सोशल इंटरप्रिन्योरशिप : चंद्रा ढाबे वाले चाचा- चाची : केयरिंग भी, डेयरिंग भी, गाडफ्रे फिलिप्स इंडिया वीरता पुरस्कार से सम्मािनत दंपति के साहस व दिलेरी के किस्सों के कायल दुनिया भर के ट्रैकर

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सोशल इंटरप्रिन्योरशिप : चंद्रा ढाबे वाले चाचा- चाची : केयरिंग भी, डेयरिंग भी, गाडफ्रे फिलिप्स इंडिया वीरता पुरस्कार से सम्मािनत दंपति के साहस व दिलेरी के किस्सों के कायल दुनिया भर के ट्रैकर

चंद्रताल से फोकस हिमाचल ब्यूरो की रिपोर्ट

चंद्रा ढाबे वाले चाचा- चाची जितने केयरिंग हैं, उतने ही डेयरिंग भी हैं। वे कबायली क्षेत्र लाहौल के बड़ा शिगरी इलाके में न केवल ट्रैकरों को खाने- ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाते हैं, बल्कि मुसीबत पडऩे में सुनसान इलाके में सबसे बड़े मददगार साबित होते हैं। उनके अदम्य साहस और दिलेरी के किस्से दुनिया भर में मशहूर हैं और इसके लिए उन्हें वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। खूबसूरत चंद्रताल झील के समीप कुंजम दर्रे की तलहटी में चंद्रा नदी के किनारे बातल नामक स्थान पर पिछले 43 सालों से चंद्रा ढाबा चला रहा यह दंपति से इंटरनेशनल फेम है। दोरजे और हिशे हजारों ट्रेकरों की जान बचाने के लिए फरिशते साबित हुए हैं।

हजारों ट्रैकरों के भगवान से कम नहीं यह जुझारू दंपति
मूल रूप से मनाली के क्लाथ निवासी यह दंपति रोहतांग पास खुलते ही बातल पहुंच जाता है। दोरजे और हिशे बताते हैं कि बताल से पचास किलोमीटर के दायरे में न कोई फोन सिग्नल नहीं है। जब भी कोई ट्रेकर या पर्यटक इस क्षेत्र में फंस जाता है तो वह इसी स्थान की और आने की कोशिश करता है। कुछ पर्यटक ट्रेकर तो यहां अपना सारा शेडयूल बता कर ट्रेकिंग पर जाते हैं, ताकि जरूरत पडऩेे पर रेस्क्यू किया जा सके। ऐसे सैंकड़ों प्रसंग हैं और हजारों पर्यटक व टूरिस्ट हैं जिनकी जान इस दंपति की हिम्मत, दिलेरी और सूझबूझ से बची है और उन्हें नई जिंदगी मिली है।

मौत के मुंह से जिंदगी छीन लाने के हुनर में माहिर जोड़ा
बड़ा शिगरी ग्लेशियर के इलाके में बातल में यही एक खोकानुमा ढाबा है, जहां पर्यटकों को खाने और रहने की सुविधा मिल सकती है। दोरजे और हिशे बताते हैं कि सन 1998 में सितंबर माह हुई अचानक भारी बर्फबारी के चलते 37 विदेशियों सहित यहां 106 पर्यटक फंस गए थे। सारी रात ढाबे के अंदर पर्यटकों को स्टोव की तपिस से ठंड से बचाए रखा। सन 2010 में हुई बर्फबारी में 45 पर्यटक आठ दिन तक यहां फंसे रहे, तब भी यही दंपति उनके जीवन की आस बना था। इसी दंपति ने प्रसाशन और शासन को को सूचना दी और हेलीकाप्टर से रेस्क्यू किया जा सका।

इस दंपति का थैंक्स करने आते हैं इंटरनेशनल ट्रैकर्स
यहां आने वाले ट्रैकरों की सुरक्षा को देखते हुए दोरजे दंपति को बीएसएनएल की ओर से एक सेटेलाइट फ़ोन उपलब्ध करवाया था। यह फोन कई बार रेस्क्यू में वरदान साबित हुआ। लेकिन अब यह सेटालाइट फोन वापिस बीएसएनएल ने उनसे वापिस ले लिया है। प्राकृतिक आपदाओं से दो- चार हो चुके विदेशी ट्रैकर जब भी दोबारा यहां आते हैं, चाचा- चाची के आतिथ्य का थैंक्स करना नहीं भूलते हैं। चकाचौंध से दूर कबायली क्षेत्र में सोशल इंटरप्रिन्योर की अनूठी गाथा लिखने वाले इस साहसी दंपति के हैीतअंगेज कारनामों को हम सलाम करते हैं। अतिथि देवो भव्।

गाडफ्रे फिलिप्स इंडिया का साहस को सलाम
दोरजे दंपति के साहस को सलाम करते हुए गाडफ्रे फिलिप्स इंडिया के अध्यक्ष के मोदी ने उन्हें गाडफ्रे फिलिप्स इंडिया वीरता पुरस्कार से समानित किया है। उन्हें पर्ल इंडिया ने भी सम्मानित किया है। दोरजे और हिशे को दुनिया भर के ट्रेकर चाचा- चाची के नाम से जानते हैं। जब भी कोई ट्रैकर यहां दोबारा आता है, चाचा- चाची का थैंक्स करना नहीं भूलता। अब उनका बेटा तेनजिन जो गाइड का काम भी करता है, अब ढाबे के काम में उनका सहयोग करता है।


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