विज्ञान की शिक्षक नीतू सिंह के नवाचारों से स्टूडेंट्स के जन्मजात हुनर को निखारने की प्रयोगशाला बन गया परछोड़ स्कूल

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विज्ञान की शिक्षक नीतू सिंह के नवाचारों से स्टूडेंट्स के जन्मजात हुनर को निखारने की प्रयोगशाला बन गया परछोड़ स्कूल
चंबा से मनीष वैद की रिपोर्ट
चंबा जिला की भटियात घाटी के खनोड़ा गांव के परमजीत सिंह की गिनती अध्यापन के लिए समर्पित और नक़ल पर नुकेल कसने वाले शिक्षकों में होती है. शिक्षा विभाग में अपने दशकों के कार्यकाल में वे जहां भी तैनात रहे, शिक्षा की गुणवता की गारंटी रहे. वे शिक्षा विभाग से बतौर उप निदेशक सेवानिवृत हुए हैं. अब उनकी शिक्षक बेटी नीतू सिंह अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए शिक्षा जगत के लिए नई मिसाल पेश कर रही हैं. चंबा जिला की आदर्श पंचायत परछोड़ की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला परछोड़ की विज्ञान की शिक्षक नीतू सिंह शिक्षा में अपने नवाचारों और प्रयोगों को लेकर सुर्खियां बटोर रही हैं. बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ उनके हुनर को निखारने की दिशा में अनूठी पहल की वह नायिका बन गई हैं.
स्टाफ का सहयोग, स्टूडेंट्स का साथ
नीतू सिंह को इन्सपायर स्कीम के तहत अपने स्टूडेंट्स के साथ अपने नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल चुका है और उनके तीन मॉडल स्वीकृत हो चुके हैं. नीतू सिंह की इस पहल को स्कूल के ही अन्य शिक्षकों शालू मनकोटिया, दिनेश और फरजाना से पूरा सहयोग मिलता है, वहीं स्कूल के प्रधानाचार्य सरदार सिंह हमेशा स्कूल स्टाफ को नवाचारों के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करते हैं. स्टूडेंट्स के स्कूल उनके हुनर निखारने की प्रयोगशाला बन गई है.
कवाड़ से जुगाड़
नीतू सिंह पाठशाला के लोटस इक्को क्लब की मेम्बर हैं. उन्होंने कवाड़ से जुगाड़ कर स्कूल परिसर का नक्शा ही बदल डाला है. कवाड़ से जुगाड़ की परिकल्पना को हकीकत में बदलने के लिए परिसर में 200 से ज्यादा बेकार और खराब डिब्बों को करीने से सजा कर परिसर को नया रंग – रूप दिया गया है. परिसर में स्टूडेंट्स को भी अपनी क्रियेटिबिटी दिखाने का अवसर मिल रहा है. परिसर के चारों और रंग- बिरंगे फूल खिले हैं तो स्कूल के किचन गार्डन में हर तरह की मौसमी सब्जियां उग रही हैं. उनके प्रयासों से स्कूल परिसर इक्को फ्रेंडली परिसर बन गया है.
ओपन लाइब्रेरी में मनोरंजन और ज्ञान का खजाना
नीतू सिंह के प्रयासों से स्कूल में ओपन लाइब्रेरी स्थापित की गई है. इस लाइब्रेरी में जहां स्टूडेंट्स के मनोरंजन के लिए चंदा मामा, लोट- पोट, चाचा चौधरी और साबू तथा नन्हें सम्राट जैसे अस्सी के दौर में किशोरों की मनोरंजन के लिए पहली पसंद कहे जाने वाले कॉमिक्स उपलब्ध हैं, वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तमाम पुस्तकें और पत्र- पत्रिकाएं उपलब्ध हैं. नीतू सिंह का कहना हैं कि टीवी और मोबाइल के इस युग में किशोरों का स्वस्थ मनोरंजन करना और उनकी क्रियेटीबिटी को निखारना कम चुनौतीपूर्ण नहीं हैं. हम इसी दिशा में लीक से हट कर प्रयोग और प्रयास कर रहे हैं.

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