साक्षात्कार – कोरोनाकाल में लगातार 600 फेसबुक लाइव कर बनाया रिकॉर्ड पर साहित्य सम्मान देने में अकादमी की रफ़्तार धीमी

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साक्षात्कार – कोरोनाकाल में लगातार 600 फेसबुक लाइव कर बनाया रिकॉर्ड पर साहित्य सम्मान देने में अकादमी की रफ़्तार धीमी
शिमला से विनोद भावुक की रिपोर्ट
कोरोना काल में हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी, शिमला ने आपदा में अवसर ढूंढ कर फेसबुक पर लाइव कार्यक्रम की ऐसी अनूठी पहल की जिससे न केवल प्रदेश के लेखकों, कलाकारों का डॉक्युमेंटेशन संभव हुआ, बल्कि उनको अपनी रचनाओं का पाठ करने के लिए मंच भी मिला। यह लाइव अब तक भी लगातार चल रहा है। अब तक लगभग 600 कार्यकम लाइव प्रसारित किए जा चुके हैं, जिनमें साहित्य कला के अतिरिक्त राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर भी परिचर्चा की गई है। सोशल मीडिया पर जहां अकादमी की परफोर्मेंस शानदार रही है, वहीं साहित्कारों को पुरस्कार देने की स्पीड कमोवेश धीमी है। अब तक केवल 2017 तक के साहित्य पुरस्कार घोषित हुए हैं, जबकि 2018 के पुरस्कारों की प्रक्रिया अभी तक चल रही है और 2019- 20 के पुरस्कारों के लिए पुस्तकें विचारार्थ मंगवाई गई हैं। 2018 तक के कला सम्मान घोषित किए जा चुके हैं और 2019 के पुरस्कार पर विचार किया जा रहा है। सम्मान प्रदान करने के लिए होने वाला सम्मान समारोह जिसकी अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष (मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश) करते हैं, अभी तक आयोजित होना बाकी है। इन तमाम सवालों को लेकर फोकस हिमाचल ने हिमाचल प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी, शिमला के सचिव डॉ. कर्म सिंह से विस्तृत बातचीत की।
फोकस हिमाचल – आप विगत 4 वर्षों से अकादमी में बतौर सचिव कार्य कर रहे हैं, आपकी प्राथमिकताएं क्या रही?
डॉ. कर्म सिंह – पिछले चार सालों से हिमाचल कला स्थिति भाषा अकादमी के सचिव के नाते अकादमी के संविधान और सरकार द्वारा स्वीकृत नियमों के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं पर कार्य करते हुए प्रदेश की कला संस्कृति भाषा और साहित्य के संरक्षण पर लेखन और प्रकाशन को प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया है।
फोकस हिमाचल – इन 4 वर्षों में लगभग 2 वर्ष का पीरियड कोरोना का रहा। कोरोना काल में अकादमी की कारगुजारी कैसी रही?
डॉ. कर्म सिंह – कोरोना के आरंभ होने पर मई 2020 से लगातार hp lac academy facebook लाइव पेज और साहित्य कला संवाद youtube लाइव कार्यक्रम हर रोज शाम 7:00 बजे लाइव प्रसारित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोरोना काल में अकादमी ने पुस्तकों का भी प्रकाशन पुस्तक थोक खरीद की गई। साहित्य पुरस्कारों की घोषणा हुई और साहित्यिक कार्यक्रम भी निरंतर आयोजित किए जाते रहे हैं।
फोकस हिमाचल – फेसबुक पर लाइव कार्यक्रम की प्रेरणा आपको कहां से मिली। इस कार्यक्रम की सफलता को आप किस तरह से आंकते हैं?
