शांघड में चलती है देवता की हुकूमत, शांगचुल महादेव के घर में महफूज मुहब्बत, शांति की खोज व ट्रैकिंग में नए कीर्तिमान स्थापित करने की भरपूर सम्भावनाएं संजोई संजोये है ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क

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शांघड में चलती है देवता की हुकूमत, शांगचुल महादेव के घर में महफूज मुहब्बत, शांति की खोज व ट्रैकिंग में नए कीर्तिमान स्थापित करने की भरपूर सम्भावनाएं संजोई संजोये है ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क
शांघड़ से शरद त्यागी की रिपोर्ट
यूं तो मुहब्बत की दुनिया दुश्मन रही है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मैदान है जो प्रेमी युगलों को पनाह देता है। परिवार- सामाज की प्रताडऩा से भागे प्रेमी युगल यहां शरण लेते हैं। प्रेमी यहां पहुंच गए तो समझो, पूरी तरह सुरक्षित हैं, क्योंकि यहां प्रेमियों को संरक्षण यहां का देवता देता है। यह अदभुत मैदान कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र की सैंज घाटी में स्थित है। समुद्रतल से लगभग 6300 फुट की ऊंचाई पर स्थित शांघड़ का मैदान वहां के देवता शांगचुल महादेव की क़ानूनी संपत्ति है। महादेव के अपने क़ायदे- क़ानून हैं जो पूरे शांघड़ क्षेत्र में चलते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार शांगचुल महादेव ही यहां के संरक्षक भी हैं। देवता मैदान में सिर्फ़ गाय घास चर सकती है जोकि एक तरह से घास की लम्बाई एक सी रखने का काम भी करती है। मैदान में शराब लाना या पीना, किसी भी तरह की वर्दी पहन के आना, मल मूत्र करना, शोर मचाना, झगड़ा करना, ज़बरदस्ती करना, मैदान को खोदना और टेंट लगाना निषेध है। चूंकि मैदान में किसी के साथ इच्छा के विरुद्ध कोई ज़बरदस्ती नहीं कर सकता, इसलिए कई प्रेमी युगल घर से भाग के यहां शरण लेते हैं और शांगचुल महादेव उनका संरक्षण प्रदान करते हैं।
ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क का प्रवेश द्वार
शांघड़ एक तरह से ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क का प्रवेश द्वार है। भारत के इस नेशनल पार्क को उसके अद्वितीय प्रकार्तिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए यूनेस्को ने वर्ष 2014 में विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित किया है। शांघड़ का क्षेत्र ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क के ईको ज़ोन में आता है, जहां से एक से लेकर 15 दिन तक के कई तरह के मनमाफिक़ ट्रैक किए जा सकते हैं। ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क में शांघड़ के बाद लपाह, शक़्टी और मरौर गांव पड़ते हैं, जहां पैदल ही जाना होता है। वहां से आगे का सारा क्षेत्र आबादी रहित है और मेन पार्क में आता है। ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क में कई ऐसे शिखर हैं, जिन्हें अब तक तक छुआ नहीं गया और उन्हें छूकर नामकरण करने का अविस्मरणीय मौक़ा उपलब्ध है। अगर लंबा व कठिन ट्रैक न करना हों तो शांघड़ से कुछ घंटों की चढ़ाई पर कई अत्यंत सुंदर स्थल हैं, जैसे बरशांघड़ झरना, सरा झील, पुंडरिक झील, गंझाऊ थाच और थीनी थाच।
चमकने को बेताव शांघड़
देश- विदेश के पर्यटक और हिमालय के प्रेमी पर्यटन राज्य हिमाचल प्रदेश के बारे में ज़रूर जानते होंगे। लगभग स्कॉटलैंड के बराबर क्षेत्रफल वाले भारत के18 वें राज्य हिमाचल प्रदेश में मध्यम और ट्रांस हिमालय में बसे मनाली, शिमला, काजा, धर्मशाला और कसौल जैसे हिल्स स्टेशन साल भर देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन इस प्रदेश में ऐसे कई अदभुत व अनूठे स्थल हैं, जो सडक़ से हटकर होने अथवा सडक़ ही न होने की वजह से अभी तक पयर्टन के मानचित्र पर चमक नहीं पाए। ऐसा ही कुदरत की गोद में में बसा रमणीय स्थल है शांघड़। शांघड़ पर्यटन की दृष्टि से चमकने को बेताव है।
