लॉकडाउन का फायदा उठाया, अपने बैम्बू आर्ट को चमकाया, राष्ट्रपति के हाथों द्मश्री पुरस्कार पाया, बोतलों में बांस की खूबसूरत कलाकृतियां बनाने वाले नादौन के करतार सिंह की प्रेरककथा

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लॉकडाउन का फायदा उठाया, अपने बैम्बू आर्ट को चमकाया, राष्ट्रपति के हाथों द्मश्री पुरस्कार पाया, बोतलों में बांस की खूबसूरत कलाकृतियां बनाने वाले नादौन के करतार सिंह की प्रेरककथा
हमीरपुर से विशाल राणा की रिपोर्ट
बेशक उसके खाते में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का ग्रैंडमास्टर खिताब और इंडियन एक्सीलेंसी व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उसके हुनर के कारनामे दर्ज थे, लेकिन दो साल पहले तक उसकी इस बिरली कला के बारे में ज्यादा चर्चा नहीं थी। कोविड 19 के चलते लगे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का इस बिरले कलाकार ने पूरा फायदा उठाया और अपनी कला को निखार कर ऐसी अनूठी कलाकृतियां बनाई कि देखने वाले दंग रह जाएँ।
न केवल बांस के टुकड़ों से बोतल के भीतर मंदिर बना डाला, बल्कि प्रधामन्त्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की बांस की कलाकृतियां भी बोतल के अन्दर बनाई। उनके अद्भुत काम के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है।
जिद और जुनून से अपने शौक को चरम पर पहुंचाकर विलुप्त हो रही इस बिरली कला को संजोए रखने के प्रयास में जुटे करतार सिंह सौंखले की कलासाधना की कथा जितनी रोचक है उतनी ही प्रेरक ही है।
ऐसे में जबकि टॉयज पार्क बनाने की राष्ट्रव्यापी कवायद जारी है और हिमाचल प्रदेश में नवाचार को स्टार्टअप तक पहुंचाने के लिए हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री स्टार्टअप स्कीम संचालित की जा रही है है, इस बैम्बू आर्ट्स की इस बिरली कला के संरक्षण के जरिये रोजगार की नई संभावनाओं को तलाशा जा सकता है।
रिटायर्डमेंट के बाद अपने पैसन को निखारा
हमीरपुर जिला के नादौन उपमंडल के टप्पा नारा में एक अप्रैल 1959 को पैदा हुए करतार सिंह एनआईटी हमीरपुर से मार्च 2019 में फार्मासिस्ट के पद से सेवानिवृत्त हुए है।
नौहंगी गांव में रहने वाले करतार सिंह को बेशक बचपन से ही बांस की कला के प्रति शौक था, लेकिन सरकारी नौकरी के चलते वह अपने इस शौक को परवाज नहीं दे पाए।
सेवानिवृति के बाद उन्होंने अपने इस शौक को फिर से जिन्दा कर इस पर गंभीरता से काम करना शुरू किया। कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती, नवाचार के लिए गहरे में डुबना पड़ता है।
धुन के पक्के करतार सिंह ने साल 2000 में शीशे की बोतल के अन्दर बांस से पहला डिजाइन तैयार किया। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया और पहली कामयाबी इस कला के संरक्षण की दिशा में बड़ी बुनियाद डाल गई।
सैंकड़ों कलाकृतियां बना चुके करतार
करतार सिंह ने तेज़ी से बोतलों में बांस की कलाकृतियां बनाने का सिलसिला जारी शुरू कर दिया और एक के बाद एक शानदार कलाकृतियां बना डालीं।
बैम्बू क्राफ्ट के सरंक्षण के लिए करतार सिंह ने देश – प्रदेश के विभिन्न भागों में कलाकृतियों की प्रदर्शनियां लगानी शुरू कर दीं। अभी तक वे देश के विभिन्न हिस्सों में भी लगा चुके हैं और अपनी कला से जमकर वाहवाही लूट चुके हैं।
पद्मश्री मिलने के बाद फोकस हिमाचल से संवाद में करतार सिंह ने बताया कि बैंबू आर्ट हिमाचल प्रदेश में रोजगार की संभावनाओं के नए दरवाजे खोल सकता है। बैंबू आर्ट को प्रोमोट करने के लिए प्रदेश सरकार को इसके प्रशिक्षण संस्थान खोलने के लिए पहल करनी चाहिए।

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