डॉ. कर्म सिंह – कोरोना काल के प्रथम चरण में लोग बहुत तनाव से गुजर रहे थे और सरकार द्वारा समय समय पर निर्देश जारी किए जा रहे थे। साहित्य कला के क्षेत्र में सभी तरह की गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो गई थीं। कुछ समय तक तो समझ नहीं आया कि क्या किया जाए लेकिन उसके बाद कुछ मित्रजनों से विचार- विमर्श के बाद यह तय किया गया कि क्यो न कोरोना काल में facebook पर लाइव कार्यक्रम किया जाए, जिससे प्रदेश के लेखकों, कलाकारों का डॉक्युमेंटेशन भी हो पाएगा और जो लोग अपने विचारों को सांझा करना चाहते हैं, उनको भी अपनी रचनाओं का पाठ करने के लिए मंच मिल पाएगा। यह सोचकर हमने हर रोज लाइव का कार्यक्रम शुरू किया जो अब तक भी लगातार चल रहा है। अकादमी के लिए बहुत प्रसन्नता और गौरव की बात है कि अब तक लगभग 600 कार्यकम लाइव प्रसारित किए जा चुके हैं इनमें साहित्य कला के अतिरिक्त राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर भी परिचर्चा सांस्कृतिक कार्यक्रम, साक्षात्कार और कोरोना तथा नशाखोरी आदि की रोकथाम के लिए भी इस मंच का उपयोग किया गया है। बच्चों , युवाओं और महिलाओं के लिए भी कुछ सफल कार्यक्रम किए गए। अकादमी के जयंती समारोह और स्मृति दिवस भी आयोजित किए गए।
फोकस हिमाचल – अकादमी कला साहित्य भाषा आदि विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करती है इन विषयों का संतुलन किस तरह से बना पाते हैं?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा हिमाचल की पारंपरिक और समकालीन भाषा कला संस्कृति और साहित्य के प्रोत्साहन और सम्मान के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। अकादमी हिंदी संस्कृत अंग्रेजी उर्दू और पहाड़ी इन पांच भाषाओं में प्रकाशन और साहित्य तथा कला से संबंधित कार्यक्रम संचालित करती है। सभी विधाओं में बराबर कार्य करने का प्रयास रहता है। हां सभी कलाकारों और साहित्यकारों को बराबर मौका मिल सके इस बात का खास ख्याल रखा जाता है।
फोकस हिमाचल – क्या अकादमी ने इन वर्षों में कोई नई योजना शुरू की है?
डॉ. कर्म सिंह – इन वर्षों में अकादमी ने भाषा और साहित्य को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं को प्रकाशन के लिए अनुदान प्रदान करने की योजना प्रारंभ की है। पहाड़ी भाषा में पुस्तकों के प्रकाशन को प्राथमिकता दी है। सांस्कृतिक संस्थाओं और शिक्षण संस्थानों को पारंपरिक वाद्ययंत्र खरीदने के लिए भी अनुदान देने की योजना आरंभ की गई है। संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ किया है। सांस्कृतिक प्रलेखन में काफी तेजी से काम हुआ। सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करते हुए भी कुछ कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। राज्य संग्रहालय शिमला और हिमाचल अकादमी के पुस्तकालय का डिजीटाइजेशन किया गया है। अब ये पुस्तकें इंटरनेट पर भी पाठकों को उपलब्ध हो सकेंगी। अकादमी की पुस्तकों का विक्रय भी इस माध्यम से किए जाने का प्रयास रहेगा।
फोकस हिमाचल – अकादमी पदस्थ होने के नाते आपको 4 वर्षों तक कार्य करने का मौका मिला है आप अन्य सचिवों के तुलना में अपने आप को कहां देखते हैं?
डॉ. कर्म सिंह – 1988 में अकादमी में आने के बाद विगत 32 वर्षों से मैंने अनुसंधान अधिकारी के तौर पर कला ,साहित्य ,संस्कृति ,प्रकाशन, पत्रिका, लेखन संपादन, कार्यक्रम आदि विभिन्न क्षेत्रों में काम किया है । इस अवधि में मुझे कई सचिवों के साथ काम करने तथा बहुत कुछ सीखने को मिला। मैंने अपने इस छोटे से कार्यकाल के दौरान पूर्व सचिवों द्वारा प्रारंभ किए गए कामों को आगे बढ़ाते हुए लेखकों साहित्यकारों के साथ मिलकर काम करने का प्रयास किया है।
फोकस हिमाचल – कुछ वर्ष पहले अकादमी में काफी कर्मचारी थे कुछ दूसरे विभागों में चले गए, कुछ सेवानिवृत्त हो गए। वर्तमान में अकादमी मैन पावर से जूझ रही है। ऐसे में काम किस तरह से चलाया जा रहा है ? क्या भविष्य में रिक्त पदों को भरने की कोई संभावना है?
