स्कूल में पढने के लिए जाना पड़ता था रोज आठ किलोमीटर पैदल, संधोल की डॉ. माधुरी ठाकुर के नाम का अब अमेरिका में बज रहा डंका, मर्सिडीज-बेंज के लिए नेक्स्ट जेनरेशन की लिथियम आयन बैटरी विकसित करने में जुटी

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स्कूल में पढने के लिए जाना पड़ता था रोज आठ किलोमीटर पैदल, संधोल की डॉ. माधुरी ठाकुर के नाम का अब अमेरिका में बज रहा डंका, मर्सिडीज-बेंज के लिए नेक्स्ट जेनरेशन की लिथियम आयन बैटरी विकसित करने में जुटी
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
जो ग्रासरूट पर जानते हैं उन्हें पता है कि मंडी जिला का संधोल क्षेत्र कमोबेश आज भी विकास की मुख्यधारा से पीछे है, बावजूद इसके इस क्षेत्र की प्रतिभाओं ने विभिन्न क्षेत्रों अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज की इस प्रेरककथा की जिस नायिका को सरकारी स्कूल में अपनी स्कूली पढ़ाई के लिए रोज आठ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था, आज उसके नाम की गूँज अमेरिका में सुनाई दे रही है। संधोल क्षेत्र के छोटे से गांव कोठुआं के एक शिक्षक दम्पति की बेटी डॉ. माधुरी ठाकुर का चयन ‘4.1 मिलियन डॉलर के ‘यूएसएबीसी लो लागत, फास्ट चार्ज प्रोग्राम 2921’ के लिए हुआ है, जिसके अंतर्गत वे इलेक्ट्रिक कार के इंजन को जल्द चार्ज करने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन के लिए कम लागत वाली फास्ट चार्ज तकनीक विकसित करेंगी। यह पहला मौक़ा नहीं हैं जब डॉ. माधुरी ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया हो, इससे पहले साल 2017 में उच्च-ऊर्जा-घनत्व, लिथियम-आयन (ली-आयन) सेल प्रौद्योगिकी के विकास के लिए उनका चयन 6 मिलियन डॉलर के ‘यूएसएबीसी-ईवी प्रोजेक्ट’ के लिए हुआ था। इस परियोजना में उन्होंने 330Wh / Kg की उच्च ऊर्जा घनत्व वाली बैटरी विकसित करने के लिए टीम का नेतृत्व किया था।
गांव के स्कूल से आईआईटी दिल्ली तक के सफर में स्कालरशिप
कोठुआं के एक शिक्षक सेवानिवृत दम्पति भगत राम और रामप्यारी देवी की बेटी की मिडल तक की शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई और उसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संधोल से आगे की पढ़ाई की। जीसीजी चंडीगढ़ से गोल्ड मैडल के साथ बीएससी करने के के पाद पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से भौतिकी में एमएससी करने के बाद नेशनल इंस्टीच्यूट कुरुक्षेत्र से एमटेक और आईआईटी दिल्ली से इंस्ट्रूमेंटेशन में पीएचडी की। इस दौरान उन्होंने जर्मनी में अपना पेपर प्रस्तुत किया। स्कूल के दिनों से ही मैरिट में रहने वाली माधुरी को उनकी सारी शिक्षा के लिए स्कालरशिप मिली। अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके 13 शोधपत्र प्रकाशित हुए और 20 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोधपत्र प्रस्तुत किए गए हैं।
नोबेल विजेता प्रोफ़ेसर बर्ट कर्ल के साथ काम करने का अवसर
उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद डॉ. माधुरी ठाकुर ने शैक्षणिक दुनिया से जुड़ने के लिए रेजिडेंट एसिस्टेंट के तौर सिंगापुर युनिवर्सिटी को ज्वाइन किया। बाद में माधुरी अपने पति और बेटे के साथ अमेरिका चली गई और टेक्सास स्थित राइस युनिवार्सिटी में लिथियम आयन बैटरी पर शोध करने वाली टीम में शामिल हुईं। डॉ. माधुरी ठाकुर ने राइस यूनिवर्सिटी में कार्बन नैनो ट्यूब के खोजकर्ता नोबेल विजेता प्रोफ़ेसर बर्ट कर्ल के साथ काम किया। अपने बेटे की शिक्षा के लिए डॉ. माधुरी ठाकुर टेक्सास से कैलिफोर्निया चली गई और कॉर्पोरेट जगत में शामिल हो गईं। फरासिस एनर्जी यूएसए की निदेशक सेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. माधुरी ठाकुर मर्सिडीज-बेंज के लिए अगली पीढ़ी की लिथियम आयन बैटरी विकसित करने में जुटी हैं।

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