शांघड़ के लिए बन रही पक्की सडक़
शांगचुल महादेव की एक ऐसी अनदेखी और अनूठी भूमि जो अब तक देश और विदेश तो क्या, हिमाचल प्रदेश के घुमक्कड़ों से भी छिपी ही रही है। कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र की सैंज़ घाटी में स्थित छोटी सी पंचायत शांघड़ में जैसे प्रकृति साक्षात दैवीय रूप में विराजमान हुई हैं। शांति की खोज हो या ट्रैकिंग में नए कीर्तिमान स्थापित करने हों, शांघड़ में प्रकृति ने इन सब के लिए भरपूर सम्भावनाएं संजोई हुई हैं। वर्ष 2014 तक शांघड़ के लिए सडक़ मार्ग नहीं था। वर्ष 2016 तक यहां के लिए जीप रोड़ ही रहा, जिस पर जीप चलाना भी टेढ़ी खीर ही था। आखिरकार वर्ष 2018 में शांघड़ सडक़ को पक्का करने का काम शुरू हुआ, जो अभी भी जारी है।
ऐसे पहुंच सकते हैं शांघड़
अब कोई भी वाहन लेकर आप शांघड़ आ सकते हैं। नहीं तो यहां आने के लिए आप बस भी ले सकते हैं। कुल्लू से दिन के 2 बजे चलने वाली इकलौती बस आपको 6 बजे तक शांघड़ पहुंचाएगी। शांघड़ से सुबह 7 बजे कुल्लू के लिए बस सुविधा उपलब्ध है। अगर ख़ुद के वाहन से आना चाहें तो चंडीगढ़ मनाली राजमार्ग पर औट सुरंग से पहले दांए को जाने वाली सडक़ लीजिए और फिर लारजी होकर सैंज़ बायपास होते हुए न्यूली रोड पर रोपा पहुंचिए, जहां से दांए से ऊपर जाने वाली सडक़ 7 किमी के अत्यंत रोमांचक सफऱ के बाद आपको शांघड़ पहुंचा देगी। शांघड़ पहुंच कर जैसे ही आप देवता मैदान में पहुंचते है, वहां का दृश्य आपके सफऱ की थकान को भूला देंगे और जीवन की आपाधापी से दूर आपको ताजगी का एहसास करवाएंगे।
होमस्टे और कॉटेज सुविधा
शांघड़ का में रहने के लिए कई होमस्टे और कॉटेज उपलब्ध हैं, जो मनमोहक नज़ारों के साथ घर जैसा आराम और खाना तो मुहैया करवाते ही हैं, बल्कि साथ ही सुदूर हिमालयन जीवनशैली को भी कऱीब से देखने का अवसर प्रदान करते हैं। शांघड़ हर मौसम में एक अलग ही रंग में रंगा होता है, इसलिए यहां जाने का कोई सबसे उत्तम या कोई एक समय नहीं है। सर्दियों में शांघड़ जहां बर्फ की साफेद चादर ओढ़ लेता है, वहीं गर्मी में ये सुर्ख़ हरा क़ालीन बिछा लेता है। अच्छी बात है कि यहां पहुंचने और रहने की व्यवस्था हमेशा रहती है।
दिव्यता के लिए निभाएं जिम्मेदारी
यहां आने वाले सैलानियों को अपने मोहपाश में बांध लेने वाले शांघड़ के पास वह सब कुछ है, जो आजकल के प्रकृति के प्रति संवेदनशील पर्यटकों को चाहिए। सबसे ख़ूबसूरत बात है कि यहां के लोग जो पर्यटन के महत्व को समझते हैं और मेजबानी के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभा रहे हैं। ज़रूरत सिर्फ इतनी है कि हम, आप और सरकार भी प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और भविष्य में इस दिव्य पर्यटक स्थल की पवित्रता को बनाए रखने के लिए आवश्यक क़दम उसी अनुसार उठाएं।
(शरद त्यागी मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं और पिछले कई सालों से शांघड़ को पर्यटन की दृष्टि के विकसित करने में जुटे हैं. ट्रेवल एंड इको टूरिज्म में उनके स्टार्टअप को स्टार्टअप इंडिया में मान्यता मिली है )
SHARAD TYAGI | SHANGHAR TRIPS
HMRA | ADVENTURE..BEST POSSIBLE
HIMALAYAN MONK RIDERS ASSOCIATES PVT LTD

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