डॉ. कर्म सिंह – विगत वर्षों में अकादमी के काफी पदस्थ सेवानिवृत्त हुए, कुछ पद रिक्त होने के कारण कार्य पर विपरीत प्रभाव तो पड़ा है । अभी हाल ही में अकादमी में रिक्त पदों को भरने की स्वीकृति प्राप्त हो गई है। कुछ पदस्थों को पदोन्नति प्रदान की गई है । भविष्य में रिक्त पदों को भर लेने के बाद अकादमी के कार्यों में और तेजी आएगी।
फोकस हिमाचल – अकादमी लेखकों के प्रोत्साहन सम्मान के लिए क्या कर रही है?
डॉ. कर्म सिंह – साहित्यिक आयोजन जिनमें सेमिनार, कार्यशाला, कवि सम्मेलन, संवाद फेसबुक लाइव, पत्रिकाओं और पुस्तकों का संपादन प्रकाशन, शोध परियोजना, अनुदान ,छात्रवृत्ति, संस्थानों को अनुदान, पुस्तक प्रकाशन, साहित्यकारों कलाकारों को मासिक सहायता आदि कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है, जिससे लेखकों को सीधा लाभ मिलता है और उन्हें अपनी रचनाओं को प्रकाशित करने में, अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए भरपूर मौका दिया जाता है तथा प्रोत्साहन और सम्मान भी मिलता है।
फोकस हिमाचल – कला के संरक्षण, प्रोत्साहन के लिए एकेडमी की क्या योजनाएं हैं?
डॉ. कर्म सिंह – कला प्रदर्शनी, कलाकृतियों खरीद, गुरु शिष्य परंपरा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन आदि ऐसी योजनाएं हैं जिनके माध्यम से कला को संरक्षण भी प्राप्त होता है और नई पीढ़ी को वरिष्ठ कलाकारों से बहुत कुछ सीखने को ही मिलता है।
फोकस हिमाचल – युवाओं और बच्चों को साहित्य कला संस्कृति के साथ जोड़ने के लिए अकादमी ने क्या प्रयास किए?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी ने इन वर्षों में बाल साहित्य पर विशेष बल दिया है। युवाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करने की पहल की है, जिससे नई पीढ़ी के बहुत सारे लेखक अकादमी के साथ जुड़े हैं और लेखन के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। अकादमी इस वर्ष बाल लेखकों का एक कहानी संग्रह और युवा रचनाकारों के कविता संग्रह प्रकाशित कर रही है।
फोकस हिमाचल – क्या अकादमी ने इन वर्षों में कोई नई पुरस्कार भी स्थापित किए हैं?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा इस वर्ष कला की क्षेत्र में विशेष योगदान करने के लिए एक पुरस्कार निष्पादन कला और ललित कला की क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए ₹25000 का एक प्रकार स्थापित किया गया है यह पुरस्कार इस वर्ष दिया जाएगा।
फोकस हिमाचल – साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर जिस तरह की चुनौतियां मिल रही हैं, उनसे निपटने के लिए अकादमी क्या योजनाएं बना रही है?
डॉ. कर्म सिंह – मीडिया की सक्रियता और ऑनलाइन कार्यक्रमों के चलन से जो कार्यक्रमों का आयोजन का पुराना तरीका था उसमें बहुत बदलाव आया है। अब ज्यादा समय गंवाए बिना घर बैठे ऑनलाइन कार्यक्रमों के आयोजन का दौर है और इसका अकादमी ने भरपूर फायदा खाने का प्रयास किया है । अकादमी का facebook लाइव का एक इस दिशा में बहुत सफल प्रयोग रहा है।
फोकस हिमाचल – एक साल से अधिक समय हो गया जब अकादमी हर रोज 1 घंटे का लाइव कार्यक्रम कर रही है इस कार्यक्रम के लिए समय निकालना, तैयारियां करना और हर रोज लाइव कार्यक्रम देना बहुत कठिन है। यह सब आप कैसे निभा रहे हैं?
