लीक से हट कर – चलाना रेल, उसके बायें हाथ का खेल, पालमपुर की किरण हिमाचल प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट

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लीक से हट कर – चलाना रेल, उसके बायें हाथ का खेल, पालमपुर की किरण हिमाचल प्रदेश की पहली महिला लोको पायलट
पालमपुर से संजीव कौशल की रिपोर्ट
रेल चलाना उसके बायें हाथ का खेल है। लीक से हट कर कुछ करने की जिद में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के पालमपुर उपमंडल की पुन्नर पंचायत के मसेरना गांव के एक आम घर की बेटी किरण ने हिमाचल प्रदेश की पहली लोको पायलट बनने का रिकॉर्ड स्थापित किया है। पिछले साल कानपुर में लोको पायलट का प्रशिक्षण लेकर किरण इंडियन रेलवे में एसिस्टेंट लोको पायलट के पद पर सेवाएं प्रदान कर रही है।
पिता ड्राईवर, बेटी लोको पायलट
मसेरना गांव के राजेंद्र कुमार एसडीएम पालमपुर के ड्राईवर रहे हैं, किरण उनकी दूसरी संतान है। किरण स्कूल के दिनों से ही पढ़ने में बहुत तेज थी, इसी वजह से उसके शिक्षकों ने उसे इलेक्ट्रॉनिक में डिप्लोमा करने की सलाह दी।शिक्षकों की सलाह पर अमल करते हुए किरण ने कांगड़ा से इलेक्ट्रोनिक में तीन वर्ष का डिप्लोमा किया और पंजाब के लोंगोवाल से बीटेक की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद किरण ने भारतीय रेलवे में एसिस्टंट लोको पायलट के पद के लिए अप्लाई किया और उसे चुन लिया गया। हिमाचल प्रदेश से पहली महिला लोको पायलट बनने के साथ ही वह पहाड़ के युवाओं की रोल मॉडल बन गई।
इंडियन रेलवे में महिला लोको पायलट्स
देश में पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव हैं। वह वर्ष 1988 में भारतीय रेलवे में बतौर एसिस्टंट लोको पायलट भर्ती हुई थीं। उनकी पहली तैनाती महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस में हुई थी। उत्तर पूर्व रेलवे में सहायक लोको पायलट के रूप में पहली बार यह उपलब्धि समता कुमारी के नाम रही है। समता कुमारी यूपी से हैं। वे 13 जुलाई 2010 को लखनऊ-गोंडा पैसेंजर ट्रेन की सहायक लोको पायलट के तौर पर कार्यरत हुईं। समता कुमारी देश की की पाचवीं महिला रेल चालक हैं। इन नामों के बीच हिमाचल की पहली सहायक लोको पायलट बनाने का रिकॉर्ड किरण के नाम दर्ज हो गया है।

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