सिखनी’ – बाइक दौडाती है प्रेराग्लाइडर उड़ाती है, युनिवर्सिटी टॉपर रहीं यह लेक्चरर, धर्मशाला की गगनदीप कामयाब होने के बजाये काबिल बनकर पेश कर रहीं मिसाल

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सिखनी’ – बाइक दौडाती है प्रेराग्लाइडर उड़ाती है, युनिवर्सिटी टॉपर रहीं यह लेक्चरर, धर्मशाला की गगनदीप कामयाब होने के बजाये काबिल बनकर पेश कर रहीं मिसाल
धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
महज 23 साल की उम्र में देश पर कुर्बान हो जाने वाले भारत की आजादी के महानायक भगत सिंह कहा करते थे, ‘जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो जनाजे उठा करते हैं।’ शहीद सरदार भगत सिंह के इस कोट्स के साथ ही एक ‘सिखनी’ की प्रतिभा, साहस, कला और दर्शन की प्रेरककथा को लेकर आपके सामने हैं, जिसके हीरो शहीद सरदार भगत सिंह हैं। घर की सबसे छोटी बेटी ‘गुड्डू’ के नाम से पुकारी जाने वाली गगनदीप ने कामयाब होने के बजाये काबिल बन कर वह मुकाम हासिल किया है, कैरियर के चक्कर में जहां बिरले ही पहुंच पाते हैं।
उम्र को मात, कला में कमाल
धर्मशाला शहर के नजदीकी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चड़ी में राजनीति शास्त्र की प्रवक्ता गगनदीप बहुआयामी प्रतिभा की धनी हैं। एक अनुशासित एवं इनोवेटिव टीचर 47 साल की उम्र में एक बाइक राइडर तथा प्रेराग्लाइडर के तौर पर साहस व रोमांच के शौकीनोंं की आइडल बन चुकी हैं। हालांकि उन्होंने किसी संस्थान से किसी कला की कोई पढ़ाई नहीं की है, बावजूद इसके स्कैचिंग, डांसिंग, माउथ ऑरगेन प्लेइंग तथा तबला वादन में उन्हें कमाल की महारत हासिल की है। वें हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के लिए एक विशेषज्ञ केे तौर पर पुस्तक लेखन कर साहित्य लेखन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा चुकी हैं।
किस्मत को नहीं कोसा, मेहनत पर किया भरोसा
गगनदीप का सपना सेना की वदी पहनने का था। अनुशासनप्रिय लम्बे कद की इस लडक़ी ने इसके लिए शारीरिक व मानसिक रूप से खुद को तैयार किया। सेना में अफसर बनने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था। प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए एचएएस की लिखित परीक्षा पास की तो वहां भी साक्षात्कार में बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने कॉलेज लेक्चरर की लिखित परीक्षा भी उतीर्ण की, लेकिन यहां भी मुकद्दर दगा दे गया। असफलतों से हतोत्साहित होने के बजाये एमए करने के तुरंत बाद यूजीसी नेट पास कर गगनदीप ने धर्मशाला कॉलेज में पीरियड़ बेस पर पढ़ाना शुरू कर दिया। कुछ समय सीनियर सेकेंडरी स्कूली रानीताल में कांटे्रेक्ट बेस पर पढ़ाया। वर्ष 2000 में स्कूल कैडर लेक्चरर के तौर पर नियुक्ति हो गईं।
पढऩे में टॉपर, ग्राउंड में बेस्ट
मूलत: जम्मू के रामबण क्षेत्र से संबंध रखने वाले हरपाल सिंह अपने सेवाकाल में धर्मशाला में बस गए। गगनदीप की स्कूली पढ़ाई नर्सरी मॉडल स्कूल व गल्र्ज स्कूल धर्मशाला से हुई। स्कूल के दिनों में वे वॉलीबाल में जिला स्तर पर बेस्ट प्लेयर रहीं। वे दसवीं की बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की टॉप 100 में शामिल थीं। धर्माशाला कॉलेज से राजनीति शास्त्र ऑनर्स में लगातार तीन साल टॉप करने का रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मैडल के साथ बीए किया।कॉलेज के दिनों में उन्होंने सीनियर नेशनल खेला। रिजनल सेंटर धर्मशाला से एमए राजनीति शास्त्र में भी वे प्रदेश युनिवर्सिटी की टॉपर रही हैंं। उन्हें प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्कॉलरशिप भी मिली। वे धर्मशाला कॉलेज की एनएसएस यूनिट की अध्यक्ष रही हैं। धर्मशाला स्थित गूंजन संस्था की नशे के खिलाफ मुहिम मेंं यूथ आइकन के चर्चित रहीं हैं।
जिद्दी और जुनूनी चलबुली लडक़ी
‘महान वैज्ञानिक एवं राष्ट्रपति रहे अबदुल कलाम ने कहा है, ‘अगर आप अपने काम को सलाम करते हैं तो फिर किसी को सलाम करने की जरूरत नहीं हैं।’ कलाम को अपना आदर्श मानने वाली इस चुलवुली लडक़ी का कहना है कि मैं सच में बहुत लक्की हुूं, मेरी हर जिद पूरी होती है। माता- पिता से ज्यादा मेरे भाई ने मुझे बहन से ज्यादा अपने बच्चे की तरह पाला है और हमेशा मुझे आगे रखा। ऐसा भाई हर घर में हो तो हर बहन अपनी प्रतिभा व हुनर से ऊंची उड़ान भर सकती है। गगनदीप का मानना है कि अगर लड़कियों को बराबर के अवसर मिलेें और परिवारों में उनसे भेदभाव न हो तो वे लडक़ों से दो कदम आगे रहती हैं।
सोचने की सोचने की फुर्सत कहां है
उद्यान विभाग से सेवानिवृत उपनिदेशक हरपाल सिंह अपनी कॉलेज की पढ़ाई के दिनों में खालसा कॉलेज के स्टार रहे हैं। उन्होंने एनसीसी में कनाड़ा में भारत का प्रतिनिधित्व किया है । दो बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में आयोजित परेड को लीड किया है। उनकी पत्नी तनजीत कौर भी अपने जमाने में बड़े कद की खिलाड़ी रही हैं। इस दंपति की तीन संतानों में से बड़े नाज नखरों और लाड़ प्यार के साथ पली सबसे छोटी बेटी है गगनदीप। गगनदीप के बड़े भाई गुरमीत सिंह पंजाब एवं सिंध बैंक पठानकोट में मुख्य प्रबंधक हैं। उनकी बड़ी बहन सरनजीत कौर एक सैन्य अधिकारी की पत्नी एवं शिक्षिका हैं। जिंदगी की ढलान पर अपने माता- पिता के साथ रह कर घर की तमाम जिम्मदारी संभालते हुए अपने शौक को जिंदा रख जिंदादिली से जीने वाली गगनदीप का शादी के सवाल पर कहना है कि इस बारे में सोचने की फुर्सत कहां है।

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