डॉ. कर्म सिंह – पूरा दिन ऑफिस में काम करने के बाद शाम को हर रोज लाइव प्रसारण के लिए दो तीन घंटे का समय निकालना बहुत कठिन होता है, लेकिन यह सब कुछ मेरे सहयोगी मित्रों की वजह से संभव हो पा रहा है जिनमें मैं facebook पेज के संपादक हितेंद्र शर्मा और डॉक्टर कृष्ण मोहन पांडे तथा दक्षा शर्मा का धन्यवाद करना चाहूंगा जिनका बहुत अधिक सयोग मुझे मिला। अकादमी कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ. ओमप्रकाश शर्मा और डॉक्टर इन्द्र सिंह ठाकुर, भारती कुठियाला और हिमाचल तथा देश विदेश के अनेकों साहित्यकारों कलाकारों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
फोकस हिमाचल – अकादमी ने प्रदेश की संस्कृति को प्रलेखित करने के लिए क्या कार्य किए हैं?
डॉ. कर्म सिंह – सांस्कृतिक प्रलेखन और प्रकाशन अकादमी का एक प्रमुख कार्य है। इस योजना में विगत अनेक वर्षों से जो वीडियो का संग्ह अकादमी में पडा हुआ था उसको हमने वर्तमान फॉरमेट में बदल कर के you tube पर अपलोड किया है जिसमें लगभग 100 वीडियो शामिल हैं। इसके अतिरिक्त facebook लाइव में लगभग 600 कार्यक्रम जो अब तक हम साहित्य कला संवाद में कर चुके हैं। उनके भी सारे वीडियो अपलोड किए हैं, जिनको हजारों लोग श्रोता और दर्शक सुनते और देखते हैं। हिमाचल की कला, संस्कृति ,भाषा और साहित्य के प्रचार प्रसार में आनलाइन माध्यम से बहुत संरक्षण हो सका है।
फोकस हिमाचल – पुस्तक का प्रकाशन अकादमी की एक महत्वपूर्ण योजना रही है इन वर्षों में इस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां रही?
डॉ. कर्म सिंह – इन वर्षों में अकादमी ने हिमाचल प्रदेश के लोग साहित्य में रामायण नव संवत्सर परंपरा, जनजातीय लोक कथाएं, यशपाल, भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी ,लिपिमाला, संस्कृत साहित्य का इतिहास, पहाड़ी डिक्शनरी, किन्नौरी डिक्शनरी आदि पुस्तकों का प्रकाशन किया है। लगभग दो दर्जन किताबों पर कार्य चल रहा है, जो शीघ्र प्रकाशित हो सकेगी।
फोकस हिमाचल – कुछ पत्रिकाएं भी प्रकाशित की जाती हैं उनकी स्थिति क्या है?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा हिंदी त्रैमासिक शोध पत्रिका सोमसी और पहाड़ी अर्धवार्षिक पत्रिका हिमभारती तथा संस्कृत भाषा साहित्य की अर्धवार्षिक पत्रिका श्यामला का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है ।
फोकस हिमाचल – अकादमी ने कुछ संस्थाओं के साथ मिलकर भी कार्यक्रम संपन्न किए हैं। यह अनुभव कैसा रहा? इसमें भाषा साहित्य का भविष्य कैसा देखते हैं?
डॉ. कर्म सिंह – विगत कुछ बरसों में अकादमी ने साहित्य और कला के क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के साथ साहित्यिक आयोजन करने का एक प्रयोग किया है, जो बहुत सफल रहा है। इसमें वित्तीय सहयोग अकादमी द्वारा किया जाता है और स्थानीय तौर पर संबंधित संस्था कार्यकम में आयोजक की भूमिका निभाती है, जिसमें बहुत सारे साहित्यकार और कलाकार जुड़ पाते हैं।
फोकस हिमाचल – पुस्तक थोक खरीद योजना का अपडेट क्या है?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा हिमाचल प्रदेश के लेखकों द्वारा विरचित पुस्तकें ₹15000 की 25% छूट पर खरीदी जाती हैं। वर्ष 2019 में प्रकाशित पुस्तकों की खरीद कर ली गई है और अब 2020 में प्रकाशित पुस्तकें खरीद के लिए विचारार्थ आमंत्रित की गई हैं जिनकी खरीद मार्च 2021 से पहले कर ली जाएगी।
फोकस हिमाचल – अकादमी द्वारा साहित्य और कला के क्षेत्र में कितने पुरस्कार दिए जा चुके हैं और कितनी राशि इन पुरस्कारों में प्रदान की जाती है और यह पुरस्कार कब तक दिए जा चुके हैंसाहित्य पुरस्कारों की स्थिति क्या है?
