सिनेमा में शिमला – दो ‘मिस शिमला’ के अभिनय से सजी हिंदी सिनेमा की इकलौती सुपर डुपर हिट फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’

Spread the love

सिनेमा में शिमला – दो ‘मिस शिमला’ के अभिनय से सजी हिंदी सिनेमा की इकलौती सुपर डुपर हिट फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’
विनोद भावुक की रिपोर्ट
हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी फिल्म दर्ज है, जिसमें मिस शिमला के खिताब पर कब्जा करने वाली दो सुंदरियों ने अपने हुस्न और हुनर से फिल्म को सुपर डुपर हिट कर दिया। नवनिकेतन के बैनर तले 1954 में रिलीज हुई निर्माता निर्देशक चेतन आनंद की फिल्म टैक्सी ड्राइवर में कल्पना कार्तिक और शीला रमानी की मुख्य भूमिकाएं थीं।
कल्पना कातिक जिनका फिल्मों में आने से पहले का नाम मोना सिंहा था, उन्होंने साल 1950 में मिस शिमला के ताज पर कब्जा किया था, वहीं अगले ही साल शीला रमानी ने मिस शिमला का खिताब अपने नाम किया था। उस दौर में यह जबरदस्त हिट फिल्म थी और इसके संगीत के लिए संगीतकार सचिन बर्मन को फिल्म फेयर बेस्ट म्यूजिक आवार्ड से सम्मानित किया गया था।
लाहौर से शिमला
लाहौर में एक पंजाबी ईसाई परिवार में पैदा हुई कल्पना कार्तिक पहले मोना सिंहा थीं। उनके पिता गुरदासपुर जिले के बटाला में तहसीलदार थे। मोना पांच भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटी थीं। विभाजन के बाद परिवार शिमला आ गया था। मोना ने यहां सेंट बीड्स कॉलेज सें पढ़ाई की। मोना ने साल 1950 में मिस शिमला के ताज के लिए चुनाव लड़ा और विजेता बनीं। उन दिनों मिस शिमला पेजेंट को सेसिल होटल में आयोजित किया गया था। फिल्म निर्माता चेतन आनंद ने अपनी नवोदित फिल्म कंपनी ‘नवकेतन फिल्म्स’ से जुडऩे के लिए उन्हें राजी कर लिया और कल्पना कार्तिक के रूप में मायानगरी में इंट्रोड्यूय किया। पहली ही फिल्म ‘बाज़ी’ हिट रही। इसके बाद सुपर- डुपर फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ में कल्पना ने माला की मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान देव आनंद के साथ उन्होंने चुपके से शादी कर ली। फिल्म ‘नौ दो ग्याराह’ के बाद उन्होंने अपने परिवार के लिए अपने फिल्मी करियर का त्याग कर दिया।
सिंध से शिमला
फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर’ में क्लब डांसर सिल्वी की अभिनय शैली और कामुकता ने दर्शकों को सिनेमा हॉल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। सिल्वी की भूमिका शीला रमानी ने निभाई थी। सिंध में जन्मी शीला ने साल 1948 में मिस मसूरी का खिताब हासिल किया और साल 1951 में मिस शिमला का ताज पहना। शीला रमानी भारत की पहली सिंधी फिल्म ‘अबाना’ की स्टार थीं। शीला रमानी ने 1952 में ‘आनंद मठ’ से अपने हिंदी फिल्म करियर की शुरूआत की। सात साल के अपने फिल्म करियर में उन्होंने साल1959 तक 23 फिल्में दे कर एक स्टार के रूप में पहचान बनाई। उनके जीवन के आखिरी दिन मध्यप्रदेश के माहू में गुमनामी व आर्थिक तंगी में गुजरे और 15 जुलाई, 2015 को निधन हो गया।
देव आनंद का धर्मशाला कनेक्शन
‘टैक्सी ड्राइवर’ में मुंबई के टैक्सी ड्राइवर की भूमिका सदाबहार अभिनेता देव आनंद ने निभाई थी। देव आनंद एक साल केे छोटे से समाय के लिए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर में रहे थे। उनकी मां तपेदिक की मरीज थीं, जिनका उपचार कांगड़ा के टांडा में स्थित टीबी सेंटोरियम में चल रहा था, इस कारण वर्ष 1938- -39 तक वह गवर्नमेंट कॉलेज, धर्मशाला के स्टूडेंट रहे थे।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *