विश्व प्रसिद्ध उपन्यास – ‘ए ग्रेन ऑफ व्हीट’ कीनिया के मऊ मऊ विद्रोह पर आधारित छह दिन की कहानी, जिसका 30 से ज्यादा भाषाओँ में हो चुका अनुवाद

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विश्व प्रसिद्ध उपन्यास – ‘ए ग्रेन ऑफ व्हीट’ कीनिया के मऊ मऊ विद्रोह पर आधारित छह दिन की कहानी, जिसका 30 से ज्यादा भाषाओँ में हो चुका अनुवाद

 

फोकस हिमाचल के पाठकों के लिए शेली किरण ने लिखा उपन्यास का सार

‘ए ग्रेन ऑफ व्हीट’ साल 1967 में लिखा गया एक ऐतिहासिक नोबेल है। जिसके लेखक नयूगी वा थियोंग हैं। यह मऊ मऊ विद्रोह पर आधारित है। यह गुलाम समाज के बारे में है, कुछ सिद्धांतों के बारे में है, रंगभेद के बारे में भी हैं। कीनिया ने ब्रिटेन से आजादी ली तो कैसे ग्रामीणों का जीवन बदल गया यह उस पर आधारित है। 1952 से 1960 में जो एमरजैंसी लगी उसी काल का लेखा-जोखा इसमें है। बराक ओबामा ने इसके बारे में कहा था कि यह एक कंप्लीट स्टोरी है। यह इतिहास है कि कैसे उसमे लोगों का जीवन बदल गया, उनके आपसी संबंध बदल गए। इसकी भूमिका नोबेल प्राइज विजेता अब्दुल रज्जाक ने लिखी है। इस नॉवेल का 30 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इसमें उनके ब्रिटिश राज से आजादी के बारे में लिखा गया है। इसमें एक कल्पना आधारित गांव थियबी के गुलाम समाज का चित्रण है, जिसमें लोगों को जबरदस्ती डिटेन किया गया है, जेल भेजा गया है, प्रताड़ित किया गया है।  उन पर जासूस और विद्रोही होने का शक करके सालों ज़ुल्म किया गया है। उपन्यास कभी अतीत में जाता है फिर वापस हकीकत में आता है फिर अतीत में जाता है।

 

कहानी के पांच पात्र

इसमें पांच मुख्य पात्र मूगो, मुंबी, गिकोन्यो, किहीका और करांज़ा हैं। उपन्यास की कहानी उहरू समारोह की तैयारियों से शुरू होती है।  मुंबी और गिकोनयो दम्पति उहरू अर्थात आजादी के समारोह में भाग लेने के लिए मूगो को अपने अपने ढंग से मना रहे हैं और ब्रिटिश जो हैं वह कीनीयन लोगों को सत्ता सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। कहानी फ्लैशबैक में चलती है। मूगो अपने डिटेंशन के दिनों को याद करता है। उसके हृदय को कोई बात भेद रही है, जिसके कारण वह उहरू में भाग लेकर इसका नेतृत्व नहीं करना चाहता। जबकि गांव भर में उसका बहुत सम्मान है और उसे विद्रोह का एक सम्मानजनक विद्रोही समझा जाता है। लोग उसे सम्मान देने के लिए उसके नाम के गीत तक गाते हैं। उसे किहीका का साथी समझा जाता है, जो कि मुंबी का भाई था और आजादी की लड़ाई की भेंट चढ़ चुका है।

 

प्रेम के लिए प्रतिस्पर्धा

 

मुंबी गांव की सबसे सुंदर लड़की थी। कंराजा और गयूकोनयो में उसे पाने के लिए प्रतिस्पर्धा चलती है,  जिसमें गयूकोनयो जो कि एक बढई है जीत जाता है। करांजा उससे अधिक संपन्न होने के बावजूद मुंबी द्वारा जीवन साथी के रूप में नहीं चुना जाता है।  इस बात से वह काफी आहत होता है और मुंबी की जब शादी हो जाती है, तो वह ब्रिटिश लोगों के साथ मिल जाता है। वह विद्रोह में कोई भी कसम नहीं उठाता है, उसे लोग किहीका की हत्या का जिम्मेदार मानते हैं। पर्व के अवसर पर उसे दंड देने की तैयारी भी करते हैं।

प्रेम, भावुकता और नफरत के रंग

 

मुंबी और गयूकोनयो में लड़ाई हो चुकी है। वे दोनों अलग-अलग रहते हैं, क्योंकि गयूकोनयो को विद्रोही मानकर पुलिस ले गई, उसे सजा हो गई। करांजा पुलिस फोर्स का हिस्सा था। उसने गयूकोनयो के छूटने की सूचना दी तो खुशी की भावुकता में मुंबी के संबंध एक बार कंराजा से बन गए, जिससे उसका बेटा भी है। गयूकोनयो को जेल से छूटने के बाद जब यह पता चला तो वह खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।  उसे गटू नामक कैदी की याद आती है जो अपनी मृत्यु के क्षणों में भी कमजोर नहीं पड़ा, क्योंकि उसके जीवन में कोई औरत नहीं थी। गयूकोनयो मुंबी और करांजा से उत्पन्न बेटे को भी नफरत की निगाह से देखता है,  जबकि वांग्री जोकि की उसकी मां है, वह मुंबी का, अपनी बहु का साथ देती है।

 

आघात के बावजूद घर के लोगों का साथ

 

क्योंकि गयूकोनयो के जेल जाने के बाद मुंबी भूख गरीबी, घर जलाए जाने जैसे आघात सहती है, लेकिन घर के लोगों का साथ देती है। फ्रेंच ट्रेंच में काम करती है,  झौपड़ी बनाती है। वह शोषण और भूख  के कारण मानसिक विक्षप्त की तरह व्यवहार करती है, लेकिन करांजा का दिया भोजन और सुख स्वीकार नहीं करती। इससे करांजा के जीवन पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, वह खुद को हारा हुआ और निराश महसूस करता है। अंग्रेज उसका एक कुत्ते की तरह अपमान करते हैं, उसके अपने लोग भी उससे घृणा करते हैं, जिनमें मुंबी भी शामिल है। वह किसी का की मृत्यु का जिम्मेदार नहीं है, किंतु सब गांव वाले उसी पर शक करते हैं।

 

जीवन की त्रासदी की कथा

 

मुंबी जब मूगो को उहरू में शामिल होने के लिए मनाने जाती है तो अपने और गयूकोनयो के बीच चल रही लड़ाई के बारे में उसे बताती हैं और उसके कारण भी बताती है। गयूकोनयो भी उसे अपने जीवन की त्रासदी के बारे में बताता है। दोनों की बातें सुनने के बाद मूगो को यह एहसास होता है कि उसने किहीका की सूचना पुलिस को देकर कितनी बड़ी गलती की है। पुलिस से भागते- भागते जब किहीका उससे शरण मांगता है तो मूगो जो कि बहुत डरपोक व्यक्ति है और एक शराबी मारपीट करने वाली औरत वैथेरीरो ने उसे पाला है, जिसके प्रभाव में वह बहुत दब्बू बन गया है।

 

आजादी के लिए बलिदान

 

किहीका के जंगल में भागने के कारण उसकी प्रेमिका वैंकयू उससे रूठ जाती है, जिसकी सैनिक से मार खाने के बाद गर्भ के साथ मृत्यु हो जाती है। उसको अहसास होता है कि गांव घर पर जो भी मुसीबत आई है, अंग्रेजों द्वारा जो भी ज़ुल्म किए गये उसका कारण वह स्वयं है। सभी पात्रों का स्वयं को समझ लेना,  अपनी परिस्थितियों को समझ लेना, अपने अकेलेपन को स्वीकार कर लेना, आजादी के लिए बलिदान को समझ लेना ही इस उपन्यास का सार है।