डॉ. कर्म सिंह – हिंदी साहित्य की कविता, कहानी एवं उपन्यास और अन्य विधाओं में तीन पुरस्कार तथा संस्कृत पहाड़ी उर्दू और अंग्रेजी इन चार भाषाओं में कुल 7 साहित्य पुरस्कार प्रतिवर्ष ₹51000 के प्रदान किए जाते हैं। अब तक 2017 तक के पुरस्कार घोषित किए जा चुके हैं। 2018 के पुरस्कारों की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है और 2019- 20 के पुरस्कारों के लिए पुस्तकें विचारार्थ आमंत्रित कर ली गई है।
21 कला सम्मान किन विधाओं में दिए जाते हैं और अब तक कितने पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है।
ललित कला और निष्पादन कला में प्रतिवर्ष 11 पुरस्कार ₹51000 का दिया जाता है अब तक 2000 अट्ठारह तक के कला सम्मान घोषित किए जा चुके हैं और 2019 के पुरस्कार पर विचार किया जा रहा है।
फोकस हिमाचल – शिखर सम्मान किन विधाओं में दिए जाते हैं ?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा एक शिखर सम्मान साहित्य के क्षेत्र में दूसरा कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में और तीसरा पुरस्कार किसी बाहर के विद्वान के लिए हिमाचल के कला संस्कृति भाषा साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए ₹100000 का दिया जाता है। अब तक अकादमी द्वारा 2018 तक के पुरस्कार घोषित किए जा चुके हैं और 2019 के लिए आवेदन आमंत्रित कर लिए गए हैं, जिन पर इसी वर्ष घोषणा की जा सकेगी।
फोकस हिमाचल – अन्य पुरस्कार क्या-क्या दिए जाते हैं?
डॉ. कर्म सिंह – अकादमी द्वारा स्वैच्छिक संस्थाओं को कला संस्कृति भाषा साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष ₹51000 का पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त 19 वर्ष के लिए दिए जाने वाले चंबा रुमाल और पहाड़ी चित्रकला में भी प्रथम पुरस्कार ₹15000 पुरस्कार 7500 और तृतीय पुरस्कार ₹5000 के लिए भी प्रविष्टयां आमंत्रित कर ली गई हैं।
फोकस हिमाचल – सचिव के नाते आप की क्या चुनौतियां रही हैं?
डॉ. कर्म सिंह – सचिव अकादमी का मेरे पास अतिरिक्त कार्यभार रहा। इस कार्यकाल में कुछ चुनौतियां भी मिलती रही, परंतु विपरीत स्थितियों में भी सकारात्मक सोच वाले लोगों का साथ मिलता रहा और अकादमी का कार्य निर्बाध रूप से अग्रसर होता रहा। केवल आलोचना करते हैं कुछ लोग सक्रिय होकर सकारात्मक सोच के साथ सहयोग करते हैं और इसी तरह के लोगों के साथ मिलकर आगे बढ़ना संभव हो पाता है।
फोकस हिमाचल – अभी और क्या कुछ करना बाकी रह गया है?
डॉ. कर्म सिंह – देखिए अन्य प्रांतों में काला साहित्य आदि विषयों पर कार्य करने के लिए अकादमियों की संख्या अधिक है जबकि हिमाचल प्रदेश में एकमात्र अकादमी है। इस नाते कार्य और चुनौतियां अधिक हैं। अभी तक 50 वर्ष के सफर में मुझ से पूर्व के सचिवों ने बहुत अच्छे कार्य किए हैं और कई मानक भी स्थापित किए हैं। मेरा यह प्रयास रहा है कि उन्हीं के बताए मार्ग पर चलते हुए कुछ नया किया जाए और इसमें काफी सफलता भी मिली है। फिर भी हिमाचल प्रदेश में कला, भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, प्रकाशन और डॉक्यूमेंटेशन की दिशा में योजनाबद्ध रूप से कार्य किए जाने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय के लिए कुछ किया जा सके।

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