वरिष्ठ कहानीकार, कवियत्री हरिप्रिया का आज जन्मदिन है, आईए उनकी पचास साल की सृजन की दुनिया की सैर करते हैं

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वरिष्ठ कहानीकार, कवियत्री हरिप्रिया का आज जन्मदिन है, आईए उनकी पचास साल की सृजन की दुनिया की सैर करते हैं
विनोद भावुक की रिपोर्ट
वरिष्ठ कहानीकार व कवियत्री हरिप्रिया आज 67 साल की हो गईं। पैलेस कालोनी मंडी की रहने वाली हरिप्रिया पिछले पचास सालों से साहित्य की दुनिया में साधनारत हैं। आठवीं कक्षा में पढ़ते हुए रचनात्मक लेखन के लिए कलम थामने वाली हरिप्रिया ने लेखन की आधी सदी में जीवन और मानवीय सम्बन्धों से जुड़े विभिन्न विषयों की गहराई में उतरने की पुरजोर कोशिश की है। उनकी हिंदी और पहाड़ी दोनों में मजबूत पकड़ है और वे दोनों भाषाओं में सृजन करती आ रही हैं। उन्हें कविता और कहानी लेखन में महारत हासिल है। उनके चार काव्य संग्रह जिनमें एक मंडयाली में है, छप चुके हैं और पांचवा प्रकाशनाधीन है। बेशक कई पत्रिकाओं में उनकी कहानियां प्रकाशित हुई हैं, लेकिन अभी तक भी पाठकों को उनके कहानी संग्रह का इंतजार है। खुशी की बात यह है कि वर्तमान में भी साहित्यिक आयोजनों में उनकी मजबूत उपस्थिति दर्ज होती है।
कविताओं में बुना जीवन का ताना- बाना
साल 1993 में उनका काव्य संग्रह ‘प्रतिध्वनि’ प्रकाशित हुआ। पहले और दूसरे काव्य संग्रह के बीच एक बड़ा अंतराल रहा।12 साल बाद जाकर साल 2015 में उनका दूसरा काव्य संग्रह ‘वे औरतें’ प्रकाशित हुआ। लेकिन उनके बाद उनके लेखन ने गति पकड़ी और एक साल बाद ही उनका तीसरा काव्य संग्रह ‘कैलेग्वे बीच की सुनहरी रेत पर’ पाठकों के सामने था। उससे अगले साल मंडयाली काव्य संग्रह ‘यादां दा हिंयु’ प्रकाशित हुआ। उनका पांचवा काव्य संग्रह ‘अंतस का मुखरित मौन’ प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हरिप्रयिा ने अपनी कविताओं में जीवन का ताना- बाना बुना है।
कई संकलनों में रचनाओं को स्थान
पंजाब केसरी तरूण संगम पटियाला की ओर से आयोजित काव्य प्रतियोगिता में उन्हें दूसरा स्थान हासिल हुआ। यहां यह बताना भी जरूरी है कि इस प्रतियोगिता में किसी भी रचना को प्रथम स्थान नहीं मिला। साल 1979 में वीर प्रताप की ओर से आयोजित कहानी प्रतियोगिता में उन्हें सांत्वना पुरस्कार मिला। साल 1979 में हिमाचल प्रदेश भाषा विभाग की ओर से प्रकाशित ‘समय के तेवर’ कहानी संग्रह में उनकी आठ कहानियों को जगह मिली है। साहित्य आकदमी दिल्ली की ओर से साल 2009 में संकलित एवं प्रकाशित ‘प्रतिनिधि हिमाचली काव्य’ में उनकी हिंदी व मंडयाली में दो रचनाएं शामिल हैं। विभिन्न संकलनों में उनकी रचनाएं शामिल हैं। देश भर की तमाम प्रतिष्ठित हिंदी पत्र पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती आ रही है।
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान
एमएम बीएड व एलटी की पढ़ाई करने के बाद अध्यापन के करियर को अपनाने वाली हरिप्रिया शिक्षिका के तौर पर अपने स्टूडेंट्स के लिए आदर्श अध्यापिका रही है। अपने विषय में शत प्रतिशत परिणाम के अलावा उन्होंने स्कूली बच्चों को हमेशा नारा लेखन, भाषण प्रतियोगिताओं, नाट्य मंचन व साहित्य सृजन में भागीदारी के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। उनके इन प्रयासों के लिए सीनियर सकेंडरी स्कूल रंधाड़ा ने उनका नागरिक अभिनंदन किया था। लेखन के लिए उन्हें कई संसथाओं ने सम्मानित किया है। शिक्षा के क्षेत्र में नवचारों के लिए उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2007 में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया है।

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