हठ योग : 26 साल की उम्र में देखा शिव मंदिर बनाने का सपना, 38 साल अकेले काम कर 64 साल की उम्र में बना दिया भव्य मंदिर चायल की एक पहाड़ी पर बने भव्य कुंभ शिव मंदिर के निर्माण के पीछे सत्य भूषण के संकल्प की प्रेरककथा

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हठ योग : 26 साल की उम्र में देखा शिव मंदिर बनाने का सपना, 38 साल अकेले काम कर 64 साल की उम्र में बना दिया भव्य मंदिर
चायल की एक पहाड़ी पर बने भव्य कुंभ शिव मंदिर के निर्माण के पीछे सत्य भूषण के संकल्प की प्रेरककथा
चायल से रत्न चंद निर्झर की रिपोर्ट
सोलन जिला के मशहूर पर्यटक स्थल चायल के कुंभ शिव मंदिर का निर्माण हठ योग की पराकाष्ठा का सबसे नया उदाहरण है। 26 साल की उम्र में एक युवक ने शिव मंदिर बनाने का सपना देखा। मंदिर निर्माण की ऐसी धुन सवार हुई कि 38 साल अकेले काम कर 64 साल की उम्र में भव्य मंदिर का निर्माण कर डाला। संकल्प लेने और उसे पूरा करने की इस प्रेरककथा के नायक हैं चायल के सत्य भूषण। मंदिर निर्माण को अपने जीवन का मकसद बना लेने वाले सत्य भूषण ने साबित कर दिया कि जिद और जुनून हर लक्ष्य सांधा जा सकता है।
सपने में देखा शिव मंदिर
स्थानीय निवासी सत्य भूषण ने वर्ष 1980 में एक शिव मंदिर को सपने में देखा। सपने के बाद ही शिव मंदिर के निर्माण के लिए ऐसी लग्र लगी कि 26 साल की उम्र में अपनी पैतृक जमीन पर मंदिर निर्माण में जुट गए और 38 साल में अकेले भव्य शिव मंदिर का निर्माण कर डाला। स्कूल के दिनों से मिट्टी की मूर्तियां बनाने और लकड़ी की नक्काशी करने का शौक था, इसी शौक ने उन्हें अपने सपनों में रंग भरने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। 64 साल की उम्र में भी सत्य भूषण अपने सपनों के मंदिर को सजाने में जुटे हैं।
सीमेंट और धातु के तारों से बना मंदिर
सत्य भूषण कहते हैं कि उन्होंने वर्ष 1980 में मंदिर की संरचना का निर्माण शुरू किया था। पूरी तरह से सीमेंट और धातु के तारों से बना होने के कारण मंदिर रंगहीन है। मंदिर में बनी शिव की प्रतिमा, शिव के गले में लिपटा सांपा, मंदिर को सजाने वाले गेंदे के फूल, सब कुछ ग्रे सीमेंट से बना है। इस खूबसूरत ममंदिर में एक भूमिगत गुफा भी है। यह मंदिर निर्माण कला का बेहतरीन नमूना है।
मंदिर के निर्माण पर 15 लाख लागत
सत्य भूषण कहते हैं कि जब उन्होंने अस्सी के दशक में मंदिर निर्माण का कार्य शरू किया तो केवल स्थानीय लोगों को इसके बारे में पता था। वे कहते हैं कि अब तक इस मंदिर के निर्माण पर 15 साल रूपए की राशि खर्च हो चुकी है। स्थानीय लोगों और शिव के भक्तों ने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक मदद की है । सत्य भूषण यहां एक छोटे पैतृक खेत से अपना जीवन यापन करते हैं, जहां वे फल और सब्जियां उगाते हैं। आज भी हर रोज वह चार से छह घंटे मंदिर के काम में जुटे रहते हैं। नई मूर्तियां स्थापित करने और मंदिर की सजावट की योजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने मंदिर के निर्माण के लिए कभी सरकार से मदद नहीं मांगी है।
दिल को मिलता है सकून
सत्य भूषण कहते हैं कि अब देश विदेश से यहां आने वाले सैलानी मंदिर में आते हैं। वे कहते हैं कि मंदिर से बाहर निकलने लोगों के चेहरों पर आती मुस्कान देख दिल को बहुत खुशी मिलती है। मेरे लिए यह क्या कम है कि जो लोग यहां आते हैं, मेरे काम की तारीफ करते हैं। मुझे खुशी है कि मैंने एक सपना देखा और उस सपने ने मुझे मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया। आपके काम की कोई सराना करे तो आपको जो सकून मिलता है, आप उसे शब्दों में नहीं बांध सकते हैं।

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