लॉकडाउन में ब्लड डोनेशन : कई दिनों से अटकी थी सर्जरी, धर्मेंद्र राणा ने ब्लड डोनेट कर दिया महिला को नया जीवन, रक्तदान के शतकवीर हैं 

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लॉकडाउन में ब्लड डोनेशन : कई दिनों से अटकी थी सर्जरी, धर्मेंद्र राणा ने ब्लड डोनेट कर दिया महिला को नया जीवन, रक्तदान के शतकवीर हैं 
मंडी से विनोद भावुक की रिपोर्ट
26 मार्च की रात को लॉकडाउन के चलते मंडी के धमेंद्र राणा परिवार के साथ अपने घर में डिनर कर रहे थे कि जोनल अस्पताल मंडी से उनके मोबाइल पर घंटी बजी और कहा गया कि हॉस्पीटल में भर्ती धर्मपुर की एक महिला की कई दिनों से ab + ब्लड का प्रबंध न हो पाने के कारण सर्जरी नहीं हो पा रही है। धर्मेंद्र राणा का ब्लड ग्रुप ab + है और वह रेगुलर ब्लड डोनर हैं। उन्होंने अगली सुबह अस्पताल पहुंच कर ब्लड डोनेट किया, जिससे उक्त महिला का ऑप्रेशन संभव हुआ और उसका अनमोल जीवन बचा। धर्मेंद्र राणा कहते हैं कि उनके पिता ने जरूर ब्लड डोनेशन से पहली सावधानी बरतने की हिदायत दी, जबकि परिवार के दूसरे सदस्यों ने उन्हें रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय से डोनेशन की शुरूआत
एनआईआईटी संस्थान मंडी के संचालक धर्मेंद्र राणा हर साल अपना जन्मदिन रक्तदान कर मनाते हैं। सरकाघाट के हवाणी गांव के रिटायर्ड कर्नल मनमोहन सिंह के बेटे धर्मेंद्र राणा ने रक्तदान की शुरूआत लखनऊ विश्वविद्यालय के स्टूडेंट के तौर पर उस वक्त की थी जब सडक़ हादसे में घायल उनके एक दोस्त को ब्लड की जरूरत थी। सैन्य अनुशासन में पले- बड़े धर्मेंद्र राणा ने चंडीगढ़ में अपनी जॉब के दौरान भी रक्तदान जारी रखा। एक हादसे में मां की मौत के बाद पारिवारिक जिम्मेवारियों के चलते नौकरी छोड़ उन्होंने मंडी में अपना कंप्यूटर शिक्षण संस्थान स्थापित किया, तब भी यह सिलसिला जारी रहा। फिर उन्होंने तय किया कि वह अपने हर जन्मदिन पर रक्तदान करेंगे। वह अब तक 95 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह साल में वह चार बार रक्तदान करते हैं।
जब तक फिट, तब तक करेंगे ब्लड डोनेट
धर्मेंद्र राणा कहते हैं कि एक सुशिक्षित नागरिक के नाते उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास है। उन्हें पता है कि अस्पताल में जितने रक्त की जरूरत पड़ी है, उतना उपलब्ध नहीं होता। यही सोच कर उन्होंने निर्णय लिया है कि जब तक वह शारीरिक रूप से स्वस्थ्य हैं, रक्तदान करते रहेंगे। उनका कहना है कि रक्तदान करने के बाद लोगों से खून के रिश्ते बन जाते हैं। ऐसे कई लोगों के साथ उनके घनिष्ठ संबंध हैं, जिनको कभी उन्होंने रक्तदान किया था। रक्तदान कर एक सकून भरी अनुभूति आनंदित करती है। वह कहते हैं कि रक्त जागरूकता को लेकर स्कूलों के स्टूडेंट्स को प्रेरित करने के लिए सरकार व स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। युवा रक्तदान की मुहिम को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
मेहनत से हासिल किया मुकाम
धर्मद्र राणा की स्कूली शिक्षा विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों में हुई। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक करने के बाद एनआईआईटी लखनऊ से ऑनर्स डिप्लोमा इन सिस्टम मैनेजमेंट किया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से चार साजेक्ट्स कंप्यूटर, इंगलिश, इकॉनोमिक्स और मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजूएट कर वल्लभ कॉलेज में बतौर फैक्लिटी सेवाएं दी हैं। कुछ हट कर करने की जिद के चलते 2003 में उन्होंने आईटी एजूकेशन में मशहूर एनआईआईटी इंस्टीच्यूट मंडी की शुरूआत की।
रोटेरियन का समपर्ण
समाजसेवा के लिए समर्पित धर्मेंद्र राणा 2008 में रोटरी क्लब के साथ जुड़े। 2015 में उन्हें एक साल के लिए रोटरी क्लब मंडी के अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी गई है। रोटरी क्लब के अध्यक्ष के तौर पर वह वृद्वों, विकलांगों, कुष्ठरोगियों की सेवा में तत्पर हैं। निर्धन बच्चों के उपचार के लिए भी वह हमेशा आगे रहते हैं। वर्तमान में रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3070 जो कि पंजाब, जम्मू कश्मीर व हिमाचल से मिलकर बनती है, के डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन के तौर पर उसके 106 क्लबों को अपनी सेवायें दे रहे हैं।
पिता ने सिखाया, बेटे ने अपनाया
एक सिपाही के रूप में सैना में अपना करिअर शुरू करने वाले मनमोहन सिंह ने कड़ी मेहनत से सेना में कमिशन पास किया और कर्नल रैंक तक पहुंचे। सेवानिवृति के बाद समाजसेवा में जुटे मनमोहन सिंह की सीख से उनके बेटे धर्मेंद्र ने समाजसेवा को प्राथमिकता दी। वह कहते हैं कि जरूरतमंदों के लिए काम करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली और उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए वह ऐसे वर्गों के उत्थान के लिए हमेशा आगे रहते हैं।

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