 

इजिप्ट और ज्यूस में हुए संघर्ष से तुलना

 

इस उपन्यास  के लेखक भाषा जर्नल ‘मुटीरी’ के एडिटर भी हैं और यह उपन्यास उन्होंने फैनन और मार्क्स के दर्शन को आधार बनाकर लिखा है। वह केन्या के आजादी के संघर्ष की तुलना इजिप्ट और ज्यूस में हुए संघर्ष से करता है। वह त्याग में और बलिदान में आस्था रखता है। इस उपन्यास का टाइटल उस व्यक्ति के बारे में है,  जो कि इस विद्रोह का शुरू का विद्रोही है, उसके बारे में एक खबर है कि उसे मिट्टी में जिंदा गाड़ दिया गया था और उसका मुंह मिट्टी की तरफ था। जैसे गेहूं के दाने को बीजा जाता है।

 

अपना- अपना अकेलापन

 

इस उपन्यास में बहुत से लोग समाज से कटे हुए अकेले जीते हैं, यानी आइसोलेटेड हैं। इनमें एक बूढ़ी औरत वरूई भी है जो कि अपने बेटे गिटीगो की मृत्यु के बाद अकेली रहती है। मूगो आत्मग्लानि और भय के कारण अकेला रहता है, क्योंकि वह अपने आप को लोगों का कसूरवार समझता है। गयूनकियो रिश्तों और प्रेम में धोखा खाने के कारण अकेला रहता है। मुंबी अकेले रहने के लिए मजबूर हो जाती है क्योंकि समाज उसे ठुकरा देता है। उसका पति , उसके माता-पिता सब उसके विरोधी हो जाते हैं। करांजा भी आत्मग्लानि और भय के कारण अकेला रह जाता है।

 

विद्रोह के प्रभावों की खोज

 

विद्रोह से समाज में बहुत सारे बदलाव आते हैं, जो कि आर्थिक भी हैं और सामाजिक भी हैं और सांस्कृतिक भी हैं। जमीन पर जब दूसरे लोगों का कब्जा हो जाता है, तो लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है। शिक्षा का महत्व और शिक्षा से लोगों को वंचित किए जाने के क्या परिणाम होते हैं, उसके बारे में भी इतिहास के संदर्भ में बात करता है। विद्रोह का औरतों के ऊपर क्या बुरा प्रभाव पड़ता है जिसमें उनका आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक, शारीरिक शोषण शामिल है।

 

‘किक्यू’ भाषा में लेखन

 

अंग्रेजों ने बिना पैसा दिए या बहुत कम पैसा देकर 1921 में कीनिया की जमीन पर कब्जा कर लिया था। लोगों को 180 दिन फ्री लेबर या बेगार करनी पड़ती थी, जिससे उनका आक्रोश विद्रोह में परिवर्तित हो जाता है। यह उपन्यास तब लिखा गया जब लेखक ने फैनन के लिखे उपनिवेशवाद के मनोवैज्ञानिक प्रभावों के बारे में पढ़ा। यह सिर्फ 6 दिन की कहानी है, जिसमें किहीका के हत्या के दोषी को ढूंढने का प्रयास किया जाता है। बेशक वे पहले प्रसिद्ध और सफल अफ़्रीकी अग्रेंजी भाषा लेखक हैं, लेकिन उन्हें अंग्रेजी भाषा के विरोध स्वरूप अपनी मातृभाषा ‘किक्यू’ में लिखने से प्रसिद्धि प्राप्त हुई है। weep not child, The River Between, A grain of wheat,  Petals of blood, Devil on the cross उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

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(हमीरपुर के नादौन की निवासी शैली किरण पेशे से शिक्षिका और चर्चित साहित्यकार हैं )


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