सरकारी सिस्टम का कारनामा, जनरल जोरावर सिंह का बदला पता-ठिकाना

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लापरवाही- सरकारी सिस्टम का कारनामा, जनरल जोरावर सिंह का बदला पता-ठिकाना, युद्ध स्मारक धर्मशाला में स्थापित महान सेनानायक की प्रतिमा की पट्टिका पर भ्रामक जानकारी

धर्मशाला से विनोद भावुक की रिपोर्ट


कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला में 2190 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 9.85 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित युद्ध संग्रहालय के बाहरी भाग में प्रदर्शित जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा की पृष्ठ भूमि में दर्शाई गई उनकी वीरगाथा में उनके जन्मस्थान के बारे में भ्रामक एवं गलत सूचना दी गई है। पट्टिका पर उन्हें कलहूर, बिलासपुर का निवासी बताया गया है, लेकिन भू राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक जोरावर सिंह हमीरपुर जिला की नादौर तहसील के अंतरा गांव के वासी थे। जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से जनरल जोरावर सिंह के जीवन पर शोध करने वाले डॉ. राकेश शर्मा का कहना है कि देश के महान सेनानायक जनरल जोरावर सिंह के विषय में भ्रामक जानकारी देने वाली पट्टिका को हटाकर यहां सही जानकारी वाली पट्टिका स्थापित हो।

भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर हुआ लोकापर्ण


बता दें कि ९ अगस्त २०१७ को भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस युद्ध संग्रहालय का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद सिंह ने किया था। यह संग्रहालय राष्ट्र के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बतरा, सौरभ कालिया तथा राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले अन्य वीर सैनिकों के बारे में जानकारी प्रदान करवाता है। इस संग्रहालय के बाहरी भाग में स्थापित जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा के बारे में जानकारी को लेकर विवाद पैदा हुआ है।

राजस्व रिकॉर्ड देता है गवाही


जनरल जोरावर सिंह के जीवन पर शोध कार्य करने वाले जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के शोधार्थी एवं इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के रिसर्च फैलो डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिला के बिजापुर पहुंच कर जोरावर सिंह की चौथी, पांचवी व छठी पीढ़ी के सदस्यों से आवश्यक सामग्री जुटाई है। उन्होंने जनरल जोरावर सिंह के परिवार के राजस्व रिकॉर्ड को भी अपने दावे के पक्ष में आधार बनाया है। डॉ. राकेश शर्मा कहते हैं कि भू-राजस्व रिकॉर्ड व परिवार के सदस्यों से प्राप्त जानकारी से सिद्ध होता है कि जनरल जोरावर सिंह हमीरपुर जिला की नादौन तहसील के गांव अंसरा गांव के वासी थे।

बाबा बालकनाथ हैं कुल देवता


डॉ. राकेश शर्मा कहते हैं कि उन्होंने जोरावर सिंह की चौथी पीढ़ी केसदस्य प्रीतम सिंह की पत्नी अमर देवी, जोरावर सिंह के बेटे इंद्र सिंह, इंद्र सिंह के बेटे चतर सिंह व तेजा सिंह व चतर सिंह के बेटे दलीप सिंह, जमीत सिंह, प्रीतम सिंह व प्रीतम सिंह के बेटे जयदेव सिंह व जगदेव सिंह से मुलाकात की है। जयदेव सिंह व जगदेव सिंह कहते हैं कि वे अंसरा वासी हैं। उनके कुल देवता बाबा बालकनाथ हैं और वे वर्ष में एक बार जरूर बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। दलीप सिंह के पोते नरदेव सिंह व राकेश सिंह कहते हैं कि वे कई बार अंसरा गए हैं। जनरल जोरावर सिंह के भाई सरदार सिंह के परिवार के सदस्य संजय सिंह कहते हैं कि अंसरा में उनकेपरिवार की सदस्य धनदेवी ने जमीन के अधिकार के लिए केस लड़ा था।

इसलिए जोरावर सिंह के साथ जुड़ता है कहलूरी

डॉ. राकेश शर्मा अपने शोध पत्र में कहते हैं कि जनरल जोरावर सिंह के पिता हरजे सिंह ठाकुर कहलूर रियासत के दरबारी थे। कहलूर रियासत से जम्मू-कश्मीर के राजा गुलाब सिंह के परिवार की एक राजकुमारी का विवाह हुआ था। इसे कहलूरी रानी कहा जाता था। जोरावर सिंह उस कहलूरी रानी को बहन कहते थे। इसी कारण जोरावर सिंह के नाम के साथ भी कहलूरी जुड़ता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

‘युद्ध स्मारक धर्मशाला में स्थापित महान सेनानायक जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा के साथ लगी पट्टिका उनके बारे में भ्रामक व गलत जानकारी देती है। उसे तुरंत हटाकर इस वीर के बारे में सही जानकारी देने वाली पट्टिका स्थापित की जाए।’
-डॉ. राकेश शर्मा,
जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से जनरल जोरावर सिंह
के जीवन पर शोध करने वाले इतिहासकार।


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