लीक से हटकर – चायल के डॉक्यूमेंटरी मेकर रवि शर्मा यू ट्यूब पर वीडियो देखकर बन गए सफल सब्जी-फूल उत्पादक, प्राकृतिक खेती विधि अपनाकर सब्जियां और फूल उगाने का सफल प्रयोग करने वाले युवा

Spread the love

लीक से हटकर – चायल के डॉक्यूमेंटरी मेकर रवि शर्मा यू ट्यूब पर वीडियो देखकर बन गए सफल सब्जी-फूल उत्पादक, प्राकृतिक खेती विधि अपनाकर सब्जियां और फूल उगाने का सफल प्रयोग करने वाले युवा
शिमला से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट
महानगरों की आपाधापी से तंग आकर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला के चायल क्षेत्र बांजनी गांव के फिल्म एवं डॉक्यूमेंटरी मेकर रवि शर्मा ने खेती में बिना किसी अनुभव के बावजूद यू ट्यूब पर वीडियो देख कर सफल सब्जी व फूल उत्पादक बन कामयाबी की प्रेरककथा लिखी है। हालांकि फिल्म मेकिंग में उन्होंने अच्छा पैसा कमाया, लेकिन सात साल तक देश के विभिन्न शहरों में काम करने वाले रवि शर्मा को शहरों की चंकाचौंध बांध नहीं पाई। उन्होंने जब जमी जमाई नौकरी छोडक़र खेती-बाड़ी करने का फैसला लिया तो घर वालों के गुस्से का सामना करना पड़ा। विरोध के बावजूद वह घर लौटे और खेतों की ओर मुड़ गए। रवि शर्मा ने कड़ी मेहनत कर पांच सालों में न केवल खुद को एक सफल किसान के तौर पर स्थापित किया, बल्कि खेती के नए- नए प्रयोग करने में भी आगे रहे। रवि शर्मा ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाया है। वह देसी गाय के गोबर व गौ मूत्र से बनी खाद का प्रयोग अपने खेतों में करते हैं।
सब्जी उत्पादन से शुरूआत
रवि वर्ष 2014 में दिल्ली से अचानक नौकरी छोडक़र घर लौट आए। सबसे पहले सब्जियों की खेती करना शुरू कर दिया। परिवार के पास खेती करने का कोई अनुभव नहीं था। रवि ने यूट्यूब में विडियो देखकर सब्जियों की खेती से जरूरी सभी जानकारी हासिल की। इसके बाद कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर शिमला मिर्च और टमाटर की खेती शुरू कर दी। रवि को पहले साल कोई बड़ा लाभ नहीं हुआ। महज 60 हजार रूपये की आमदनी हुई। रवि ने अगले ही साल विशेषज्ञों से फूलों की खेती के बारे में जानकारी हासिल की और पॉली हाउस में फूलों की खेती शुरू कर दी। हालांकि शुरू में रवि को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा और घाटी भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब वह सब्जी व फूल उत्पादन में सलाना 10 लाख रूपये कमा रहे हैं।
प्राकृतिक खेती पर फोकस
रवि बताते हैं कि पिछले साल से ही हिमाचल सरकार ने प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की शुरूआत की है। उन्होने उनसे छह दिन का प्रशिक्षण लेकर अपने खेतों में फूलों व सब्जियों में भी प्राकृतिक खेती का प्रयोग शुरू कर दिया। इस खेती विधि से पहले ही साल में लागत में दस गुना कमी आई और मुनाफा दोगुणा हो गया। इसलिए अब मैंने अपनी पूरे खेतों में इसी विधि से खेती करने का फैसला लिया है। मैंने प्राकृतिक खेती को इसलिए भी अपनाया कि इस क्षेत्र में पानी की भी दिक्कत है और इस विधि से खेती करने में कम पानी लगता है। रवि कहते हंै कि लगातार रासायनों के प्रयोग से उनके खेतों की मिट्टी कठोर हो गई थी और उसकी उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो गई थी। प्राकृतिक खेती की पहल करने से उनके खेतों की मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है।
फूलों की खेती की ओर
रवि अगले साल से अपनी सारी जमीन पर प्राकृतिक खेती विधि से ही सब्जियों और फूलों की खेती करने जा रहे हैं। वे सेब उत्पादन, इंग्लिश वेजिटेबल और विदेशी किस्म के फूलों की खेती करने की पहल कर रहे हैं। रवि बताते हैं कि इस साल खेत एवं पॉलीहाउस में अलग-अलग वैरायटी की बीन्स, कलर्ड केप्सिकम, ब्रसिका केल जैसी सब्जियां लगाईं। सब्जियों में सह-फसल के तौर पर धनिया लगाया। वे बताते हैं कि धनिया लगाने से सब्जियों में व्हाइटफ्लाई की जो समस्या रहती थी, उससे उन्हें निजात मिली है। सब्जी उत्पादन के अलावा फूलों में उन्होंने कारनेशन, डेजी, ग्लेडियोलस तथा गेंदा लगाया है। वे कहते हैं कि न केवल सब्जियों की ग्रोथ बेहतर है, बल्कि फूलों की भी पैदावार अच्छी है। रवि को इस बात की खुशी है कि वे अपने प्रयोगों में सफल रहे हैं।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *