिए भी थी कि वह एक न्यायप्रिय व्यक्ति थे। न्यायप्रिय इतने कि अगर किसी मामले में कसूरवार अपने घर का सदस्य कोई भी है तो भी उसे दंड देने में कोई कोताही नहीं बरतते थे।
फौजदारी अथवा अन्य मामलों को सुलझाने के लिए दूर- दूर से लोग उन्हें न्याय करने के लिए बुलाते थे। उनके किए फैसले पत्थर की लकीर हुआ करते थे, जो सबको स्वीकार्य होते थे।
वैद्य के साथ ही विलुप्त हुई परम्परागत चिकित्सीय परम्परा
चंगर के लोगों के लिए प्रेरक रहे वैद्य श्री तिहडू राम साल 1999 में स्वर्ग सिधार गए। आज भी यहां केे लोगों में उनके प्रति गहरी श्रद्वा है। इस महान व्यक्ति के कार्यों को देखते हुए लोगों के आग्रह करने पर सरकार ने ओबीसी भवन का निर्माण भी करवाया है, लेकिन दुखद पहलू यह है कि उनके साथ ही एक महान परम्परागत चिकित्सा परम्परा भी खत्म हो गई। किसी ने भी उनकी इस कला को सीख कर आगे नहीं बढ़ाया।


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