लॉकडाउन में ब्लड डोनेशन: कर्फ्यू में खुद कार ड्राइव कर पीजीआई पहुंचे रणदीप बत्ता, ब्लड डोनेट कर बचाई बुजुर्ग की जान

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लॉकडाउन में ब्लड डोनेशन: कर्फ्यू में खुद कार ड्राइव कर पीजीआई पहुंचे रणदीप बत्ता, ब्लड डोनेट कर बचाई बुजुर्ग की जान
विनोद भावुक की रिपोर्ट
ऐसे में जबकि देश करोना महामारी के चलते 21 दिनों के लॉकडाउन में है, अनमोल जीवन को बचाने के लिए ब्लड डोनर्स अपनी जान जोखिम में डाल कर ब्लड डोनेशन कर इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे ही फरिशतों को आपसे परिचित करवाने और उनको थैंक्यू बोलने के लिए हम न्यूज सीरिज शुरू कर रहे हैं। इस सीरिज की शुरूआत कर रहे हैं ब्लड बैंक ऑफ चंडीगढ़ कहे जाने वाले पंचकूला के ब्लड डोनर रणदीप बत्ता के साथ। लॉकडाउन के बीच 26 मार्च को रणदीप बत्ता के फान पर किसी अमित गुप्ता का फोन आया, जिनके पिता पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती थे और उन्हें तत्काल ओ पॉजीटिव खून की जरूरत थी। ऐसी स्थिति में जब घर के बाहर निकलने पर पाबंदी हो, ब्लड डोनेशन के लिए पंचकूला से पीजीआई पहुंचना आसान नही था। साथ ही करोना के संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी एतियात बरतना भी जरूरी था। खुद बत्ता ने पीजीआई के चिकित्सकों से बात की ओर अपने परिजनों को विश्वास में लेकर अपनी कार को खुद ड्राइव कर पीजीआई के लिए रवाना हो गए। रास्ते के कई जगह नाकों पर तैनात सरक्षा कर्मियों ने गाड़ी रोक पूछताछ की और पूछताछ के बाद ही उन्हें जाने दिया। रणदीप बत्ता ने एक बेटे के बजुर्ग बाप की सांसे बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल कर रक्तदान कर मानवता की सच्ची मिसाल पेश की। सोचिए जरा, उनकी जगह आप को ब्लड डोनेशन के लिए फोन आया होता तो आप क्या करते?
कश्मीर से कन्या कुमारी मिशन
3अप्रैल को रणदाप बत्ता मिजोरम में रक्तदान करने जाने वाले थे। उन्होंने इसके लिए एयर टिकट भी बुक करवा लिए थे। इस बीच लॉकडाउन हो गया। रणदीप बत्ता ब्लड डोनेशन जागरूकता के लिए ‘कश्मीर से कन्या कुमारी मिशन’ के तहत ही प्रदेश की राजधानी में जाकर रक्तदान करते थे। अब तक वे भारत के 15 राज्यों की राजधानियों में पहुंच कर रक्तदान कर चुके हैं। 17 साल की उम्र में सोलन के चायल में लगे ब्लड डोनेशन कैंप में अपनी उम्र छुपा कर पहली बार ब्लड डोनेट करने वाले रणदीप बत्ता अब तक 126 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह न केवल खुद ब्लड डोनेट करते हैं, बल्कि ब्लड डोनेशन कैंपों मे पहुंच कर पहली बार ब्लड डोनेट करने वाले डोनर्स को माटिवेट भी करते हैं। एक सफल कारोबारी और व्यस्त दिनचर्या के बावजूद रणदीप बत्ता के लिए उनका मिशन हमेशा प्राथमिकता रहा है।
रक्तदान के लिए अरमान
रणदीप बत्ता ने बताया कि युवावस्था में एनसीसी के दौरान शिक्षकों के प्ररित करने पर ब्लड डोनेशन की शुरूआत हुई। पंजाब विश्वविद्यालय के इवनिंग कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ब्लड डोनेशन की महत्ता का एहसास हुआ। फिर तो पीजीआई चंडीगढ़ में नियमित तौर पर ब्लड डोनेशन का सिलसिला शुरू हो गया। रणदीप बत्ता ने बताया कि ऐसा भी हुआ कि उन्होंने दो माह और एक माह के अंतराल में भी ब्लड डोनेट किया है। यह दुआओं का असर है कि आज भी वह पूरी तरह से फीट हैं और साल में नियमित तौर चार बार ब्लड डोनेट कर रहे हैं।
जन्मदिन पर रक्तदान
हर साल 3 अगस्त को रणदीप बत्ता अपने जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान करते हैं। यह सिलसिला कॉलेज के दिनों से ही जारी है। रणदीप बत्ता कहते हैं कि अपने कारोबार के सिलसिले में प्रदेश के बाहर रहने के बावजूद वह हर हाल में रक्तदान करते ही हैं। वह हिमाचल प्रदेश में कई कैंपों में भी रक्तदान कर चुके हैं। अब तो वह रक्तदान केंपों में नए ब्लड डोनर्स को प्रोत्साहित और प्रेरित करने को भी अपना कर्तव्य समझते हैं।
याद रहेगा वह दिन
रणदीप बत्ता ने बताया कि 2 अगस्त 1991 की बात है। पीजीआई में एम सभ्रांत परिवार की प्रौढ़ महिला भर्ती थी। डॉक्टरों ने उसके ऑप्रेशन से पहले फ्रैश ब्ल्ड उपलब्ध करवाने को कहा था। रणदीप बत्ता के बारे में पता कर उस महिला की बेटी ने उनसे संपर्क किया। बेटी ने मां के बारे में बताते हुए ब्लड डोनेशन के लिए निवेदन किया। बत्ता को अभी ब्लड डोनेट किए हुए एक माह भी नहीं हुआ था और वह अपने कारोबार के चक्कर में चंडीगढ़ से बाहर भी थे। रात को वह अपने घर पहुंचे और अगले दिन पीजीआई जा कर महिला को ब्लड डोनेट किया। डोनेशन के बाद उक्त महिला ने उन्हें एक हजार रूपए देने चाहे, जिसे लेने से उन्होंने इनकार कर दिया। महिला ने कहा कि वह उनकी मां समान है, ऐसे में बेटे को मां से पैसे ले लेने चाहिए। इस पर रणदीप ने कहा कि अगर वह उनका असली बेटा होता और उनको ब्लड डोनेट करता तो क्या फिर भी आप पैसे देते। यह सुनने ही वह महिला रणदीप को अपने आंचल में लेकर फूट- फूट कर रो पड़ी। संयोग से इस दिन उनका जन्मदिन था। बस फिर क्या था, हर साल जन्मदिन का जशन ब्लड डोनेशन के साथ मनाने का सिलसिला शुरू हो गया।
खुद का रोजगार, पहाड़ों से प्यार
रणदीप बत्ता ने बताया कि कभी उन्होंने अपने करिअर की शुरूआत जॉब के तौर पर की थी, लेकिन आज कड़ी मेहनत के बाद चंडीगढ़ में उनका मार्बल और टाईल्ज का खुद का कारोबार है। उन्होंने बाईक और कार पर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश का हर शहर- गांव घूमा है। उन्हें पहाड़ों से प्यार है और अवसर मिलते ही वह पहाड़ों की ओर निकल पड़ते हैं।

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